हिंदी की संवैधानिक स्थिति

प्रस्तावना भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है, जहाँ विभिन्न भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात्, एक ऐसी ...
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लोंजाइनस : काव्य में उदात्त तत्व

भूमिका पाश्चात्य काव्यशास्त्र के इतिहास में ‘लोंजाइनस’ (Longinus) एक महत्वपूर्ण नाम है, जिन्होंने काव्य के मूल्यांकन में ‘उदात्तता’ (Sublimity) को ...
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स्त्री विमर्श की अवधारणा

प्रस्तावना स्त्री विमर्श आधुनिक आलोचना और सामाजिक चिंतन का एक महत्वपूर्ण आयाम है, जो स्त्रियों के सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और ...
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ध्वनि संप्रदाय (भारतीय काव्यशास्त्र)

प्रस्तावना भारतीय काव्यशास्त्र की समृद्ध परंपरा में विभिन्न संप्रदायों ने साहित्यिक रस, अलंकार और अर्थ की व्याख्या अपने-अपने दृष्टिकोण से ...
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टी. एस. एलियट : परंपरा की अवधारणा

प्रस्तावना बीसवीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में अंग्रेज़ी साहित्य के क्षेत्र में अनेक नवोन्मेषी विचारकों और कवियों का प्रादुर्भाव हुआ, ...
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आई.ए. रिचर्ड्स : मूल्य सिद्धांत

प्रस्तावना आधुनिक साहित्यिक आलोचना के क्षेत्र में आई. ए. रिचर्ड्स (I. A. Richards) का नाम एक अत्यंत प्रभावशाली विचारक और ...
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हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की पद्धतियां

प्रस्तावना हिंदी साहित्य का इतिहास लेखन एक जटिल और बहुआयामी प्रक्रिया है, जो न केवल साहित्यिक कृतियों के कालानुक्रमिक विकास ...
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अस्तित्ववाद

भूमिका 20वीं शताब्दी का दर्शन यदि किसी विचारधारा से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, तो वह है ‘अस्तित्ववाद’ (Existentialism)। यह ...
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कॉलरिज का कल्पना और फैंटेसी का सिद्धांत

भूमिका 19वीं शताब्दी की प्रारंभिक अवधि में अंग्रेज़ी साहित्य में एक प्रमुख नाम थे सैमुअल टेलर कॉलरिज (Samuel Taylor Coleridge)। ...
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रस संप्रदाय

प्रस्तावना भारतीय काव्यशास्त्र में ‘रस’ की अवधारणा अत्यंत प्राचीन एवं मूलभूत मानी जाती है। ‘रस संप्रदाय’ एक ऐसा काव्यशास्त्रीय दृष्टिकोण ...
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