रस निष्पत्ति की अवधारणा

प्रस्तावना भारतीय काव्यशास्त्र में “रस” का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। रस न केवल कविता या साहित्य का प्राण माना गया ...
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औचित्य संप्रदाय (भारतीय काव्यशास्त्र)

प्रस्तावना भारतीय दर्शन की विविध धाराओं में औचित्य संप्रदाय (auchitya sampradaya) एक महत्वपूर्ण साहित्यिक और काव्य-मीमांसीय अवधारणा है, जिसे महाकवि ...
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नई समीक्षा

प्रस्तावना हिंदी साहित्य की आलोचना परंपरा में समय-समय पर अनेक दृष्टिकोण और प्रवृत्तियाँ उभरी हैं। बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ...
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रूसी रूपवाद

प्रस्तावना बीसवीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में साहित्यिक आलोचना और भाषा विज्ञान के क्षेत्र में अनेक नवीन प्रवृत्तियाँ सामने आईं। ...
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आई.ए. रिचर्डस का काव्यभाषा सिद्धान्त

प्रस्तावना काव्यभाषा (Poetic Language) का प्रश्न साहित्यिक विमर्श में सदैव केंद्रीय रहा है। बीसवीं शताब्दी के आधुनिक आलोचक आई. ए. ...
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उत्तर आधुनिकतावाद

प्रस्तावना उत्तर आधुनिकतावाद (Postmodernism) 20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में उभरा एक सैद्धांतिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक आंदोलन है, जिसने आधुनिकता (Modernism) ...
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मनोविश्लेषणवाद

परिचय मनोविश्लेषणवाद (Psychoanalysis) 20वीं शताब्दी का एक प्रमुख मनोवैज्ञानिक सिद्धांत है, जिसकी स्थापना ऑस्ट्रिया के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक सिग्मंड फ्रायड (Sigmund ...
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चंद्रगुप्त। नाटक। नोट्स

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘चंद्रगुप्त‘ हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक नाटक है, जिसका प्रकाशन 1931 ई. में हुआ था। ...
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महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण

प्रस्तावना हिंदी साहित्य के इतिहास में महावीर प्रसाद द्विवेदी (1864–1938) का स्थान अत्यंत विशिष्ट और प्रभावशाली है। वे केवल एक ...
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वक्रोक्ति संप्रदाय (भारतीय काव्यशास्त्र)

प्रस्तावना भारतीय काव्यशास्त्र में वक्रोक्ति संप्रदाय एक महत्वपूर्ण अलंकारिक सिद्धांत है, जिसे काव्य की सौंदर्यात्मकता और प्रभावशीलता के मूल्यांकन में ...
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