स्वच्छंदतावाद क्या है ?

भूमिका

स्वच्छंदतावाद (Romanticism) साहित्य, कला और दर्शन का वह महत्त्वपूर्ण आंदोलन है जिसने अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध और उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में यूरोप सहित विश्व-संस्कृति की दिशा बदल दी। ‘Romanticism’ शब्द की व्युत्पत्ति ‘Romance’ से मानी जाती है, जिसका संबंध मध्ययुगीन यूरोप की प्रेमकथाओं और कल्पनाप्रधान आख्यानों से है। हिंदी में ‘स्वच्छंदतावाद’ शब्द उस साहित्यिक प्रवृत्ति का बोध कराता है जिसमें रचनाकार किसी बाह्य नियम, शास्त्रीय अनुशासन या सामाजिक बंधन से मुक्त होकर अपनी आंतरिक अनुभूति को अभिव्यक्त करता है। यहाँ ‘स्वच्छंद’ का अर्थ है—स्वतंत्र, बंधनमुक्त और आत्मप्रेरित।

यह आंदोलन क्लासिसिज़्म (Classicism) की तर्कप्रधानता, नियमबद्धता और अनुशासनात्मक कठोरता के विरुद्ध एक सशक्त प्रतिक्रिया के रूप में उभरा। स्वच्छंदतावाद ने मानव-हृदय की अनुभूतियों, कल्पना, प्रकृति, स्वतंत्रता और व्यक्तिवाद को केंद्र में रखा। इस क्रांति के बौद्धिक नायक ज्यां-ज़ाक रूसो को स्वच्छंदतावादी चिंतन की शुरूआत का श्रेय दिया जाता है। 1761 ई. में प्रकाशित रूसो की औपन्यासिक कृति ‘Julie, or the New Heloise’ और उनकी आत्मकथा ‘Confessions’ में इनके स्वच्छंदतावादी नज़रिये को देखा जा सकता है।


रूसो का संक्षिप्त परिचय

ज्यां-जाक रूसो (1712–1778) अठारहवीं शताब्दी के एक प्रमुख फ्रांसीसी दार्शनिक, लेखक और विचारक थे।

रूसो का जन्म 28 जून 1712 को जिनेवा (वर्तमान स्विट्ज़रलैंड) में हुआ। वे मूलतः स्वशिक्षित थे और उनके विचारों में प्रकृति, स्वतंत्रता, समानता और मानव की मौलिक भलमनसाहत पर विशेष बल मिलता है। उनका प्रसिद्ध कथन— “मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता है, लेकिन हर जगह जंजीरों में जकड़ा है”—उनकी राजनीतिक दर्शन की मूल भावना को व्यक्त करता है। साहित्य और दर्शन के क्षेत्र में रूसो को स्वच्छंदतावाद (Romanticism) का अग्रदूत माना जाता है। उनके विचारों ने फ्रांसीसी क्रांति, आधुनिक लोकतंत्र, शिक्षा-दर्शन और साहित्यिक चिंतन पर गहरा प्रभाव डाला।

संक्षेप में, रूसो मानव स्वतंत्रता, प्राकृतिक जीवन और समानता के प्रखर विचारक थे, जिनकी चिंतनधारा आज भी राजनीतिक, दार्शनिक और साहित्यिक विमर्श में अत्यंत प्रासंगिक है।


स्वच्छंदतावाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1. नवशास्त्रवाद और बुद्धिवाद के विरुद्ध प्रतिक्रिया

स्वच्छंदतावाद से पूर्व यूरोप में नवशास्त्रवाद और बुद्धिवाद का प्रभुत्व था। इस युग में साहित्य और कला में—

  • तर्क, नियम और अनुशासन

  • संतुलन, संयम और शास्त्रीय आदर्श

  • बुद्धि को भावना से श्रेष्ठ मानना

जैसे तत्व प्रमुख थे। साहित्य में रचना-स्वातंत्र्य सीमित था और कवि को निश्चित नियमों का पालन करना पड़ता था। इस बौद्धिक कठोरता के विरुद्ध स्वच्छंदतावाद एक प्रतिक्रिया के रूप में उभरा, जिसने कहा कि—

मानव केवल तर्कशील प्राणी नहीं, बल्कि भावनात्मक और कल्पनाशील भी है।


2. औद्योगिक क्रांति का प्रभाव

अठारहवीं शताब्दी में इंग्लैंड से आरंभ हुई औद्योगिक क्रांति ने सामाजिक जीवन को पूरी तरह बदल दिया। इससे हमें कई तरह के परिवर्तन देखने को मिले, जिनमें से प्रमुख थे-

  • ग्रामीण जीवन का विघटन

  • मशीनों का बढ़ता प्रभाव

  • नगरों का विस्तार

  • श्रमिक वर्ग का शोषण

  • मानवीय संबंधों में यांत्रिकता

इन परिवर्तनों से मानव जीवन में अकेलापन, असंतोष और नैराश्य उत्पन्न हुआ। स्वच्छंदतावादी कवियों ने मशीन-संस्कृति के विरोध में प्रकृति, ग्राम्य जीवन और मानवीय संवेदना को महत्त्व दिया। उनके लिए प्रकृति शांति, सौंदर्य और आत्मिक मुक्ति का स्रोत थी।


3. फ्रांसीसी क्रांति 

1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने “स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व” के नारे के साथ पूरे यूरोप की चेतना को झकझोर दिया। इस क्रांति के परिणामस्वरूप विद्रोह की भावना उत्पन्न हुई। स्वच्छंदतावाद ने इसी  से प्रेरणा लेकर साहित्य में व्यक्ति-स्वातंत्र्य, विद्रोह और आत्म-अभिव्यक्ति को प्रधानता दी।


4. लोक-संस्कृति और मध्ययुगीन आकर्षण

स्वच्छंदतावादियों ने लोकगीतों, लोककथाओं ,मध्ययुगीन इतिहास और वीरगाथाओं की ओर विशेष आकर्षण दिखाया। इसका कारण यह था कि उन्हें आधुनिक यांत्रिक सभ्यता की अपेक्षा अतीत की सरलता, सहजता और भावुकता अधिक मानवीय प्रतीत होती थी।


5. प्रकृति-पूजा और प्राकृतिक जीवन की ओर झुकाव

स्वच्छंदतावादियों के लिए प्रकृति केवल बाहरी दृश्य नहीं, बल्कि जीवंत सत्ता थी। पर्वत, नदियाँ, वन, आकाश—सब मानवीय भावनाओं के प्रतीक बन गए। यह प्रवृत्ति औद्योगिक सभ्यता की कृत्रिमता के विरोध में विकसित हुई। कवियों ने प्रकृति में ईश्वर, सत्य और सौंदर्य की अनुभूति की।


स्वच्छंदतावाद की प्रमुख विशेषताएँ

1. भावनाओं की प्रधानता

स्वच्छंदतावाद में तर्क के स्थान पर भावना को सर्वोच्च माना गया। कवि का हृदय उसकी रचना का केंद्र बनता है। दुख, प्रेम, करुणा, उल्लास, पीड़ा—सब कुछ मुक्त भाव से अभिव्यक्त होता है।

2. कल्पना का महत्त्व

इसमें कल्पना को रचनात्मक शक्ति माना गया। सैमुअल टेलर कॉलरिज ने ‘Primary Imagination’ और ‘Secondary Imagination’ का सिद्धांत देकर कल्पना को काव्य-निर्माण की आत्मा घोषित किया।

3. प्रकृति-प्रेम

प्रकृति स्वच्छंदतावादियों के लिए केवल दृश्य-सौंदर्य नहीं, बल्कि जीवंत सत्ता है। विलियम वर्ड्सवर्थ ने प्रकृति को ‘मानव-मन की गुरु’ कहा। उनके काव्य में प्रकृति संवेदनशील, नैतिक और आध्यात्मिक शक्ति के रूप में उपस्थित है।

4. व्यक्तिवाद

स्वच्छंदतावाद व्यक्ति की स्वतंत्र अनुभूति को महत्त्व देता है। इसमें समाज या परंपरा से अधिक महत्त्व ‘मैं’ (Self) को दिया गया। यहां कवि अपने निजी अनुभवों को सार्वभौमिक बना देता है।

5. विद्रोह और स्वतंत्रता

स्वच्छंदतावादी कवि सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक बंधनों के विरुद्ध विद्रोह करते हैं। लॉर्ड बायरन का ‘Byronic Hero’ इसी विद्रोही चेतना का प्रतीक है।

6. अतीत और लोक-संस्कृति के प्रति आकर्षण

मध्ययुगीन आख्यान, लोकगीत, मिथक और परंपराएँ स्वच्छंदतावादियों को आकृष्ट करती हैं—क्योंकि इनमें मानवीय भावनाओं की सहजता है।


स्वच्छंदतावाद और काव्य-भाषा

स्वच्छंदतावाद ने काव्य-भाषा को सरल, सहज और जनसुलभ बनाया। अलंकरणों की कृत्रिमता के स्थान पर स्वाभाविकता आई। वर्ड्सवर्थ ने साधारण जन की भाषा में कविता लिखने का आग्रह किया। इससे कविता अभिजात वर्ग से निकलकर आम मनुष्य के निकट पहुँची।


प्रमुख स्वच्छंदतावादी कवि और उनका योगदान

विलियम वर्ड्सवर्थ

विलियम वर्ड्सवर्थ प्रकृति-काव्य के अप्रतिम कवि थे। ‘Lyrical Ballads’ (1798) में उन्होंने कविता की नई दिशा तय की—जहाँ साधारण जीवन और प्रकृति केंद्र में हैं।

सैमुअल टेलर कॉलरिज

सैमुअल टेलर कॉलरिज कल्पना के सिद्धांतकार थे। उनकी कविताओं में रहस्य, अलौकिकता और मनोवैज्ञानिक गहराई मिलती है—‘The Rime of the Ancient Mariner’ इसका उदाहरण है।

लॉर्ड बायरन

लॉर्ड बायरन विद्रोही, साहसी और आत्मकेन्द्रित व्यक्तित्व थे। उनके नायक समाज से टकराते हैं और स्वतंत्रता की कीमत चुकाते हैं।

परसी बिश शेली

परसी बिश शेली आदर्शवादी और क्रांतिकारी कवि थे। स्वतंत्रता, प्रेम और मानव-मुक्ति उनके काव्य के मूल स्वर हैं।

जॉन कीट्स

जॉन कीट्स सौंदर्य के कवि थे। ‘Beauty is truth, truth beauty’ उनका प्रसिद्ध कथन है। उनकी कविताओं में इंद्रिय-सौंदर्य और करुणा का अद्भुत संयोग है।


स्वच्छंदतावाद की सीमाएँ

स्वच्छंदतावाद जितना प्रभावशाली है, उतना ही आलोच्य भी, विभिन्न आलोचकों ने इस पर कई प्रश्न चिन्ह भी लगाए हैं, जिनमें से प्रमुख हैं-

  1. अतिभावुकता: कभी-कभी इसमें भावना की अति से संतुलन बिगड़ जाता है।
  2. व्यक्तिनिष्ठता: इस पर सामाजिक यथार्थ की उपेक्षा का आरोप लगता है।
  3. अव्यवस्थित संरचना: इसमें शास्त्रीय अनुशासन के अभाव में रचनाएँ असंतुलित लग सकती हैं।

स्वच्छंदतावाद का हिंदी साहित्य पर प्रभाव

हिंदी साहित्य में छायावाद स्वच्छंदतावाद का भारतीय रूप माना जाता है। जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा और निराला के काव्य में भावना, प्रकृति, व्यक्तिवाद और कल्पना की प्रधानता स्पष्ट दिखाई देती है। इस प्रकार स्वच्छंदतावाद ने हिंदी कविता को आत्मानुभूति और सौंदर्य की नई ऊंचाइयां दीं।


निष्कर्ष

स्वच्छंदतावाद केवल एक साहित्यिक आंदोलन नहीं, बल्कि मानवीय चेतना का उत्सव है। इसने मनुष्य को उसकी भावनाओं, कल्पनाओं और स्वतंत्रता के साथ स्वीकार किया। यद्यपि इसकी कुछ सीमाएँ हैं, फिर भी इसने साहित्य को आत्मा दी—जिसके बिना रचना केवल शब्दों का ढाँचा रह जाती। स्वच्छंदतावाद आज भी हमें यह सिखाता है कि साहित्य का मूल स्रोत मानव-हृदय है, और वही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।


वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1➤ स्वच्छंदतावाद का उदय मुख्यतः किस शताब्दी में हुआ?





2➤ ‘Romanticism’ शब्द की व्युत्पत्ति किस शब्द से मानी जाती है?





3➤ स्वच्छंदतावाद किस साहित्यिक प्रवृत्ति के विरोध में विकसित हुआ?





4➤ स्वच्छंदतावाद में किसे सर्वोच्च स्थान दिया गया है?





5➤ स्वच्छंदतावाद का बौद्धिक प्रवर्तक किसे माना जाता है?





6➤ “मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता है, लेकिन हर जगह जंजीरों में जकड़ा है”—यह कथन किसका है?





7➤ स्वच्छंदतावाद में प्रकृति को किस रूप में देखा गया?





8➤ स्वच्छंदतावाद में ‘मैं’ (Self) की प्रधानता किस प्रवृत्ति को दर्शाती है?





9➤ प्रकृति को ‘मानव-मन की गुरु’ किस कवि ने कहा?





10➤ “Beauty is truth, truth beauty” किस कवि का कथन है?





11➤ स्वच्छंदतावाद में काव्य-भाषा कैसी हो गई?





12➤ स्वच्छंदतावाद की एक प्रमुख सीमा कौन-सी है?





13➤ स्वच्छंदतावाद पर व्यक्तिनिष्ठता का आरोप क्यों लगता है?





14➤ हिंदी साहित्य में स्वच्छंदतावाद का भारतीय रूप क्या है?





15➤ स्वच्छंदतावाद का मूल स्रोत क्या माना गया है?





16➤ स्वच्छंदतावाद ने कविता को किस वर्ग के निकट पहुँचाया?





17➤ स्वच्छंदतावाद किसका उत्सव है?





 

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