# Hindi Department ## Posts - [स्वच्छंदतावाद क्या है ?](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9b%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): भूमिका स्वच्छंदतावाद (Romanticism) साहित्य, कला और दर्शन का वह महत्त्वपूर्ण आंदोलन है जिसने अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध और उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में यूरोप सहित विश्व-संस्कृति की दिशा बदल दी। ‘Romanticism’ शब्द की व्युत्पत्ति ‘Romance’ से मानी जाती है, जिसका संबंध मध्ययुगीन यूरोप की प्रेमकथाओं और कल्पनाप्रधान आख्यानों से है। हिंदी में ‘स्वच्छंदतावाद’ शब्द उस साहित्यिक प्रवृत्ति का बोध कराता है जिसमें रचनाकार किसी बाह्य नियम, शास्त्रीय अनुशासन या सामाजिक बंधन से मुक्त होकर अपनी आंतरिक अनुभूति को अभिव्यक्त करता है। यहाँ ‘स्वच्छंद’ का अर्थ है—स्वतंत्र, बंधनमुक्त और आत्मप्रेरित। यह आंदोलन क्लासिसिज़्म (Classicism) की तर्कप्रधानता, नियमबद्धता और अनुशासनात्मक कठोरता के ... Read more - [Current Affairs- December 2025](https://hindidepartment.com/current-affairrs-december-2025/): 1➤ 56वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में ‘स्किन ऑफ यूथ’ को गोल्डन पीकॉक अवॉर्ड मिला है, इसका संबंध किस देश से है ? श्रीलंका ऑस्ट्रेलिया वियतनाम जापान ➤ वियतनाम 👁 Show Answer 2➤ नागालैंड राज्य अपना स्थापना दिवस कब मनाता है ? 1 दिसंबर 2 दिसंबर 3 दिसंबर 4 दिसंबर ➤ 1 दिसंबर 👁 Show Answer 3➤ भारत में प्रत्येक वर्ष ‘नेशनल पॉल्यूशन कंट्रोल डे’ कब मनाया जाता है ? 1 दिसंबर 5 दिसंबर 2 दिसंबर 3 दिसंबर ➤ 2 दिसंबर 👁 Show Answer 4➤ सुल्तान अज़लान शाह कप में भारत ने कौन-सा पदक जीता है ? गोल्ड सिल्वर ब्रॉन्ज ... Read more - [Uttar Pradesh Current Affairs 2025 (Part-2)](https://hindidepartment.com/uttar-pradesh-current-affairs-2025-part-2/): 1➤ उत्तर प्रदेश के किन दो शहरों के मध्य स्थित दोआब में लुप्त प्राचीन नदी के अस्तित्व के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं ? कानपुर तथा प्रयागराज प्रयागराज तथा वाराणसी वाराणसी तथा बलिया पीलीभीत तथा जौनपुर ➤ कानपुर तथा प्रयागराज 👁 Show Answer 2➤ सितंबर 2025 में उत्तर प्रदेश के किस ज़िले को महाभारत सर्किट में शामिल किया गया है ? सहारनपुर शामली बागपत मेरठ ➤ बागपत 👉 पांडवों से संबंधित बागपत ज़िले के बरनावा में स्थित ऐतिहासिक स्थल को उत्तर प्रदेश की महाभारत सर्किट परियोजना के तहत एक करोड़ रूपए की लागत से व्यापक स्तर पर विकसित किए जाने की ... Read more - [आधुनिकतावाद क्या है ?](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): भूमिका बीसवीं शताब्दी मानव इतिहास का एक निर्णायक कालखंड है। औद्योगिक क्रांति, वैज्ञानिक आविष्कार, दो विश्व युद्ध, उपनिवेशवाद का पतन, नगरीकरण, पूँजीवाद, समाजवादी आंदोलनों और तीव्र तकनीकी विकास ने मानव जीवन की संरचना, चेतना और मूल्यबोध को गहराई से प्रभावित किया। इन्हीं व्यापक ऐतिहासिक, सामाजिक और मानसिक परिवर्तनों के गर्भ से आधुनिकतावाद (Modernism) का उदय हुआ। आधुनिकतावाद केवल एक साहित्यिक आंदोलन नहीं है, बल्कि यह एक समग्र सांस्कृतिक और बौद्धिक दृष्टिकोण है, जिसने कला, साहित्य, दर्शन, संगीत, चित्रकला और वास्तुकला—सभी क्षेत्रों में परंपरागत मान्यताओं को चुनौती दी। आधुनिकतावाद मूलतः परंपरा-विरोधी, प्रयोगधर्मी और व्यक्ति-केंद्रित चेतना का प्रतिनिधि है। यह स्थिर मूल्यों, ... Read more - [उत्तर-संरचनावाद क्या है ?](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b0%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): भूमिका बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पश्चिमी चिंतन-परंपरा में एक महत्त्वपूर्ण वैचारिक उद्भव हुआ, जिसे ‘उत्तर–संरचनावाद’ के नाम से जाना जाता है। यह संरचनावाद की सीमाओं, कठोरता और उसकी वैज्ञानिक-तटस्थता के दावे के विरुद्ध उत्पन्न हुई चिंतनधारा है। यदि संरचनावाद भाषा और अर्थ को स्थिर संरचनाओं में बाँधकर देखने की प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करता है, तो उत्तर–संरचनावाद उन्हें निरंतर प्रवाहमान, अस्थिर, बहुअर्थी और संदर्भ-निर्भर मानता है। यह न केवल साहित्यिक आलोचना बल्कि दर्शन, भाषाविज्ञान, नृविज्ञान, समाजशास्त्र, इतिहासलेखन, मनोविश्लेषण तथा सांस्कृतिक अध्ययन को भी गहरे रूप से प्रभावित करने वाली बौद्धिक क्रांति है। उत्तर–संरचनावाद का मूल स्वभाव ‘विमर्शात्मक’ और ‘विघटनकारी’ है—यह ... Read more - [लोक-साहित्य : पारिभाषिक स्वरूप एवं तत्व](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a5%8d/): भूमिका भारतीय संस्कृति की जड़ों में लोक-समाज की स्मृतियाँ, अनुभव, आस्थाएँ, संवेदनाएँ और मान्यताएँ जिस रूप में संरक्षित हैं, उन्हें सामूहिक रूप से लोक-साहित्य कहा जाता है। यह साहित्य पुस्तकों में जन्म नहीं लेता, न ही किसी प्रतिष्ठित साहित्यकार का निजी सृजन होता है। यह लोक-चेतना की धड़कनों से निर्मित होता है और मौखिक परंपरा के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रवाहित होता रहता है। लोक-साहित्य किसी संस्कृति का भाषा-रहित प्रमाण–पत्र होता है, जो उस समाज की ऐतिहासिक अनुभूतियों, संघर्षों, त्यौहारों, दुःख और सुख की कहानी कहता है। इसलिए लोक-साहित्य को सभ्यता के विकास का जीवित दस्तावेज माना गया है। लोक-साहित्य के ... Read more - [Current Affairs - November 2025](https://hindidepartment.com/current-affairs-november-2025/): 1➤ चावंग कुट महोत्सव किस राज्य में मनाया जाता है ? नागालैंड मिजोरम मणिपुर असम ➤ मणिपुर 👁 Show Answer 2➤ हाल ही में भारत के 90वें शतरंज ग्रैंडमास्टर कौन बने हैं ? गुकेश कुमार रोहित कृष्णा दिव्या देशमुख इलमपर्थी ➤ इलमपर्थी 👁 Show Answer 3➤ हाल ही में ICC महिला विश्व कप 2025 का खिताब किसने जीता है ? भारत ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड दक्षिण अफ्रीका ➤ भारत 👁 Show Answer 4➤ हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो के महानिदेशक पद पर किसे नियुक्त किया गया है ? संजय गर्ग विश्वजीत विजय कुमार सत्यप्रकाश ➤ संजय गर्ग 👁 Show Answer 5➤ ... Read more - [Current Affairs - October 2025](https://hindidepartment.com/current-affairs-october-2025/): 1➤ हाल ही में ‘घोस्ट टाउन विज़िटर’ चित्र के लिए किसे सर्वश्रेष्ठ वन्यजीव फोटोग्राफ़र का पुरस्कार दिया गया ? माइकल कोनी विम वैन डेन पीटर जेम्स विलियम ➤ विम वैन डेन 👁 Show Answer 2➤ हाल ही में अंडर-20 फीफा फुटबॉल विश्वकप 2025 का खिताब किसने जीता है ? स्पेन ब्राजील फ्रांस मोरक्को ➤ मोरक्को 👁 Show Answer 3➤ ‘वी राइज़’ पहल की शुरूआत किसने की है ? शिक्षा मंत्रालय नीति आयोग महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कृषि मंत्रालय ➤ नीति आयोग 👁 Show Answer 4➤ ‘विश्व पोलियो दिवस’ कब मनाया जाता है ? 21 अक्टूबर 22 अक्टूबर 23 अक्टूबर ... Read more - [संरचनावाद क्या है ?](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b0%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): भूमिका मानव सभ्यता के बौद्धिक इतिहास में बीसवीं शताब्दी को विचारों की क्रांतिकारी शताब्दी माना जाता है। इस युग में न केवल साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में नए प्रयोग हुए, बल्कि भाषा, दर्शन, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और मानवशास्त्र में भी नए वैचारिक दृष्टिकोण विकसित हुए। इसी बौद्धिक परिप्रेक्ष्य में एक महत्त्वपूर्ण विचारधारा के रूप में संरचनावाद (Structuralism) का उदय हुआ।संरचनावाद ने भाषा, साहित्य और समाज के अध्ययन में एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसमें किसी एक तत्व को अलग करके नहीं, बल्कि सम्पूर्ण संरचना के संदर्भ में समझने पर बल दिया गया। यह विचारधारा कहती है कि किसी भी ... Read more - [कल्पना की अवधारणा](https://hindidepartment.com/%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be/): भूमिका मानव जीवन की संपूर्ण सृष्टि और सभ्यता का आधार उसकी सोचने, गढ़ने और नए रूपों का निर्माण करने की क्षमता है। यही शक्ति कल्पना (Imagination) कहलाती है। कल्पना वह मानसिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से मनुष्य वास्तविकता से परे जाकर ऐसे रूप, दृश्य, घटनाएँ और संसार रचता है, जो प्रत्यक्षतः सामने उपस्थित नहीं होते। दर्शन, साहित्य, कला, संगीत, विज्ञान और संस्कृति – सभी के विकास में कल्पना की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। यदि मनुष्य में कल्पना न होती तो न कविता का सृजन संभव होता, न विज्ञान की खोजें, न ही जीवन की गहराइयों और ऊँचाइयों तक पहुँचना। इस ... Read more - [Current Affairs - September 2025](https://hindidepartment.com/current-affairs-september-2025/): 1➤ विश्व हृदय दिवस कब मनाया जाता है ? 26 सितंबर 27 सितंबर 28 सितंबर 29 सितंबर ➤ 29 सितंबर 👁 Show Answer 2➤ हाल ही में केंद्रीय मंत्री श्री सोनोवाल ने भारत के पहले समुद्री सिमुलेशन केंद्र का उद्घाटन कहां किया है ? भुवनेश्वर पणजी अहमदाबाद चेन्नई ➤ चेन्नई 👁 Show Answer 3➤ हाल ही में आरबीआई का डिप्टी गवर्नर किसे नियुक्त किया गया है ? मिथुन मन्हास आर वेंकटरमणि कणाद दास शिरीष चंद्र मुर्मू ➤ शिरीष चंद्र मुर्मू 👁 Show Answer 4➤ हाल ही में UPI अपनाने वाला 8वां देश कौन सा है ? ब्राजील जापान कतर दक्षिण ... Read more - [मिथक क्या है ?](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): प्रस्तावना मानव सभ्यता के विकास में कथा-परंपरा की अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रारंभिक काल में जब मनुष्य प्रकृति की शक्तियों को समझने और नियंत्रित करने में असमर्थ था, तब उसने कल्पना और अनुभव के आधार पर अनेक कथाओं का सृजन किया। ये कथाएँ केवल मनोरंजन का साधन नहीं थीं, बल्कि समाज की आस्था, भय, आकांक्षा और ज्ञान की अभिव्यक्ति भी थीं। इन्हीं कथाओं को व्यापक अर्थ में ‘मिथक’ (Myth) कहा जाता है। मिथक जीवन और संस्कृति के बीच सेतु का कार्य करते हैं। वे हमें यह समझने में मदद करते हैं कि किसी विशेष समय में समाज किस प्रकार ... Read more - [भारतीय उपन्यास की अवधारणा](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a3/): भूमिका भारतीय साहित्य का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। वेदों, उपनिषदों, महाकाव्यों और पुराणों से लेकर आधुनिक कथा-साहित्य तक भारतीय साहित्य ने विविध रूपों में अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया है। कविता, गद्य, नाटक, काव्यकथा, आख्यान और महाकाव्य के रूप में साहित्य ने समय-समय पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की। किंतु उपन्यास एक अपेक्षाकृत आधुनिक विधा है, जिसकी उत्पत्ति भारत में उन्नीसवीं शताब्दी में हुई। यह पश्चिम से आयातित विधा अवश्य है, किंतु भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक वास्तविकताओं ने इसे एक विशिष्ट स्वरूप प्रदान किया। भारतीय उपन्यास केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, सांस्कृतिक विमर्श ... Read more - [Current Affairs- August 2025](https://hindidepartment.com/current-affairs-august-2025/): 1➤ National Sports Governance Act, 2025 किस तारीख को लोकसभा में पारित हुआ? 11 अगस्त 2025 12 अगस्त 2025 13 अगस्त 2025 10 अगस्त 2025 ➤ 11 अगस्त 2025 👁 Show Answer 2➤ National Sports Governance Act का उद्देश्य क्या है? खेलों में भ्रष्टाचार बढ़ाना खेल उपयोगकर्ताओं से टैक्स लेना खेल संगठनों में पारदर्शिता, नैतिकता और क्रीड़ा वाद-विवाद समाधान सुनिश्चित करना केवल क्रिकेट को समर्थन देना ➤ खेल संगठनों में पारदर्शिता, नैतिकता और क्रीड़ा वाद-विवाद समाधान सुनिश्चित करना 👁 Show Answer 3➤ संविधान (130वीं संशोधन) विधेयक 2025 का उद्देश्य क्या है? चुनावी आयु बढ़ाना मन्त्री जो गिरफ्तारी में 30 दिनों ... Read more - [Current Affairs - July 2025](https://hindidepartment.com/current-affairs-july-2025/): 1➤ भारत का पहला ओवरपास वन्यजीव गलियारा किस एक्सप्रेसवे पर बनाया गया है ? युमुना एक्सप्रेसवे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे ➤ दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे 👁 Show Answer 2➤ राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (नेशनल डॉक्टरस डे) कब मनाया जाता है ? 1 जुलाई 2 जुलाई 3 जुलाई 4 जुलाई ➤ 1 जुलाई 👁 Show Answer 3➤ किस मंत्रालय ने ‘आदि कर्मयोगी’ पहल की शुरूआत की ? सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ग्रामीण विकास मंत्रालय जनजातीय कार्य मंत्रालय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ➤ जनजातीय कार्य मंत्रालय 👁 Show Answer 4➤ गोलस्टेटस मोबाइल एप्लिकेशन किसके द्वारा लॉन्च किया गया है ? ... Read more - [साधारणीकरण (भारतीय काव्यशास्त्र)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af/): प्रस्तावना भारतीय काव्यशास्त्र में साधारणीकरण (Universalization) एक अत्यंत महत्वपूर्ण तथा केंद्रीय सिद्धांत है, जो काव्य में रस की निष्पत्ति को समझने में सहायक होता है। यह सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि किसी विशिष्ट पात्र या परिस्थिति से उत्पन्न भावावस्था कैसे पाठक या श्रोता के हृदय में व्यापक, सार्वभौमिक और व्यक्तिगत अनुभूति का रूप ले लेती है। साधारणीकरण की प्रक्रिया में व्यक्ति अपने आत्मभाव को तद्रूप कर लेता है और इस प्रकार काव्य अनुभव उसके लिए निजी होते हुए भी व्यापक और सामान्यीकृत बन जाता है। साधारणीकरण की परिभाषा साधारणीकरण का शाब्दिक अर्थ है – सामान्य या सार्वभौमिक बना देना। ... Read more - [त्रासदी की अवधारणा | अरस्तु](https://hindidepartment.com/%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a3/): प्रस्तावना त्रासदी (Tragedy) मूल रूप से नाटकों की एक शैली है जिसमें हमें मानवीय दुःखों का वर्णन देखने को मिलता है। इस तरह के नाटकों का मुख्य उद्धेश्य दर्शकों के भावों को शुद्ध करना होता है। इसका गहन और वैज्ञानिक अध्ययन सर्वप्रथम यूनानी दार्शनिक अरस्तु (Aristotle) ने अपने ग्रंथ ‘Poetics’ में किया। अरस्तु का त्रासदी संबंधी विवेचन न केवल प्राचीन यूनानी नाट्य परंपरा की व्याख्या करता है, बल्कि यह विश्व साहित्य की त्रासदी संबंधी अवधारणाओं की आधारशिला भी बन गया है। उनका यह विवेचन आज भी नाटक और नाट्यशास्त्र के अध्ययन के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रासंगिक माना जाता है। इस ... Read more - [रस निष्पत्ति की अवधारणा](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%b8-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be/): प्रस्तावना भारतीय काव्यशास्त्र में “रस” का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। रस न केवल कविता या साहित्य का प्राण माना गया है, बल्कि यह एक दार्शनिक व कलात्मक अनुभूति का केंद्रबिंदु भी है। रस का मूल उद्देश्य है—साहित्यिक रचना के माध्यम से पाठक या श्रोता को भावानुभूति के चरम तक पहुँचाना। परंतु यह भावानुभूति कब, कैसे और किन तत्वों से उत्पन्न होती है—यही प्रश्न है “रस निष्पत्ति” (रस की उत्पत्ति) का। रस निष्पत्ति की समस्या पर अनेक आचार्यों ने अपने-अपने ढंग से विचार किया है और अलग-अलग सिद्धांत प्रस्तुत किए हैं। यह लेख रस निष्पत्ति की अवधारणा का आलोचनात्मक विश्लेषण करते ... Read more - [औचित्य संप्रदाय (भारतीय काव्यशास्त्र)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%94%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95/): प्रस्तावना भारतीय दर्शन की विविध धाराओं में औचित्य संप्रदाय (auchitya sampradaya) एक महत्वपूर्ण साहित्यिक और काव्य-मीमांसीय अवधारणा है, जिसे महाकवि क्षेमेन्द्र द्वारा व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया था। यह संप्रदाय काव्यशास्त्र की वह धारा है जो काव्य में औचित्य (उचितता) की प्रमुखता पर बल देती है। क्षेमेन्द्र की प्रसिद्ध कृति औचित्य विचार चर्चा इस संप्रदाय का मूल ग्रंथ है, जिसमें उन्होंने बताया है कि किसी काव्य रचना में भाव, शब्द, पात्र, देश, काल और प्रसंग—इन सभी के संदर्भ में उपयुक्तता अत्यंत आवश्यक है। इस लेख में हम औचित्य संप्रदाय की उत्पत्ति, मूल तत्व, साहित्यिक महत्त्व, इसकी आधुनिक प्रासंगिकता और ... Read more - [नई समीक्षा](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%88-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be/): प्रस्तावना हिंदी साहित्य की आलोचना परंपरा में समय-समय पर अनेक दृष्टिकोण और प्रवृत्तियाँ उभरी हैं। बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जिस आलोचना पद्धति ने गंभीर ध्यान आकर्षित किया, वह है नई समीक्षा (New Criticism)। इसका उद्भव मुख्यतः अंग्रेजी साहित्य के क्षेत्र में हुआ, परंतु इसके प्रभाव से हिंदी साहित्यिक विमर्श भी अछूता नहीं रहा। नई समीक्षा का मूल उद्देश्य साहित्यिक कृति को आत्मनिर्भर इकाई के रूप में देखना और उसमें निहित अंतर्वस्तु, संरचना, प्रतीक योजना, भाषा प्रयोग तथा अर्थ के स्तरों की वस्तुनिष्ठ विवेचना करना रहा है। यह आलोचना पद्धति पाठ-केंद्रित (Text-Centered) विश्लेषण की पक्षधर है और लेखक की जीवनी, ... Read more - [रूसी रूपवाद](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6/): प्रस्तावना बीसवीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में साहित्यिक आलोचना और भाषा विज्ञान के क्षेत्र में अनेक नवीन प्रवृत्तियाँ सामने आईं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली प्रवृत्ति है रूसी रूपवाद (Russian Formalism)। यह आंदोलन रूस में 1910 के दशक में प्रारंभ हुआ और इसमें साहित्यिक रचनाओं के अध्ययन के लिए एक वैज्ञानिक और वस्तुनिष्ठ पद्धति प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। रूसी रूपवादियों ने साहित्य को उसकी रूपात्मक संरचना और भाषिक विशिष्टता के आधार पर समझने का आग्रह किया, न कि लेखक के जीवन, समाज या मनोविज्ञान के माध्यम से। यह लेख रूसी रूपवाद की उत्पत्ति, सिद्धांत, प्रमुख विचारकों, ... Read more - [आई.ए. रिचर्डस का काव्यभाषा सिद्धान्त](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be/): प्रस्तावना काव्यभाषा (Poetic Language) का प्रश्न साहित्यिक विमर्श में सदैव केंद्रीय रहा है। बीसवीं शताब्दी के आधुनिक आलोचक आई. ए. रिचर्ड्स (I. A. Richards) ने काव्य की भाषा, अर्थ और संप्रेषण के संबंध में जो अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं, वे आधुनिक काव्यशास्त्र की नींव मानी जाती हैं। रिचर्ड्स की आलोचना पद्धति में मनोविज्ञान, भाषा विज्ञान और संप्रेषणशास्त्र का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनके काव्यभाषा संबंधी सिद्धांत ने न केवल अंग्रेजी साहित्य को, बल्कि संपूर्ण साहित्यिक आलोचना को एक नई दिशा प्रदान की। आई. ए. रिचर्ड्स का संक्षिप्त परिचय आई. ए. रिचर्ड्स (Ivor Armstrong Richards) का जन्म 1893 में इंग्लैंड में ... Read more - [उत्तर आधुनिकतावाद](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6/): प्रस्तावना उत्तर आधुनिकतावाद (Postmodernism) 20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में उभरा एक सैद्धांतिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक आंदोलन है, जिसने आधुनिकता (Modernism) की स्थिरताओं, सार्वभौमिकताओं और प्रगति की अवधारणाओं को चुनौती दी। यह विचारधारा किसी एक निश्चित सिद्धांत या मत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक दृष्टिकोण, एक संवेदनशीलता और एक पद्धति है, जो बहुलता, विखंडन, विडंबना, पाठ की अस्थिरता और पहचान की जटिलताओं को महत्व देती है। उत्तर आधुनिकतावाद ने साहित्य, कला, दार्शनिक चिन्तन, समाजशास्त्र, संचार, लिंग-अध्ययन और सांस्कृतिक अध्ययन जैसे क्षेत्रों में गहरा प्रभाव डाला। इस लेख में हम उत्तर आधुनिकतावाद के उद्भव, विशेषताएं, प्रमुख विचारक, आलोचना, तथा साहित्यिक ... Read more - [मनोविश्लेषणवाद](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a4%a3%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6/): परिचय मनोविश्लेषणवाद (Psychoanalysis) 20वीं शताब्दी का एक प्रमुख मनोवैज्ञानिक सिद्धांत है, जिसकी स्थापना ऑस्ट्रिया के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक सिग्मंड फ्रायड (Sigmund Freud) ने की थी। यह सिद्धांत व्यक्ति के अवचेतन मन, स्वप्न, यौन प्रवृत्तियों, अनुभवों और दमित इच्छाओं के विश्लेषण पर आधारित है। साहित्य में मनोविश्लेषणवादी दृष्टिकोण पाठ्य-चरित्रों, घटनाओं और रचनाकार की मनोवैज्ञानिक जटिलताओं की गहरी पड़ताल करता है। यह साहित्यिक रचना को मानव मन के दर्पण के रूप में देखता है। मनोविश्लेषणवाद का उद्भव और विकास 1. सिग्मंड फ्रायड का योगदान फ्रायड (1856–1939) ने सबसे पहले यह बताया कि मनुष्य का व्यवहार केवल चेतन मन (Conscious mind) से संचालित नहीं ... Read more - [चंद्रगुप्त। नाटक। नोट्स](https://hindidepartment.com/%e0%a4%9a%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a4%95%e0%a5%a4-%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b8/): जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘चंद्रगुप्त‘ हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक नाटक है, जिसका प्रकाशन 1931 ई. में हुआ था। यह नाटक मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के जीवन, उनके उत्थान और भारत में विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध संघर्ष की कथा को प्रस्तुत करता है।  नाटक का परिचय रचनाकार: जयशंकर प्रसाद प्रकाशन वर्ष: 1931 ई. अंक: 4 दृश्य: 44 गीतों की संख्या: 13 पात्रों की संख्या: 35 (24 पुरुष, 11 स्त्री) मुख्य विषय: मौर्य साम्राज्य की स्थापना, विदेशी आक्रमणों का प्रतिकार, राष्ट्रवाद, कूटनीति, प्रेम और बलिदान। लेखक का परिचय जयशंकर प्रसाद (1889–1937) हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि, नाटककार, और कथाकार थे। ... Read more - [महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%94/): प्रस्तावना हिंदी साहित्य के इतिहास में महावीर प्रसाद द्विवेदी (1864–1938) का स्थान अत्यंत विशिष्ट और प्रभावशाली है। वे केवल एक साहित्यकार नहीं थे, बल्कि एक युग निर्माता, भाषा-संशोधक, आलोचक, संपादक और नवजागरण के अग्रदूत भी थे। हिंदी के गद्य साहित्य के विकास में उनका योगदान इतना व्यापक और गहरा है कि उनकी तुलना भारत के नवजागरण काल के राजा राममोहन राय और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय से की जा सकती है। इस लेख में हम महावीर प्रसाद द्विवेदी के जीवन, कृतित्व, भाषा और शैली, नवजागरण में उनकी भूमिका, तथा उनके सम्पादकीय युग के महत्त्व को समग्रता में प्रस्तुत करेंगे। 1. हिंदी नवजागरण: ... Read more - [Current Affairs - June 2025](https://hindidepartment.com/current-affairs-june-2025/): 1➤ अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस किस दिन मनाया जाता है? 27 जून 28 जून 29 जून 30 जून ➤ 30 जून 👁 Show Answer 2➤ वर्ष 2025 का गोडेल पुरस्कार किसे प्रदान किया गया है? ईशान चट्टोपाध्याय और डेविड जुकरमैन पराग जैन और डीएस वीरैया आर. प्रग्गनानंद और अलीयावती लोंगकुमेर डीएस वीरैया और पराग जैन ➤ ईशान चट्टोपाध्याय और डेविड जुकरमैन 👉वर्ष 2025 का गोडेल पुरस्कार भारतीय मूल के प्रोफेसर ईशान चट्टोपाध्याय को प्रदान किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार सैद्धांतिक कंप्यूटर विज्ञान में उनके उत्कृष्ट योगदान, विशेष रूप से यादृच्छिकता निष्कर्षण (randomness extraction) के लिए दिया गया है। उन्होंने यह ... Read more - [वक्रोक्ति संप्रदाय (भारतीय काव्यशास्त्र)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4/): प्रस्तावना भारतीय काव्यशास्त्र में वक्रोक्ति संप्रदाय एक महत्वपूर्ण अलंकारिक सिद्धांत है, जिसे काव्य की सौंदर्यात्मकता और प्रभावशीलता के मूल्यांकन में केंद्रीय स्थान प्राप्त है। यह संप्रदाय कवि के वाक्-कौशल, कल्पनाशीलता और भाषा के प्रयोग में नवीनता को महत्व देता है। इस लेख में वक्रोक्ति संप्रदाय पर विभिन्न आचार्यों के विचार, इस संप्रदाय की आलोचना, इसकी विशेषताएं तथा आधुनिक साहित्य में इसकी प्रासंगिकता का विश्लेषण किया गया है। विभिन्न आचार्यों के विचार 1. भामह (7वीं शताब्दी) भामह ने ‘काव्यालंकार’ में वक्रोक्ति को काव्य की आत्मा माना और इसे सभी अलंकारों का मूल तत्व बताया है। उन्होंने वक्रोक्ति को ‘लोकातिक्रांतगोचर’ (सामान्य से परे) ... Read more - [हिंदी की संवैधानिक स्थिति](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%a4/): प्रस्तावना भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है, जहाँ विभिन्न भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात्, एक ऐसी भाषा की आवश्यकता महसूस की गई जो पूरे देश में संपर्क भाषा के रूप में कार्य कर सके। इस संदर्भ में, हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया। संविधान में हिंदी की स्थिति को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जो न केवल प्रशासनिक कार्यों में बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संविधान में हिंदी की स्थिति भारतीय संविधान के भाग XVII (अनुच्छेद 343 से 351) में राजभाषा संबंधी ... Read more - [लोंजाइनस : काव्य में उदात्त तत्व](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d/): भूमिका पाश्चात्य काव्यशास्त्र के इतिहास में ‘लोंजाइनस’ (Longinus) एक महत्वपूर्ण नाम है, जिन्होंने काव्य के मूल्यांकन में ‘उदात्तता’ (Sublimity) को केंद्र में रखकर एक विशिष्ट सौंदर्यशास्त्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनका ग्रंथ “On the Sublime”  न केवल काव्यालंकारशास्त्र में महत्वपूर्ण है, बल्कि विश्व साहित्य में सौंदर्य, प्रभाव और रचनात्मकता की मीमांसा के लिए भी आधार-स्तंभ बन चुका है। लोंजाइनस का यह सिद्धांत “उदात्त तत्व” पर आधारित है — ऐसा तत्व जो पाठक या श्रोता के मन में विस्मय, श्रद्धा, और आत्मविस्मृति उत्पन्न करता है। यह तत्व काव्य, वाणी, या अन्य कलाओं के माध्यम से उत्पन्न हो सकता है। यह लेख लोंजाइनस ... Read more - [स्त्री विमर्श की अवधारणा](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6/): प्रस्तावना स्त्री विमर्श आधुनिक आलोचना और सामाजिक चिंतन का एक महत्वपूर्ण आयाम है, जो स्त्रियों के सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और साहित्यिक अनुभवों की विश्लेषणात्मक व्याख्या करता है। यह विमर्श पितृसत्तात्मक संरचनाओं और उनके द्वारा बनाए गए स्त्री के अधीनस्थ स्थान को चुनौती देता है और समानता, स्वतंत्रता तथा आत्मनिर्भरता की मांग करता है। स्त्री विमर्श केवल लैंगिक असमानता को उजागर नहीं करता, बल्कि स्त्रियों की चेतना, संघर्ष, अधिकार और पहचान के प्रश्नों को भी सामने लाता है। साहित्य, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, इतिहास और राजनीति जैसे विविध क्षेत्रों में स्त्री विमर्श ने नई दृष्टियों को जन्म दिया है। स्त्री विमर्श की अवधारणा ... Read more - [ध्वनि संप्रदाय (भारतीय काव्यशास्त्र)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a8%e0%a4%bf-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be/): प्रस्तावना भारतीय काव्यशास्त्र की समृद्ध परंपरा में विभिन्न संप्रदायों ने साहित्यिक रस, अलंकार और अर्थ की व्याख्या अपने-अपने दृष्टिकोण से की है। इन्हीं में से एक महत्त्वपूर्ण और प्रभावशाली संप्रदाय है—ध्वनि संप्रदाय, जिसे आनंदवर्धन ने प्रतिपादित किया और अभिनवगुप्त ने पुष्ट किया। यह संप्रदाय काव्य की आत्मा ‘ध्वनि’ को मानता है और इसे साहित्यिक अभिव्यक्ति का सर्वोच्च रूप घोषित करता है। ध्वनि संप्रदाय के अनुसार, कविता का सौंदर्य न तो केवल शब्द में निहित होता है और न ही केवल उसके शाब्दिक अर्थ में, बल्कि उस अर्थ के परे जो भाव प्रकट होते हैं, वे ही काव्य की आत्मा होते ... Read more - [टी. एस. एलियट : परंपरा की अवधारणा](https://hindidepartment.com/%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%b8-%e0%a4%8f%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be/): प्रस्तावना बीसवीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में अंग्रेज़ी साहित्य के क्षेत्र में अनेक नवोन्मेषी विचारकों और कवियों का प्रादुर्भाव हुआ, जिन्होंने साहित्यिक आलोचना की रूढ़ धारणाओं को चुनौती दी। इन विद्वानों में थॉमस स्टर्न्स एलियट (T.S. Eliot) का नाम विशेष उल्लेखनीय है। एलियट केवल एक महान कवि ही नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली निबंधकार और आलोचक भी थे। उनकी काव्यकृतियों के समान ही उनके निबंधों का भी साहित्य और साहित्य-चिंतन पर गहरा प्रभाव पड़ा। विशेष रूप से उनका निबंध “Tradition and the Individual Talent” (1919), परंपरा और व्यक्तिगत प्रतिभा के द्वंद्व को लेकर साहित्यिक जगत में चर्चित रहा है। एलियट ने ... Read more - [Uttar Pradesh Current Affairs 2025 (Part-1)](https://hindidepartment.com/uttar-pradesh-current-affairs-2025-part-1/): 1➤ हाल ही में उत्तर प्रदेश की किस नदी में ‘लाल मुकुट वाले छतकुला कछुओं’ को फिर से स्थापित किया गया है ? यमुना नदी गंगा नदी गोमती नदी घाघरा नदी ➤ गंगा नदी 👁 Show Answer 2➤ उत्तर प्रदेश के किस शहर में राज्य का पहला ‘वेस्ट-टू-सीएनजी’ संयंत्र स्थापित किया जाएगा? कानपुर प्रयागराज आगरा मेरठ ➤ प्रयागराज 👁 Show Answer 3➤ हाल ही में उत्तर प्रदेश के किस शहर में अंतर्राष्ट्रीय पक्षी महोत्सव का आयोजन किया गया ? प्रयागराज लखनऊ कानपुर वाराणसी ➤ प्रयागराज 👁 Show Answer 4➤ हाल ही में बनारस लिस्ट फेस्ट में किस उपन्यासकार को उसके ... Read more - [आई.ए. रिचर्ड्स : मूल्य सिद्धांत](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): प्रस्तावना आधुनिक साहित्यिक आलोचना के क्षेत्र में आई. ए. रिचर्ड्स (I. A. Richards) का नाम एक अत्यंत प्रभावशाली विचारक और समीक्षक के रूप में लिया जाता है। 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में जब साहित्यिक मूल्यांकन की परंपरागत मान्यताओं को चुनौती दी जा रही थी, उस समय रिचर्ड्स ने अपने मौलिक सिद्धांतों के माध्यम से साहित्य के अध्ययन और मूल्यांकन को एक नई दिशा दी। उनका ‘मूल्य सिद्धांत’ न केवल साहित्यिक मूल्य की अवधारणा को पुनर्परिभाषित करता है, बल्कि काव्य की संरचना, भाषा और पाठकीय प्रतिक्रिया के बीच जटिल संबंधों को भी उजागर करता है। यह लेख रिचर्ड्स के मूल्य ... Read more - [हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की पद्धतियां](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%b2/): प्रस्तावना हिंदी साहित्य का इतिहास लेखन एक जटिल और बहुआयामी प्रक्रिया है, जो न केवल साहित्यिक कृतियों के कालानुक्रमिक विकास को दर्शाता है, बल्कि समाज, संस्कृति, राजनीति और दर्शन के विविध पहलुओं को भी समाहित करता है। इस लेख में हम हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की प्रमुख पद्धतियों का विश्लेषण करेंगे, जो इस क्षेत्र में अनुसंधान और अध्ययन के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हुई हैं। 1. वर्णानुक्रम पद्धति वर्णानुक्रम पद्धति हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की प्रारंभिक पद्धति है, जिसमें रचनाकारों का विवरण उनके नाम के प्रथम अक्षर के अनुसार क्रमबद्ध किया जाता है। इस पद्धति में साहित्यिक कृतियों की ... Read more - [अस्तित्ववाद](https://hindidepartment.com/%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6/): भूमिका 20वीं शताब्दी का दर्शन यदि किसी विचारधारा से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, तो वह है ‘अस्तित्ववाद’ (Existentialism)। यह दर्शन न केवल एक दार्शनिक आंदोलन है, बल्कि यह साहित्य, धर्म, मनोविज्ञान और कला तक को प्रभावित करने वाला एक व्यापक वैचारिक दृष्टिकोण भी है। अस्तित्ववाद मानव अस्तित्व, स्वतंत्रता, व्यक्तिगत चुनाव, असंगति, निरर्थकता और आत्म-साक्षात्कार जैसे विषयों पर केंद्रित है। यह दर्शन व्यक्ति को उसकी स्वयं की पहचान, स्वतंत्र निर्णय और उसके जीवन की जिम्मेदारी को समझने के लिए प्रेरित करता है। अस्तित्ववाद की परिभाषा और मूल स्वरूप अस्तित्ववाद एक दर्शन है जो मानता है कि मानव अस्तित्व (existence) का ... Read more - [कॉलरिज का कल्पना और फैंटेसी का सिद्धांत](https://hindidepartment.com/%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a5%87/): भूमिका 19वीं शताब्दी की प्रारंभिक अवधि में अंग्रेज़ी साहित्य में एक प्रमुख नाम थे सैमुअल टेलर कॉलरिज (Samuel Taylor Coleridge)। वे अंग्रेज़ी रोमांटिक आंदोलन के प्रमुख कवियों और चिंतकों में से एक थे। उन्होंने न केवल काव्य-रचना की, बल्कि साहित्यिक सिद्धांतों और आलोचना में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी सबसे महत्वपूर्ण आलोचनात्मक रचनाओं में Biographia Literaria है, जिसमें उन्होंने कल्पना (Imagination) और फैंटेसी (Fancy) के सिद्धांत को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया है। यह सिद्धांत आधुनिक साहित्यिक चिंतन की नींव बन चुका है और साहित्य में रचनात्मकता, कला और सौंदर्य की समझ को गहराई प्रदान करता है। कॉलरिज का परिचय सैमुअल टेलर ... Read more - [रस संप्रदाय](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af/): प्रस्तावना भारतीय काव्यशास्त्र में ‘रस’ की अवधारणा अत्यंत प्राचीन एवं मूलभूत मानी जाती है। ‘रस संप्रदाय’ एक ऐसा काव्यशास्त्रीय दृष्टिकोण है जिसने साहित्य के मूल्यांकन में ‘रस’ को सर्वोपरि स्थान दिया। यह संप्रदाय मानता है कि काव्य का प्रधान उद्देश्य रस का संचार है और कवि की सफलता इसी बात में है कि वह पाठक या श्रोता में रस की अनुभूति करा सके। भरतमुनि से लेकर आचार्य मम्मट,  विश्वनाथ और पंडित जगन्नाथ तक रस संप्रदाय की परंपरा निरंतर विकसित हुई है। यह लेख रस संप्रदाय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, प्रमुख आचार्यों, सिद्धांतों तथा इसकी विशेषताओं व आलोचनाओं का समग्र अध्ययन प्रस्तुत ... Read more - [हिन्दी आलोचना का उद्भव और विकास](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%94/): प्रस्तावना हिंदी साहित्य में आलोचना का विकास एक दीर्घकालिक प्रक्रिया रही है, जो विभिन्न युगों, विचारधाराओं और सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तनों के प्रभाव में निरंतर विकसित होती रही है। आलोचना न केवल साहित्यिक कृतियों का मूल्यांकन करती है, बल्कि वह साहित्य और समाज के बीच सेतु का कार्य भी करती है। इस लेख में हिंदी आलोचना के उद्भव और विकास की यात्रा का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। 1. प्रारंभिक आलोचना: संस्कृत काव्यशास्त्र की छाया हिंदी आलोचना की जड़ें संस्कृत के काव्यशास्त्र में निहित हैं। भरतमुनि का ‘नाट्यशास्त्र’, आनंदवर्धन का ‘ध्वन्यालोक’, भामह, दंडी, वामन, और मम्मट जैसे आचार्यों के ग्रंथों ने काव्य ... Read more - [‘एक टोकरी भर मिट्टी’ का समीक्षात्मक अध्ययन](https://hindidepartment.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%9f%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8/): भूमिका “एक टोकरी भर मिट्टी” हिंदी साहित्य की एक कालजयी कहानी है, जिसे माधवराव सप्रे ने 1901 में लिखा था। यह कहानी छत्तीसगढ़ मित्र पत्रिका में प्रकाशित हुई थी और भारतीय समाज में व्याप्त सामाजिक अन्याय, मानवीय संवेदना और आत्मसम्मान जैसे विषयों को उजागर करती है। कहानी में एक गरीब विधवा और एक घमंडी जमींदार के बीच का संघर्ष चित्रित किया गया है, जो अंततः मानवीय करुणा और आत्मबोध की विजय के साथ समाप्त होता है। लेखक का परिचय प्रारंभिक जीवन और शिक्षा माधवराव सप्रे का जन्म 19 जून 1871 को मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पथरिया गांव में ... Read more - [वर्ड्सवर्थ का काव्यभाषा सिद्धांत](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be/): भूमिका 18वीं सदी के उत्तरार्ध और 19वीं सदी की शुरुआत में यूरोपीय साहित्य, विशेषतः अंग्रेजी साहित्य, एक अत्यंत महत्वपूर्ण संक्रमण काल से गुजर रहा था। यह वह समय था जब रूढ़िवादी नियो-क्लासिकल परंपराएं, जिनमें नियम, अनुकरण और कृत्रिमता का बोलबाला था, टूट रही थीं और भावनात्मक स्वाभाविकता की नई लहर उठ रही थी। इसी नवोन्मेष की लहर को रोमांटिक आंदोलन कहा गया और इस आंदोलन के अगुआ कवियों में विलियम वर्ड्सवर्थ (William Wordsworth) का नाम प्रमुख है। वर्ड्सवर्थ ने न केवल अंग्रेजी काव्य को नई दिशा दी, बल्कि उसकी भाषा, विषयवस्तु और उद्देश्य को भी पूरी तरह पुनर्परिभाषित किया। उनके ... Read more - [‘अंजो दीदी’ (नाटक) का समीक्षात्मक अध्ययन](https://hindidepartment.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d/): प्रस्तावना अंजो दीदी उपेन्द्रनाथ अश्क का एक मनोवैज्ञानिक और सामाजिक नाटक है, जो अनुशासन, अहंकार और यांत्रिक जीवन की अमानवीयता का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत करता है। इस नाटक की गहराई और पात्रों की जीवंतता इसे हिंदी रंगमंच की विशिष्ट कृति बनाते हैं। । यह नाटक अभिजात्य वर्ग के परिवार में कठोर अनुशासन, अहंकार और मानवीय धाराओं के यंत्रीकरण की त्रासदी को दर्शाता है। नाटक का मूल तथ्य और आधारभूमि रचयिता: उपेन्द्रनाथ अश्क  प्रकाशन:  नाटक का प्रकाशन 1955 में और  मंचन 30 जनवरी 1954 को मुंबई स्थित सेंट जेवियर कॉलेज में किया गया । रूपरेखा: दो अंक — प्रथम अंक में ... Read more - [निर्वैयक्तिकता का सिद्धांत](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be/): प्रस्तावना 20वीं शताब्दी की अंग्रेजी साहित्यिक आलोचना में टी.एस. इलिएट (T.S. Eliot) का महत्वपूर्ण स्थान है। वे न केवल एक प्रख्यात कवि, नाटककार और समीक्षक थे, बल्कि उन्होंने साहित्यिक आलोचना की दिशा और दृष्टिकोण को भी एक नया मोड़ दिया। उनकी रचनाओं में आधुनिकतावाद (Modernism) की स्पष्ट छाप मिलती है, जिसमें पारंपरिक साहित्यिक दृष्टियों को चुनौती दी गई। इलिएट का ‘निर्वैयक्तिकता का सिद्धांत’ (Impersonality Theory) कविता की आलोचना और रचना में एक क्रांतिकारी विचार के रूप में उभरा। यह सिद्धांत उन्होंने विशेष रूप से अपने प्रसिद्ध निबंध “Tradition and the Individual Talent” (1919) में प्रस्तुत किया। टी.एस. इलिएट का परिचय ... Read more - [अरस्तु का विरेचन सिद्धांत](https://hindidepartment.com/%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%9a%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%82/): प्रस्तावना पाश्चात्य काव्यशास्त्र में अरस्तु का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली रहा है। उनकी प्रसिद्ध कृति ‘Poetics’ (काव्यशास्त्र) में उन्होंने त्रासदी (Tragedy) की विशिष्टताओं का वर्णन करते हुए जो भावनात्मक प्रक्रिया बताई है, उसे ‘विरेचन सिद्धांत’ (Catharsis Theory) कहा जाता है। यह सिद्धांत आज भी साहित्यिक आलोचना में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। विरेचन का अर्थ है—‘शुद्धिकरण’ या ‘शुद्धि’। अरस्तु के अनुसार, त्रासदी का उद्देश्य दर्शकों के हृदय में करुणा (pity) और भय (fear) जैसे भाव उत्पन्न कर उन्हें शुद्ध करना होता है। यह लेख अरस्तु के विरेचन सिद्धांत की विस्तारपूर्वक विवेचना करेगा। 1. अरस्तु का संक्षिप्त परिचय अरस्तु (384–322 ई. ... Read more - [गोदान का समीक्षात्मक अध्ययन](https://hindidepartment.com/5501-2/): प्रस्तावना मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास “गोदान” हिंदी साहित्य की एक कालजयी कृति है, जो भारतीय ग्रामीण जीवन, विशेषकर किसानों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थितियों का यथार्थवादी चित्रण प्रस्तुत करता है। यह उपन्यास न केवल एक किसान की व्यक्तिगत त्रासदी को दर्शाता है, बल्कि उस समय के भारतीय समाज की गहरी समस्याओं को भी उजागर करता है। यह उपन्यास 1936 में प्रकाशित हुआ था और इसे प्रेमचंद की अंतिम तथा सर्वश्रेष्ठ कृति माना जाता है। कथानक का सारांश गोदान की कहानी होरी महतो नामक एक गरीब किसान के संघर्षों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक गाय खरीदने की इच्छा रखता ... Read more - [दुलाईवाली कहानी का समीक्षात्मक अध्ययन](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d/): ✨प्रस्तावना राजेन्द्रबाला घोष, जिन्हें ‘बंगमहिला’ के नाम से जाना जाता है, की कहानी ‘दुलाईवाली’ हिंदी साहित्य की पहली आधुनिक और मौलिक कहानियों में से एक मानी जाती है। यह कहानी 1907 में ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी और इसे हिंदी कहानी के विकास में एक मील का पत्थर माना जाता है। यहां इस कहानी के सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को प्रकाशित कर एक समीक्षात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।  📙कहानी का परिचय : कहानी का नाम: दुलाईवाली लेखिका: बंग महिला (राजेन्द्र बाला घोष) प्रकाशन वर्ष: 1907 ई. प्रकाशन स्थल: सरस्वती पत्रिका महत्व: यह हिंदी की प्रथम मौलिक कहानी मानी जाती ... Read more - [Current Affairs- May 2025](https://hindidepartment.com/current-affairs-may-2025/): 1➤ देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती पर किस राज्य में ‘देवी अहिल्याबाई नारी सशक्तिकरण मिशन’ की शुरुआत हुई? महाराष्ट्र मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश गुजरात ➤ मध्यप्रदेश 👁 Show Answer 2➤ ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल का नाम किन दो नदियों के नामों को मिलाकर रखा गया है? ब्रह्मपुत्र और मोस्कवा गंगा और वोल्गा यमुना और नीवा सिंधु और डॉन ➤ ब्रह्मपुत्र और मोस्कवा 👉 ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोस्कवा नदी के नामों को मिलाकर रखा गया है। 👁 Show Answer 3➤ छत्तीसगढ़ में विकसित ‘कृषि संकल्प अभियान’ कब शुरू किया गया? 1 मई 2025 15 मई ... Read more - [फोर्ट विलियम कॉलेज](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ab%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%9c/): प्रस्तावना भारतीय नवजागरण के इतिहास में फोर्ट विलियम कॉलेज (Fort William College) का विशेष स्थान है। इसकी स्थापना अंग्रेजों द्वारा प्रशासनिक उद्देश्यों हेतु की गई थी, किंतु इसका गहरा प्रभाव भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी और उर्दू साहित्य के विकास पर देखने को मिलता है। यह संस्था भारत में आधुनिक शिक्षा, अनुवाद कार्य, व्याकरण लेखन और शब्दकोश निर्माण जैसे क्षेत्रों में अग्रणी रही। फोर्ट विलियम कॉलेज को हिंदी साहित्य के आदिकालीन गद्य के विकास की दृष्टि से भी मील का पत्थर माना जाता है। फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना 10 जुलाई 1800 ई॰ को लॉर्ड वेलेजली ... Read more - [देवनागरी लिपि : विशेषताएं और मानकीकरण](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a4%bf-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82/): प्रस्तावना भारत विविध भाषाओं और लिपियों का देश है। इन लिपियों में देवनागरी लिपि का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। संस्कृत, हिंदी, मराठी, कोंकणी, नेपाली, भोजपुरी, मैथिली, गढ़वाली आदि भाषाओं की लेखन प्रणाली के रूप में प्रयुक्त होने वाली देवनागरी लिपि भारतीय सांस्कृतिक और भाषिक परंपरा की एक सशक्त पहचान है। यह न केवल भाषाओं को लिपिबद्ध करने का माध्यम है, बल्कि भारतीय सभ्यता के ग्रंथों और दर्शन का संवाहक भी है। इस लेख में हम देवनागरी लिपि की विशेषताओं, ऐतिहासिक विकास, संरचना तथा उसके मानकीकरण के प्रयासों का समीक्षात्मक अध्ययन करेंगे। देवनागरी लिपि का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य देवनागरी लिपि का विकास ... Read more - [क्रोचे का अभिव्यंजनावाद](https://hindidepartment.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9a%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6/): प्रस्तावना कला, विशेषकर साहित्य की व्याख्या में सौंदर्यशास्त्र की प्रमुख भूमिका रही है। साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, इसमें मानवीय संवेदना, अनुभूति और विचारों को कलात्मक रूप में प्रकट किया जाता है। साहित्य की इसी प्रकृति को समझने हेतु अनेक विचारकों ने विभिन्न सिद्धांत प्रस्तुत किए। इन सिद्धांतों में से एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है “अभिव्यंजनावाद” (Expressionism), जिसके प्रमुख प्रवक्ता इटली के आधुनिक विचारक बेनेदेत्तो क्रोचे (Benedetto Croce) हैं। क्रोचे का यह सिद्धांत साहित्य के सौंदर्यात्मक विश्लेषण में अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हुआ। उन्होंने साहित्य को ‘आंतरिक अभिव्यक्ति’ (Inner Expression) के रूप में देखा और रचनाकार की अनुभूति को साहित्य का ... Read more - [प्लेटो के काव्य सिद्धांत](https://hindidepartment.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4/): भूमिका पश्चिमी काव्यशास्त्र के इतिहास में प्लेटो (Plato) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विवादास्पद दार्शनिक रहे हैं। उन्होंने न केवल साहित्य और काव्य की प्रकृति पर विचार किया, बल्कि उनके विचारों ने दर्शन, राजनीति और नैतिकता के क्षेत्रों में भी गहरा प्रभाव डाला। प्लेटो का काव्य-सिद्धांत उनके दर्शन से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। उनके विचारों में काव्य का मूल्यांकन केवल सौंदर्यबोध के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक, नैतिक और दार्शनिक दृष्टिकोण से भी किया गया है। प्रस्तुत लेख में प्लेटो के काव्य सिद्धांत का समीक्षात्मक अध्ययन किया गया है। प्लेटो का जीवन और दर्शन: पृष्ठभूमि प्लेटो (ईसा पूर्व 427–347) ... Read more - [आई. ए. रिचर्ड्स : संप्रेषण सिद्धांत](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a4%a3/): भूमिका बीसवीं सदी के आरंभिक वर्षों में साहित्यिक आलोचना की दिशा में कई मौलिक और क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। इस युग में पारंपरिक सौंदर्यशास्त्र की सीमाओं से बाहर निकलकर भाषा, संप्रेषण, पाठक और लेखक के संबंधों की वैज्ञानिक व्याख्या की जाने लगी। इस परिवर्तनकारी दौर में जिन विद्वानों का नाम अग्रणी रूप से लिया जाता है, उनमें इंग्लैंड के प्रख्यात समीक्षक, सौंदर्यशास्त्री और भाषाविद् आई. ए. रिचर्ड्स (I. A. Richards) का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। रिचर्ड्स का “संप्रेषण सिद्धांत” (Theory of Communication) आधुनिक आलोचना और भाषिक विश्लेषण के क्षेत्र में एक मौलिक चिंतन प्रस्तुत करता है। इस सिद्धांत के माध्यम से ... Read more - [अरस्तु का अनुकरण सिद्धांत](https://hindidepartment.com/%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%82/): प्रस्तावना साहित्य का मूल्यांकन और विश्लेषण करने के लिए विभिन्न सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं। इन सिद्धांतों में सबसे प्राचीन और प्रभावशाली सिद्धांतों में से एक है “अनुकरण सिद्धांत” (Mimesis Theory), जिसे यूनानी दार्शनिक अरस्तु (Aristotle) ने प्रतिपादित किया था। यह सिद्धांत केवल साहित्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कला, नाटक, काव्य, दर्शन और सौंदर्यशास्त्र के विभिन्न पक्षों को भी प्रभावित करता है। अरस्तु का अनुकरण सिद्धांत पश्चिमी साहित्य-चिंतन की नींव बन गया, और उसकी “Poetics” (काव्यशास्त्र) पुस्तक इस सिद्धांत का मूल ग्रंथ मानी जाती है। इस लेख में हम अरस्तु के अनुकरण सिद्धांत का विस्तृत विश्लेषण करेंगे, उसके ... Read more - [हिंदी की स्वनिम व्यवस्था](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be/): प्रस्तावना भाषा ध्वनियों की एक सुसंगठित प्रणाली है, जो स्वनिमों (Phonemes) के आधार पर बनती है। प्रत्येक भाषा की अपनी एक स्वनिम व्यवस्था होती है, जो उस भाषा की ध्वन्यात्मक विशेषताओं को परिभाषित करती है। हिंदी भाषा की स्वनिम व्यवस्था भी एक सुव्यवस्थित और समृद्ध प्रणाली है, जिसमें खंड्य (Segmental) और खंड्येतर (Suprasegmental) दोनों प्रकार के स्वनिम सम्मिलित होते हैं। यहां हम हिंदी भाषा की स्वनिम व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन करेंगे, विशेषतः खंड्य और खंड्येतर स्वनिमों की परिभाषा, प्रकार, उदाहरण और उनका भाषिक महत्व। 1. स्वनिम (Phoneme) की संकल्पना स्वनिम भाषा की वह लघुतम ध्वनि इकाई है जो अर्थभेद करने ... Read more - [हिंदी की उपभाषाएं](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82/): प्रस्तावना हिंदी एक विशाल भाषिक समुदाय की भाषा है, जिसका उपयोग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी होता है। यह भाषा अपनी विविधताओं के लिए प्रसिद्ध है। मानक हिंदी के अंतर्गत अनेक उपभाषाएं आती हैं, जिनकी अपनी स्वतंत्र पहचान, ध्वनि-व्यवस्था, व्याकरण और साहित्यिक परंपराएं हैं। हिंदी की ये उपभाषाएं विविध क्षेत्रों में बोली जाती हैं और सांस्कृतिक विविधता को प्रतिबिंबित करती हैं। इस लेख में हम हिंदी की पाँच प्रमुख उपभाषा-शाखाओं – पूर्वी हिंदी, पश्चिमी हिंदी, बिहारी, राजस्थानी, और पहाड़ी – का भाषिक, साहित्यिक और सामाजिक विश्लेषण करेंगे।   1. पूर्वी हिंदी भौगोलिक विस्तार पूर्वी हिंदी उपभाषाएँ उत्तर ... Read more - [साहित्यिक हिंदी के रूप में खड़ी बोली का उदय और विकास](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%aa-%e0%a4%ae%e0%a5%87/): प्रस्तावना भारतवर्ष की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विशेषता यह है कि यहां की भाषाओं में विविधता और समृद्धि देखने को मिलती है। भारतीय आर्यभाषाओं के विकासक्रम में खड़ी बोली का एक विशेष स्थान है, जो आज की मानक हिंदी और सरकारी हिंदी का आधार बन चुकी है। इस लेख में साहित्यिक हिंदी के रूप में खड़ी बोली के उदय और विकास की ऐतिहासिक, सामाजिक और साहित्यिक परिस्थितियों का विवेचन किया गया है। खड़ी बोली की भौगोलिक और भाषिक पृष्ठभूमि खड़ी बोली हिंदी की एक प्रमुख उपभाषा है, जिसका विकास पश्चिमी उत्तर प्रदेश (विशेषतः दिल्ली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों) ... Read more - [काव्यभाषा के रूप में ब्रजभाषा का उदय और विकास](https://hindidepartment.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%aa-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%9c/): प्रस्तावना भारतीय साहित्य के समृद्ध इतिहास में ब्रजभाषा एक ऐसी भाषा है, जिसने अपनी मिठास, लयात्मकता और भावाभिव्यक्ति की क्षमता के कारण काव्य की भूमि में एक विशेष स्थान प्राप्त किया है। ब्रजभाषा न केवल एक बोली है, बल्कि भारतीय संस्कृति, भक्ति और साहित्य की एक जीवंत परंपरा भी है। मध्यकालीन उत्तर भारत में जब भक्तिकाव्य का प्रवाह अपने चरम पर था, तब ब्रजभाषा ने एक सशक्त काव्यभाषा के रूप में अपनी पहचान बनाई। विशेष रूप से कृष्णभक्ति साहित्य में इस भाषा की व्यापक उपयोगिता ने इसे जन-जन की भाषा बना दिया। ब्रजभाषा का भाषिक स्वरूप ब्रजभाषा हिंदी की पश्चिमी ... Read more - [काव्यभाषा के रूप में अवधी का उदय और विकास](https://hindidepartment.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%aa-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%80/): प्रस्तावना भारतीय भाषाओं के इतिहास में अवधी को एक विशेष स्थान प्राप्त है। यह न केवल एक क्षेत्रीय बोली के रूप में उभरकर सामने आई, बल्कि एक समृद्ध काव्यभाषा के रूप में भी विकसित हुई। अवधी भाषा में हमें जो भावनात्मक संवेदनशीलता, संगीतमय प्रवाह और जन-जीवन की सरलता देखने को मिलती है, वह इसे काव्य के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है। इस लेख में हम काव्यभाषा के रूप में अवधी के उदय, विकास, प्रमुख रचनाकारों, रचनाओं और इसके सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। अवधी भाषा का परिचय अवधी, हिंदी की एक प्रमुख उपभाषा है, जो मुख्यतः उत्तर प्रदेश ... Read more - [अपभ्रंश (अवहट्ट सहित) और पुरानी हिंदी का संबंध](https://hindidepartment.com/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%b6-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%b9%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%81/): प्रस्तावना भारतीय उपमहाद्वीप की भाषिक परंपरा अत्यंत समृद्ध है, परन्तु इसके साथ ही हमें इसमें जटिलताएं भी देखने को मिलती हैं। संस्कृत, पालि और प्राकृत के पश्चात जिस चरण में हिंदी भाषा का विकास हुआ, उस मध्यवर्ती कड़ी को अपभ्रंश कहा जाता है। अपभ्रंश से ही अवहट्ट तथा फिर पुरानी हिंदी का जन्म हुआ। इस लेख में हम इसी से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को प्रकाशित करेंगे। इसमें आपलोग जानेंगे कि अपभ्रंश क्या है, अवहट्ट किस प्रकार अपभ्रंश और हिंदी के बीच की कड़ी है, और पुरानी हिंदी के विकास में अपभ्रंश की भूमिका क्या रही है। हिंदी के विभिन्न ... Read more - [Current Affairs - April 2025](https://hindidepartment.com/current-affairs-april-2025/): 1➤ लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार 2025 किसे दिया जाएगा ? रतन टाटा नारायण मूर्ति कुमार मंगलम बिड़ला आनंद महिंद्रा ➤ कुमार मंगलम बिड़ला 👁 Show Answer 2➤ लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्समैन ऑफ द ईयर अवार्ड 2025 जीतने वाले मोंडो डुप्लैटिस किस खेल से संबंधित हैं ? पोल वॉल्ट टेनिस हॉकी फुटबाल ➤ पोल वॉल्ट 👁 Show Answer 3➤ आदिवासी साहित्य संस्था ने कोकबोरोक भाषा को संवैधानिक दर्जा दिये जाने की मांग की, यह भाषा किस राज्य में बोली जाती है ? तमिलनाडु तेलंगाना गोवा त्रिपुरा ➤ त्रिपुरा 👁 Show Answer 4➤ राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस कब मनाया जाता है ? 24 ... Read more - [Current Affairs - March 2025](https://hindidepartment.com/current-affairs-march-2025/): 1➤ भारत के पहले विश्व शांति केंद्र का उद्घाटन किस शहर में किया गया था ? नई दिल्ली गुरूग्राम मुंबई बेंगलुरू ➤ गुरूग्राम 👁 Show Answer 2➤ किस वैश्विक ब्रांड ने हाल ही में दिलजीत दोसांझ को अपना ग्लोबल एंबेसडर नियुक्त किया है ? Adidas Levi’s Nike Puma ➤ Levi’s 👁 Show Answer 3➤ खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2025 कहां आयोजित किए गए ? शिमला मनाली गुलमर्ग लेह ➤ गुलमर्ग 👁 Show Answer 4➤ ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ किस राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई थी ? उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मध्यप्रदेश राजस्थान ➤ उत्तराखंड 👁 Show Answer 5➤ किस ... Read more - [हिंदी साहित्य प्रश्नोत्तरी (भाग-7)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): 1➤ ‘रसापकर्पका दोषाः’ यह काव्य दोष सम्बन्धी परिभाषा किस विद्वान की है ? वामन विश्वनाथ मम्मट जयदेव ➤ विश्वनाथ 👁 Show Answer 2➤ “है अमानिशा; उगलता गगन घन अंधकार; खो रहा दिशा का ज्ञान; स्तब्ध है पवन-चार।।” पंक्ति किस रचना की है ? सरोज स्मृति बादल राग संध्या सुन्दरी राम की शक्ति पूजा ➤ राम की शक्ति पूजा 👁 Show Answer 3➤ ‘बलदेव खटिक’ किसकी रचना है ? धूमिल की लीलाधर जगूड़ी की बलदेव वंशी की इनमें से कोई नहीं ➤ लीलाधर जगूड़ी की 👁 Show Answer 4➤ ‘आकाश गंगा’ काव्य-संग्रह है ? बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ भगवती चरण वर्मा रामकुमार ... Read more - [भक्तिकाल (MCQ) भाग - 6](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-6/): 1➤ ‘प्रभुजी तुम चंदन हम पानी’ – ये पंक्तियां किसने लिखी हैं ? नामदेव कबीर रैदास दादू ➤ रैदास 👁 Show Answer 2➤ गुरूग्रंथ साहब में किस कवि की रचनाएं संकलित हैं ? विद्यापति कबीर जायसी जयदेव ➤ कबीर 👁 Show Answer 3➤ ‘कृष्णगीतावली’ किसकी रचना है ? सूरदास नाभादास तुलसीदास मीराबाई ➤ तुलसीदास 👁 Show Answer 4➤ ‘सुदामाचरित’ किसकी रचना है ? घनानंद कृष्णदास रसखान नरोत्तमदास ➤ नरोत्तमदास 👁 Show Answer 5➤ ‘सखी संप्रदाय’ के प्रवर्तक कौन माने जाते हैं ? रामानंद वल्लभाचार्य स्वामी हरिदास अग्रदास ➤ स्वामी हरिदास 👁 Show Answer 6➤ तुलसी के प्रामाणिक ग्रंथों की संख्या ... Read more - [भक्तिकाल (MCQ) भाग -5](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-5/): 1➤ कबीरदास के काव्य में विद्यमान भावात्मक रहस्यवाद की झलक का कारण है ? वेदान्त का प्रभाव सूफी सत्संग का प्रभाव अन्योक्ति का प्रभाव ज्ञानमार्गी चिंतन का प्रभाव ➤ सूफी सत्संग का प्रभाव 👁 Show Answer 2➤ निर्गुणपंथियों में सबसे अधिक शिक्षित और शास्त्रज्ञ थे ? दादू दयाल धर्मदास सुन्दरदास कबीरदास ➤ सुन्दरदास 👁 Show Answer 3➤ “अगुनहिं सगुनहिं नहिं कछु भेदा” उक्ति है ? तुलसीदास की मलिक मुहम्मद जायसी की मंझन की कबीरदास की ➤ तुलसीदास की 👁 Show Answer 4➤ साहित्य को ‘सुरसरि सम’ सबका हितकारी घोषित किया है ? केशवदास ने रामानन्दाचार्य ने सूरदास ने गोस्वामी तुलसीदास ... Read more - [हिन्दी साहित्य प्रश्नोत्तरी (भाग-6)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%a4-5/): 1➤ ‘संस्कृति के चार अध्याय’ किसकी रचना है ? अज्ञेय मुक्तिबोध जयशंकर प्रसाद दिनकर ➤ दिनकर 👁 Show Answer 2➤ पत्रकारिता के स्तर से निबन्ध शैली को विकसित करने वाले प्रमुख लेखक हैं ? माखनलाल चतुर्वेदी शिवपूजन सहाय रामवृक्ष बेनीपुरी गुलाबराय ➤ रामवृक्ष बेनीपुरी 👁 Show Answer 3➤ ‘लोहे की दीवार के दोनों ओर’ किसकी कृति है ? अज्ञेय सत्यदेव परिव्राजक यशपाल राहुल सांकृत्यायन ➤ यशपाल 👁 Show Answer 4➤ ‘कबूतरखाना’ किस एकांकीकार की रचना है ? विनोद रस्तोगी मोहन राकेश भुवनेश्वर जगदीशचन्द्र माथुर ➤ जगदीशचन्द्र माथुर 👁 Show Answer 5➤ “उधौ मन नाहीं दस बीस, एक हुतौ सो गयौ ... Read more - [रीतिकाल (MCQ) भाग-4](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-4/): 1➤ ‘भावविलास’ किसकी रचना है ? देव भिखारीदास बिहारी पीपा ➤ देव 👁 Show Answer 2➤ ‘काव्यनिर्णय’ किसकी रचना है ? बोधा भूषण पद्माकर भिखारीदास ➤ भिखारीदास 👁 Show Answer 3➤ ‘गंगालहरी’ किसकी रचना है ? बोधा पद्माकर घनानंद भूषण ➤ पद्माकर 👁 Show Answer 4➤ ‘इश्कनामा’ किसकी रचना है ? घनानंद बोधा भूषण बिहारी ➤ बोधा 👁 Show Answer 5➤ ‘विरहलीला’ किसकी रचना है ? घनानंद सूदन बिहारी देव ➤ घनानंद 👁 Show Answer 6➤ ‘शिवाबावनी’ किसकी रचना है ? भूषण देव भिखारीदास जसवंत सिंह ➤ भूषण 👁 Show Answer 7➤ इनमें से किस विकल्प के सभी ग्रंथ लक्षण ... Read more - [भक्तिकाल (MCQ) भाग - 4](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-4/): 1➤ “कमल दल नैनन की उनमानि। बिसरत नाहि सखी मो मन तें मंद-मंद मुसकानि।” – यह पद चरण किसकी रचना है ? मीराबाई रहीम सूरदास नन्ददास ➤ रहीम 👁 Show Answer 2➤ “बरसै मघा झकोरी-झकोरी। मोर दुइ नैन चुवैं जस ओरी।” इस अर्द्धाली में आए ‘ओरी’ शब्द का अर्थ है ? अरे ओ सखी री, मेरे आंसुओं को देखो। जिसका ओर-छोर न हो, ऐसी लगातार बारिश। ओरा जाना, समाप्त हो जाना। छाजन से गिरनेवाली पानी की धार। ➤ छाजन से गिरनेवाली पानी की धार। 👁 Show Answer 3➤ लोक-मंगल की भावना का सर्वश्रेष्ठ कवि इनमें से कौन है ? जायसी ... Read more - [भारतेन्दु युग (MCQ) भाग-2](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%81-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-2/): 1➤ आधुनिक हिन्दी गद्य के जनक माने जाते हैं ? भारतेन्दु हरिश्चन्द्र रामचन्द्र शुक्ल महावीर प्रसाद द्विवेदी प्रताप नारायण मिश्र ➤ भारतेन्दु हरिश्चन्द्र 👁 Show Answer 2➤ हिन्दी नवजागरण को ‘मूलतः बुद्धिवादी और रहस्यवाद-विरोधी’ कहने वाले विद्वान हैं ? डॉ. रामविलास शर्मा महावीर प्रसाद द्विवेदी डॉ. नामवर सिंह रामचन्द्र शुक्ल ➤ डॉ. रामविलास शर्मा 👁 Show Answer 3➤ निम्नलिखित कवियों में से एक भारतेंदुयुगीन नहीं है ? अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ प्रतापनारायण मिश्र अंबिका दत्त व्यास ➤ अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ 👉 अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्विवेदी युग के कवि हैं। 👁 Show Answer 4➤ निम्नलिखित कवियों में से ... Read more - [रीतिकाल (MCQ) भाग-3](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-3/): 1➤ निम्नलिखित कवियों के जीवन काल का सही आरोही क्रम है ? भूषण, मतिराम, बिहारी, देव मतिराम, भूषण, बिहारी, देव बिहारी, मतिराम, भूषण, देव बिहारी, भूषण, मतिराम, देव ➤ बिहारी, भूषण, मतिराम, देव 👁 Show Answer 2➤ निम्नलिखित में से कौन-सा एक कवि लक्षणग्रंथकार नहीं है ? घनानन्द चिंतामणि सेनापति मतिराम ➤ घनानन्द 👁 Show Answer 3➤ निम्नलिखित रचनाओं और रचनाकारों में से सही विकल्प है ? कर्णाभरण – याकूब खां रतनहजारा – कुलपति भाषा भूषण – जसवंत सिंह रसरहस्य – मतिराम ➤ भाषा भूषण – जसवंत सिंह 👉 इनमें से ‘कर्णाभरण’ – कवि गोविंद की, ‘रतनहजारा’ – रसनिधि की ... Read more - [भक्तिकाल (MCQ) भाग - 3](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-3/): 1➤ “लोकनायक वही हो सकता है जो समन्वय करने का अपार धैर्य लेकर आया हो। उनका सारा काम समन्वय की विराट चेष्टा है।” यह कथन किस लेखक का है ? हजारी प्रसाद द्विवेदी आचार्य रामचन्द्र शुक्ल महावीर प्रसाद द्विवेदी डॉ. नगेन्द्र ➤ हजारी प्रसाद द्विवेदी 👉इस कथन में हजारी प्रसाद द्विवेदी ने तुलसीदास के बारे में कहा है। 👁 Show Answer 2➤ ‘भारतीय सौन्दर्यशास्त्र और तुलसीदास’ किसकी रचना है ? डॉ. रामविलास शर्मा डॉ. नामवर सिंह मैनेजर पाण्डेय रामचन्द्र शुक्ल ➤ डॉ. रामविलास शर्मा 👁 Show Answer 3➤ ‘दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता’ की भाषा क्या है ? ब्रजभाषा ... Read more - [आदिकाल (MCQ) भाग-3](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-3/): 1➤ निम्नलिखित में से कौन-सी श्रेणी काल-क्रमानुसार सही है ? बीसलदेव रसो, पृथ्वीराज रासो, हम्मीर रासो, खुमाण रासो पृथ्वीराज रासो, बीसलदेव रासो, हम्मीर रासो, खुमाण रासो खुमाण रासो, बीसलदेव रासो, पृथ्वीराज रासो, हम्मीर रासो हम्मीर रासो, पृथ्वीराज रासो, बीसलदेव रासो, खुमाण रासो ➤ खुमाण रासो, बीसलदेव रासो, पृथ्वीराज रासो, हम्मीर रासो 👁 Show Answer 2➤ इन सिद्धों एवं नाथों में सबसे पुराने हैं ? सरहपा मछंदरनाथ काण्डपा गोरखनाथ ➤ सरहपा 👁 Show Answer 3➤ उपदेशरसायनरास के रचनाकार हैं ? कवि विद्याधर शार्ङ्गधर धनपाल जिनदत्त सूरि ➤ जिनदत्त सूरि 👁 Show Answer 4➤ नवनाथों में इनमें से कौन सम्मिलित नहीं है ... Read more - [Current Affairs - February 2025](https://hindidepartment.com/current-affairs-february-2025/): 1➤ भारत के नए मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में किसे नियुक्त किया गया है ? राजीव कुमार सुशील चंद्रा ज्ञानेश कुमार अजय भादू ➤ ज्ञानेश कुमार 👁 Show Answer 2➤ किस लेखक को डोंगरी भाषा में साहित्य अकादमी पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया ? पद्मा सचदेव चमन अरोड़ा निशांत शर्मा मोहन सिंह ➤ चमन अरोड़ा 👁 Show Answer 3➤ दिल्ली की नई मुख्यमंत्री के रूप में किसे नियुक्त किया गया है ? अर्पणा मिश्रा रेखा गुप्ता सोनाली वर्मा कविता चौधरी ➤ रेखा गुप्ता 👁 Show Answer 4➤ हाल ही में President’s Rule किस राज्य में लागू किया गया ... Read more - [असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा - 2017 का प्रश्नपत्र (UKPSC)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%ab%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95-5/): 1➤ सूरदास को ‘पुष्टिमार्ग का जहाज’ किसने कहा है ? वल्लभाचार्य हितहरिवंश गोकुलनाथ विट्ठलनाथ ➤ वल्लभाचार्य 👁 Show Answer 2➤ ‘द्वैताद्वैतवाद’ का प्रवर्तक कौन है ? शंकराचार्य निम्बार्काचार्य माध्वाचार्य रामानुजाचार्य ➤ निम्बार्काचार्य 👁 Show Answer 3➤ ‘कीर्तिलता’ किसकी कृति है ? विद्यापति मतिराम सेनापति केशवदास ➤ विद्यापति 👁 Show Answer 4➤ भक्तिकाव्य को भारतीय चिंताधारा का स्वाभाविक विकास किसने माना है ? श्यामसुन्दर दास रामकुमार वर्मा हजारीप्रसाद द्विवेदी रामचन्द्र शुक्ल ➤ हजारीप्रसाद द्विवेदी 👁 Show Answer 5➤ ‘साहित्य का इतिहास दर्शन’ किसका ग्रन्थ है ? नगेन्द्र नलिनविलोचन शर्मा महावीरप्रसाद द्विवेदी नन्ददुलारे वाजपेयी ➤ नलिनविलोचन शर्मा 👁 Show Answer 6➤ ‘एक ... Read more - [हिन्दी व्याकरण (MCQ) भाग-1](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/): 1➤ निम्नलिखित में से कौन-सी अघोष महाप्राण ध्वनि है ? क ट ज ठ ➤ ठ 👁 Show Answer 2➤ निम्नलिखित में से कौन-सा पश्च स्वर है ? आ इ ई अ ➤ आ 👁 Show Answer 3➤ निम्नलिखित में से स्वर ध्वनियां हैं ? क, ख, ग, घ, ङ ख, थ, फ, भ क, त, प, ट अं, अः, ऐ, ओ ➤ अं, अः, ऐ, ओ 👁 Show Answer 4➤ निम्नलिखित में से तालव्य ध्वनियां हैं ? क, ख, ग, घ, ङ ख, थ, फ, भ क, त, प, ट च, छ, ज, झ ➤ च, छ, ज, झ ... Read more - [हिन्दी साहित्य का इतिहास लेखन (MCQ) भाग-1](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8/): 1➤ हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा का सूत्रपात किसने किया था ? आचार्य रामचंद्र शुक्ल गार्सा-द-तासी जॉर्ज ग्रियर्सन शिवसिंह सेंगर ➤ गार्सा-द-तासी 👁 Show Answer 2➤ काशी नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा ‘हिंदी साहित्य का वृहत् इतिहास’ कितने खंडों में प्रकाशित किया गया ? 17 16 20 18 ➤ 16 👁 Show Answer 3➤ ‘हिन्दी साहित्य की भूमिका’ के लेखक हैं ? हजारीप्रसाद द्विवेदी विश्वनाथप्रसाद मिश्र नगेन्द्र गणपतिचन्द्र गुप्त ➤ हजारीप्रसाद द्विवेदी 👁 Show Answer 4➤ हिंदी साहित्य के इतिहास-लेखन की परंपरा में मिश्र बंधुओं ने किस ग्रंथ द्वारा अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया ? मिश्रबंधु विनोद शिवसिंह सरोज हिंदी ... Read more - [पुरस्कार (MCQ) भाग-1](https://hindidepartment.com/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/): 1➤ महादेवी वर्मा को उनकी किस कृति पर ‘भारतीय ज्ञानपीठ’ पुरस्कार मिला ? रश्मि सांध्य गीत यामा नीहार ➤ यामा 👁 Show Answer 2➤ सुमित्रानंदन पंत को ‘चिदंबरा’ पर कौन सा पुरस्कार प्रदान किया गया ? ज्ञानपीठ पुरस्कार साहित्य अकादमी व्यास सम्मान हिंदी अकादमी, दिल्ली ➤ ज्ञानपीठ पुरस्कार 👁 Show Answer 3➤ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को ‘उर्वशी’ पर किस वर्ष ‘भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार’ मिला ? 1968 ई. 1980 ई. 1969 ई. 1972 ई. ➤ 1972 ई. 👁 Show Answer 4➤ हिंदी के किस कवि को ‘भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार’ सबसे पहले मिला ? मैथिलीशरण गुप्त माखनलाल चतुर्वेदी गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ सुमित्रानंदन ... Read more - [संस्थाएं (MCQ) भाग-1](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/): 1➤ महादेवी वर्मा ने हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए इनमें से किस संस्था की स्थापना प्रयाग में की ? साहित्य सभा साहित्यकार संसद साहित्य-संगम साहित्यिकी ➤ साहित्यकार संसद 👁 Show Answer 2➤ साहित्य अकादमी का पहला अध्यक्ष कौन था ? कृष्ण कृपलानी राधाकृष्णन जवाहरलाल नेहरू राजेंद्र प्रसाद ➤ जवाहरलाल नेहरू 👁 Show Answer 3➤ दक्षिण भारत हिंदी प्रचार-सभा के संस्थापक कौन थे ? राजेंद्र प्रसाद महात्मा गांधी चक्रवर्ती राजगोपालाचारी पट्टाभि सीतारामय्या ➤ महात्मा गांधी 👁 Show Answer 4➤ नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना कब हुई थी ? 1893 ई. 1855 ई. 1947 ई. 1950 ई. ➤ 1893 ई. 👁 Show ... Read more - [काव्यशास्त्र (MCQ) भाग-1](https://hindidepartment.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/): 1➤ भारतीय काव्यशास्त्रीय परंपरा का सूत्रपात ईसा पूर्व द्वितीय शताब्दी में किस ग्रंथ से हुआ ? नाट्यशास्त्र काव्य-मीमांसा काव्य-दर्पण काव्य-प्रकाश ➤ नाट्यशास्त्र 👁 Show Answer 2➤ ‘रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्’ – यह पंक्ति किस आचार्य की है ? मम्मट भरत दंडी जगन्नाथ ➤ जगन्नाथ 👁 Show Answer 3➤ ‘वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’ किसकी उक्ति है ? अभिनव गुप्त विश्वनाथ भट्टनायक भट्टलोल्लट ➤ विश्वनाथ 👁 Show Answer 4➤ “कीरति भणिति भूति भलि सोई। सुरसरि सम सब कहं हित होई।।” काव्य-प्रयोजन के संदर्भ में कही गई यह उक्ति किस रचनाकार की है ? कबीरदास सूरदास तुलसीदास जायसी ➤ तुलसीदास 👁 Show Answer 5➤ ... Read more - [यात्रा वृतांत (MCQ) भाग-1](https://hindidepartment.com/%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/): 1➤ यात्रावृत्त विषयक इनमें से कौन सी रचना भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा नहीं लिखी गई है ? सरयू पार की यात्रा हरिद्वार की यात्रा ब्रजयात्रा लखनऊ की यात्रा ➤ ब्रजयात्रा 👁 Show Answer 2➤ ‘विलायत-यात्रा’ किसकी रचना है ? प्रतापनारायण मिश्र बालकृष्ण भट्ट भारतेंदु हरिश्चंद्र महावीर प्रसाद द्विवेदी ➤ प्रतापनारायण मिश्र 👁 Show Answer 3➤ ‘लंकायात्रा का विवरण’ किस रचनाकार ने लिखा है ? श्रीधर पाठक सत्यदेव परिव्राजक देवी प्रसाद खत्री गोपालराम गहमरी ➤ गोपालराम गहमरी 👁 Show Answer 4➤ ‘मेरी कैलाश यात्रा’ में सत्यदेव परिव्राजक ने कहां से कहां तक की यात्रा का विवरण प्रस्तुत किया है ? दिल्ली से ... Read more - [रिपोर्ताज (MCQ) भाग-1](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%9c-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/): 1➤ ‘रिपोर्ताज’ किस भाषा का शब्द है ? रूसी फ्रांसीसी जर्मन अंग्रेजी ➤ फ्रांसीसी 👁 Show Answer 2➤ हिंदी में रिपोर्ताज लेखन की परंपरा किसने शुरू की ? शिवदान सिंह चौहान रांगेय राघव उपेंद्रनाथ ‘अश्क’ धर्मवीर भारती ➤ शिवदान सिंह चौहान 👁 Show Answer 3➤ हिन्दी का पहला रिपोर्ताज कौन सा है ? वे लड़ेंगे हजार साल बंगाल का अकाल बाढ़! बाढ़!! बाढ़!!! लक्ष्मीपुरा ➤ लक्ष्मीपुरा 👁 Show Answer 4➤ बंगाल के अकाल पर किसने मार्मिक और सशक्त रिपोर्ताज लिखे ? शिवदान सिंह चौहान उपेंद्रनाथ ‘अश्क’ रांगेय राघव महादेवी वर्मा ➤ रांगेय राघव 👁 Show Answer 5➤ ‘पहाड़ों में प्रेममय ... Read more - [रेखाचित्र/संस्मरण (MCQ) भाग-1](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a3-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/): 1➤ ‘सुधा’ में इलाचंद्र जोशी का संस्मरण किस शीर्षक से प्रकाशित हुआ ? कुछ संस्मरण मेरे प्राथमिक जीवन की स्मृतियां स्मृतिलेखा वे दिन, वे लोग ➤ मेरे प्राथमिक जीवन की स्मृतियां 👁 Show Answer 2➤ ‘माटी की मूरतें’ किस लेखक की रचना है ? अमृतलाल नागर शिवपूजन सहाय रामवृक्ष बेनीपुरी बनारसीदास चतुर्वेदी ➤ रामवृक्ष बेनीपुरी 👁 Show Answer 3➤ ‘तीस दिन मालवीयजी के साथ’ किसकी रचना है ? रामनरेश त्रिपाठी महादेवी वर्मा उपेंद्रनाथ ‘अश्क’ माखनलाल चतुर्वेदी ➤ रामनरेश त्रिपाठी 👁 Show Answer 4➤ ‘रामा’,‘बिंदा’ और ‘घीसा’ किस रचनाकार के संस्मरणात्मक रेखाचित्र हैं ? रामवृक्ष बेनीपुरी शिवपूजन सहाय महादेवी वर्मा जैनेंद्र ... Read more - [हिन्दी साहित्य प्रश्नोत्तरी (भाग-5)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%a4-4/): 1➤ ‘व्योमकेश दरवेश’ (हजारी प्रसाद द्विवेदी की जीवनी) के लिए किस लेखक को वर्ष 2013 का 22वां व्यास सम्मान प्रदान किया गया ? विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विश्वनाथ प्रसाद मिश्र विश्वनाथ त्रिपाठी रामदरश मिश्र ➤ विश्वनाथ त्रिपाठी 👁 Show Answer 2➤ “गद्य जीवन संग्राम की भाषा है।” कथन किसका है ? प्रेमचन्द रामचन्द्र शुक्ल रामविलास शर्मा निराला ➤ निराला 👁 Show Answer 3➤ ‘पेनी रीडिंग क्लब (1873 ई.) की स्थापना किसने की थी ? गिलक्राइस्ट ग्रियर्सन शिव प्रसाद सितारे हिंद भारतेन्दु ➤ भारतेन्दु 👁 Show Answer 4➤ ‘लक्ष्मी’ पत्रिका के सम्पादक थे ? कृष्ण बिहारी मिश्र मिश्रबन्धु लाला भगवानदीन पद्म सिंह ... Read more - [पत्र-पत्रिकाएं (MCQ) भाग-1](https://hindidepartment.com/%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/): 1➤ इनमें से हिन्दी का पहला पत्र कौन सा है ? मार्तंड उदंत मार्तंड संवाद कौमुदी बंगाल गजट ➤ उदंत मार्तंड 👁 Show Answer 2➤ राजा राममोहन राय ने सन् 1821 में किस पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ किया ? बंगदूत संवाद कौमुदी प्रजाहितैषी जागरण ➤ संवाद कौमुदी 👁 Show Answer 3➤ ‘उदंत मार्तंड’ किस प्रकार का पत्र था ? पाक्षिक दैनिक साप्ताहिक मासिक ➤ साप्ताहिक 👁 Show Answer 4➤ ‘कविवचन सुधा’ पत्रिका का प्रकाशन किस साहित्यकार ने आरंभ किया ? बालकृष्ण भट्ट प्रतापनारायण मिश्र बालमुकुंद गुप्त भारतेंदु हरिश्चंद्र ➤ भारतेंदु हरिश्चंद्र 👁 Show Answer 5➤ ‘बनारस अखबार’ के संपादक कौन ... Read more - [असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा - 2018 का प्रश्नपत्र (MPPSC)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%ab%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95-4/): 1➤ हिन्दी की लिपि कहलाती है ? रोमन देवनागरी ब्राह्मी गुरूमुखी ➤ देवनागरी 👁 Show Answer 2➤ बघेली बोली का क्षेत्र है ? रीवा इंदौर रायपुर भोपाल ➤ रीवा 👁 Show Answer 3➤ रामचरितमानस लिखी गई है ? ब्रज अवधी संस्कृत खड़ी बोली ➤ अवधी 👁 Show Answer 4➤ कविकुलकल्पतरू किसकी रचना है ? कुलपति चिंतामणि त्रिपाठी मतिराम देव ➤ चिंतामणि त्रिपाठी 👁 Show Answer 5➤ सूरसागर किस भाषा में लिखा गया है ? ब्रज अवधी बुन्देली भोजपुरी ➤ ब्रज 👁 Show Answer 6➤ बिहारी किस काल के कवि हैं ? आदिकाल रीतिकाल आधुनिक काल भक्तिकाल ➤ रीतिकाल 👁 Show ... Read more - [असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा - 2017 का प्रश्नपत्र (HPSC)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%ab%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95-3/): 1➤ शब्द शक्तियां कितने प्रकार की होती हैं ? 5 3 4 2 ➤ 3 👁 Show Answer 2➤ दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मद्रास की स्थापना किसने की थी ? राजेन्द्र प्रसाद स्वामी दयानन्द महात्मा गांधी राधाकृष्णन ➤ महात्मा गांधी 👁 Show Answer 3➤ डॉ॰ ग्रियर्सन ने राजस्थानी बोलियों को कितने वर्गों में रखा था ? 2 6 5 7 ➤ 5 👁 Show Answer 4➤ ‘रिपब्लिक’ ग्रंथ के लेखक हैं ? सुकरात प्लेटो अरस्तु लोंजाइनस ➤ प्लेटो 👁 Show Answer 5➤ पश्चिमी सीमा की ‘मगही’ किससे प्रभावित है ? भोजपुरी कुमायूंनी छत्तीसगढ़ी कन्नौजी ➤ भोजपुरी 👁 Show Answer ... Read more - [असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा - 2016 का प्रश्नपत्र (UPHESC)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%ab%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95-2/): 1➤ “लोकनायक वही हो सकता है जो समन्वय करने का अपार धैर्य लेकर आया हो। उनका सारा काम समन्वय की विराट चेष्टा है।” यह कथन किस लेखक का है ? हजारी प्रसाद द्विवेदी आचार्य रामचन्द्र शुक्ल महावीर प्रसाद द्विवेदी डॉ॰ नगेन्द्र ➤ हजारी प्रसाद द्विवेदी 👁 Show Answer 2➤ निम्नलिखित कवियों के जीवन काल का सही आरोही क्रम है ? भूषण, मतिराम, बिहारी, देव मतिराम, भूषण, बिहारी, देव बिहारी, मतिराम, भूषण, देव बिहारी, भूषण, मतिराम, देव ➤ बिहारी, भूषण, मतिराम, देव 👁 Show Answer 3➤ ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ का खड़ी बोली में अनुवाद किसने किया था ? राजा लक्ष्मण सिंह सदासुखलाल ... Read more - [Current Affairs - January 2025](https://hindidepartment.com/current-affairs-january-2025/): 1➤ हाल ही में प्रथम रायसीना मध्य पूर्व सम्मेलन, 2025 कहां आयोजित किया गया ? तेहरान अबू धाबी रियाद दोहा ➤ अबू धाबी 👁 Show Answer 2➤ हाल ही में ‘सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2025’ किसे प्रदान किया गया है ? India Meteorological Department (IMD) National Disaster Response Force (NDRF) Indian National Centre for Ocean Information Services (INCOIS) Indian Space Research Organisation (ISRO) ➤ Indian National Centre for Ocean Information Services (INCOIS) 👁 Show Answer 3➤ किस राज्य सरकार ने रथ सप्तमी को राज्य त्योहार घोषित किया है ? तमिलनाडु कर्नाटक आंध्र प्रदेश केरल ➤ आंध्र प्रदेश 👁 ... Read more - [असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा-2016 का प्रश्नपत्र (CGPSC)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%ab%e0%a5%87%e0%a4%b8%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d/): 1➤ राहुल सांकृत्यायन ने हिंदी का पहला कवि किसे माना है ? चंदबरदाई स्वयंभू पुष्पदंत सरहपा ➤ सरहपा 👁 Show Answer 2➤ सिद्धों की बानियों को ‘हिंदी काव्य-धारा’ के नाम से किसने संगृहीत किया ? महामहोपाध्याय हरप्रसाद शास्त्री डॉ॰ प्रबोधचंद्र बनर्जी डॉ॰ हरमन याकोवी महापंडित राहुल सांकृत्यायन ➤ महापंडित राहुल सांकृत्यायन 👁 Show Answer 3➤ सूरसागर की रचना का आधार………….है ? गर्ग संहिता महाभारत विष्णु पुराण श्रीमद्भागवत ➤ श्रीमद्भागवत 👁 Show Answer 4➤ निम्न में से कौन सी छायावादी शैली की प्रमुख विशेषता नहीं है ? गीतिप्रधानता लाक्षणिकता प्रतीकात्मकता इतिवृत्तात्मकता ➤ इतिवृत्तात्मकता 👁 Show Answer 5➤ अज्ञेय के संपादन में ... Read more - [जीवनी/आत्मकथा (MCQ) भाग-1](https://hindidepartment.com/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/): 1➤ जीवनी साहित्य का प्रारंभ किस युग से हुआ ? आदिकाल द्विवेदीयुग भारतेंदु युग छायावाद युग ➤ भारतेंदु युग 👁 Show Answer 2➤ इनमें से काका कालेलकर द्वारा लिखित जीवनी ग्रंथ कौन सा है ? बापू के कारावास की कहानी बापू के कदमों में बापू की झांकियां अकाल पुरूष गांधी ➤ बापू की झांकियां 👁 Show Answer 3➤ जीवनी पुस्तक ‘आवारा मसीहा’ के लेखक कौन हैं ? शरतचंद्र चट्टोपाध्याय विष्णु प्रभाकर पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ ➤ विष्णु प्रभाकर 👁 Show Answer 4➤ प्रेमचंद पर लिखी शिवरानी देवी की कृति कौन सी है ? कलम का मजदूर कलम का ... Read more - [Current Affairs - December 2024](https://hindidepartment.com/current-affairs-december-2024/): 1➤ फीफा फुटबॉल महिला विश्व कप 2027 का आयोजन किस देश में किया जाएगा ? फ्रांस स्पेन ब्राज़ील ऑस्ट्रेलिया ➤ ब्राज़ील 👁 Show Answer 2➤ दिसंबर 2024 में किस राज्य या केंद्रशासित प्रदेश ने महिला सम्मान योजना को मंजूरी दी है ? लद्दाख दिल्ली जम्मू कश्मीर पंजाब ➤ दिल्ली 👁 Show Answer 3➤ नेटुम्बो नंदी-नदैतवा किस देश की पहली महिला राष्ट्रपति निर्वाचित की गई हैं ? अंगोला बुरंडी नामीबिया कैमरून ➤ नामीबिया 👁 Show Answer 4➤ हाल ही में भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language-ISL) के लिए किस DTH चैनल का शुभारंभ किया गया ? PM-eBhasha PM-e-Education PM-e-Vani PM-e-Vidya ➤ ... Read more - [Current Affairs - November 2024](https://hindidepartment.com/current-affairs-november-2024/): 1➤ देश का पहला ‘राइटर्स विलेज’ किस राज्य में खोला गया है ? उत्तराखंड राजस्थान मध्य प्रदेश झारखंड ➤ उत्तराखंड 👁 Show Answer 2➤ अक्टूबर 2024 में किसे फिजी के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “Companion of the Order of Fiji” से सम्मानित किया गया ? द्रौपदी मुर्मू बाबा रामदेव श्री श्री रविशंकर राम गोपाल ठाकुर ➤ श्री श्री रविशंकर 👁 Show Answer 3➤ Environmental Ship Index (ESI) के तहत Green Ship Incentives लागू करने वाला भारत का पहला बंदरगाह कौन सा है ? कोचीन पोर्ट मंगलुरू पोर्ट मोरमुगाओ पोर्ट पारादीप पोर्ट ➤ मोरमुगाओ पोर्ट 👁 Show Answer 4➤ 73वीं मिस यूनिवर्स ... Read more - [हिन्दी कहानी (MCQ) भाग-3](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-3/): 1➤ निम्नलिखित कहानियों में से हिन्दी की पहली कहानी की चर्चा में किस कहानी की गणना नहीं की जाती है ? इंदुमती ग्यारह वर्ष का समय रानी केतकी की कहानी कानों में कँगना ➤ कानों में कँगना 👁 Show Answer 2➤ आचार्य रामचंद्र शुक्ल की कहानी ‘ग्यारह वर्ष का समय’ पहले किस पत्रिका में प्रकाशित हुई थी ? चांद सरस्वती माधुरी कविवचन सुधा ➤ सरस्वती 👁 Show Answer 3➤ आधुनिक हिंदी की प्रथम मौलिक कहानी लेखिका किसे माना जाता है ? बंग महिला उषादेवी मित्रा होमवती देवी तारा पांडेय ➤ बंग महिला 👁 Show Answer 4➤ हिंदी कहानी में यथार्थवादी ... Read more - [हिन्दी आलोचना (MCQ) भाग-1](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-1/): 1➤ ‘दूसरी परंपरा की खोज’ पुस्तक का लेखक कौन है ? निराला हजारी प्रसाद द्विवेदी रामविलास शर्मा नामवर सिंह ➤ नामवर सिंह 👁 Show Answer 2➤ रामविलास शर्मा की आलोचनात्मक कृति ‘निराला की साहित्य साधना’ कितने भागों में प्रकाशित है ? दो चार तीन एक ➤ तीन 👁 Show Answer 3➤ बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ ने किस पुस्तक के अनुवाद की आलोचना की है ? संयोगिता स्वयंवर नीलदेवी परीक्षा गुरू एकांतवासी योगी ➤ संयोगिता स्वयंवर 👁 Show Answer 4➤ चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ ने आलोचना पर आधारित कौन सा पत्र जयपुर से निकाला ? समालोचक आलोचना समकालीन साहित्य आनंद कादंबिनी ➤ समालोचक ... Read more - [हिन्दी निबंध (MCQ) भाग-2](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-2/): 1➤ इनमें से भारतेंदु हरिश्चंद्र का निबंध कौन सा है ? राजा भोज का सपना एक अद्भुत अपूर्व स्वप्न यमपुर की यात्रा एक अनोखा स्वप्न ➤ एक अद्भुत अपूर्व स्वप्न 👁 Show Answer 2➤ भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाटकों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता कौन सी है ? आत्मव्यंजकता व्यंग्य राष्ट्रीय-सांस्कृतिक जागरण नवीन शैली ➤ राष्ट्रीय-सांस्कृतिक जागरण 👁 Show Answer 3➤ किस आलोचक ने बालकृष्ण भट्ट और प्रतापनारायण मिश्र को हिंदी का ‘स्टील’ और ‘एडीसन’ कहा है ? हजारी प्रसाद द्विवेदी रामचंद्र शुक्ल धीरेंद्र वर्मा रामकुमार वर्मा ➤ रामचंद्र शुक्ल 👁 Show Answer 4➤ ‘धोखा’,‘बात’,और ‘भौं’ निबंधों की रचना किसने की है ... Read more - [Current Affairs - October 2024](https://hindidepartment.com/current-affairs-october-2024/): 1➤ अक्टूबर 2024 में कैबिनेट ने किन भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है ? हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मराठी असमिया, गुजराती, बंगाली, पाली और हिंदी ➤ मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली 👁 Show Answer 2➤ ब्रिटेन ने हिंद महासागर में स्थित चागोस द्वीप को किस देश को सौंपने का फैसला किया है ? India Malaysia Indonesia Mauritius ➤ Mauritius 👁 Show Answer 3➤ World Green Economy Summit – 2024 का आयोजन किस देश में किया गया ? France United Arab Emirates Spain India ➤ ... Read more - [हिन्दी नाटक (MCQ) भाग-4](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a4%95-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-4/): 1➤ हिन्दी नाटकों को किस रचनाकार ने पहली बार साहित्यिक भूमिका प्रदान की ? अंबिकादत्त व्यास भारतेंदु हरिश्चंद्र किशोरीलाल गोस्वामी बालकृष्ण भट्ट ➤ भारतेंदु हरिश्चंद्र 👁 Show Answer 2➤ कथा क्षेत्र में जो स्थान प्रेमचंद का है, वही स्थान नाटक के क्षेत्र में किस साहित्यकार को प्राप्त है ? भारतेंदु हरिश्चंद्र उदयशंकर भट्ट जयशंकर प्रसाद हरिकृष्ण प्रेमी ➤ जयशंकर प्रसाद 👁 Show Answer 3➤ जयशंकर प्रसाद का कौन सा नाटक ‘समस्या नाटक’ के रूप में महत्वपूर्ण है ? राज्यश्री सज्जन प्रायश्चित ध्रुवस्वामिनी ➤ ध्रुवस्वामिनी 👁 Show Answer 4➤ इनमें से किस नाटक में शास्त्रीय नियमों के अनुसार नांदी, विषकंभक, भरतवाक्य ... Read more - [हिन्दी उपन्यास (MCQ) भाग-2](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-2/): 1➤ हिंदी का पहला उपन्यास कौन सा है ? परीक्षा गुरू नूतन ब्रह्मचारी रहस्य कथा त्रिवेणी ➤ परीक्षा गुरू 👁 Show Answer 2➤ ‘परीक्षा गुरू’ से पूर्व प्रकाशित उपन्यास कौन सा है ? निस्सहाय हिंदू भाग्यवती धूर्त रसिकलाल कुसुम लता ➤ भाग्यवती 👁 Show Answer 3➤ देवकीनंदन खत्री का उपन्यास ‘चंद्रकांता’ किस श्रेणी का उपन्यास है ? सामाजिक तिलिस्मी जासूसी रोमानी ➤ तिलिस्मी 👁 Show Answer 4➤ ‘भाग्यवती’ उपन्यास किसकी कृति है ? बालकृष्ण भट्ट शिवप्रसाद ‘सितारे हिंद’ श्रद्धाराम फिल्लौरी भारतेंदु हरिश्चंद्र ➤ श्रद्धाराम फिल्लौरी 👁 Show Answer 5➤ ‘श्यामा स्वप्न’ उपन्यास के लेखक कौन हैं ? लज्जाराम शर्मा जगमोहन ... Read more - [हिन्दी साहित्य प्रश्नोत्तरी (भाग-4)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%a4-3/): 1➤ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार ‘वीरगाथा काल’ की चार साहित्यिक पुस्तकेंं कौन सी हैं ? विजयपाल रासो, हम्मीर रासो, कीर्तिलता, कीर्तिपताका विजयपाल रासो, हम्मीर रासो, खुमान रासो, परमाल रासो पृथ्वीराज रासो, हम्मीर रासो, जय चन्द्र प्रकाश, जयमयंक जस चन्द्रिका पृथ्वीराज रासो, विजयपाल रासो, खुमान रासो, परमाल रासो ➤ विजयपाल रासो, हम्मीर रासो, कीर्तिलता, कीर्तिपताका 👁 Show Answer 2➤ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने अपने इतिहास ग्रन्थ लिखने में किन रचनाओं का सहारा लिया है ? मिश्रबन्धु विनोद, हिन्दी कोविद रत्नमाला, कविता कौमुदी, व्रजमाधुरी सार हिन्दी कोविद रत्नमाला, कविता-कौमुदी, ब्रजमाधुरीसार, हिन्दी साहित्य का आदिकाल मिश्रबन्धु विनोद, शिवसिंह सरोज, भक्तमाल, चौरासी वैष्णव ... Read more - [रीतिकाल (MCQ) भाग-2](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-mcq-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97-2/): 1➤ रीतिकाल को ‘श्रृंगारकाल’ की संज्ञा देनेवाले विद्वान कौन हैं ? रामचंद्र शुक्ल धीरेंद्र वर्मा विश्वनाथ प्रसाद मिश्र मिश्रबंधु ➤ विश्वनाथ प्रसाद मिश्र 👁 Show Answer 2➤ ‘कठिन काव्य का प्रेत’ किस कवि को कहा गया है ? केशव चिंतामणि बोधा ठाकुर ➤ केशव 👁 Show Answer 3➤ “आगे के कवि रीझिहैं तो कविताई न तौ राधिका कन्हाई सुमिरन को बहानो है।” ये पंक्तियाँ किस कवि की हैं ? मतिराम भिखारीदास रसलीन बिहारी ➤ भिखारीदास 👁 Show Answer 4➤ इनमें से कौन सी रचना मतिराम की है ? सुजानचरित कविप्रिया ललितललाम जगद्विनोद ➤ ललितललाम 👁 Show Answer 5➤ “मोहि तौ ... Read more ## Pages - [About us](https://hindidepartment.com/about-us/):   HindiDepartment.com में आपका स्वागत है। हमारी वेबसाइट एक ऐसा डिजिटल मंच है, जिसका उद्धेश्य हिंदी भाषा और साहित्य की समृद्धि, शुद्धता और इसकी व्यापकता को बढ़ावा देना है। इस वेबसाइट को हिंदी प्रेमियों और विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। आज के आधुनिक युग में जहां सूचनाओं की भरमार है, हम आप तक हिंदी भाषा, साहित्य, व्याकरण और समसामयिक विषयों पर सटीक और गुणवत्तापूर्ण सामग्री पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा मानना है कि भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की पहचान है और अगर बात मातृभाषा की हो, तो इसके बिना हम अपनी ... Read more - [निबंध - हिंदी भाषा की उत्पत्ति](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a4/): भूमिका कुछ समय से विचारशील जनों के मन में यह बात आने लगी है कि देश में एक भाषा और एक लिपि होने की बड़ी जरूरत है, और हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि ही इस योग्य है। हमारे मुसलमान भाई इसकी प्रतिकूलता करते हैं। वे विदेशी, फारसी लिपि और विदेशी भाषा के शब्दों से लबालब भरी हुई उर्दू को ही इस योग्य बतलाते हैं। परंतु वे हमसे प्रतिकूलता करते किस बात में नहीं? सामाजिक, धार्मिक, यहाँ तक कि राजनैतिक विषयों में भी उनका हिंदुओं से 36 का संबंध है। भाषा और लिपि के विषय में उनकी दलीलें ऐसी कुतर्कपूर्ण, ऐसी ... Read more - [निबंध - उपन्यास रहस्य](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af/): आजकल हिंदी साहित्य में उपन्यास-नामधारिणी पुस्तकों की भरमार हो रही है। इन पुस्तकों में से प्रायः पचानवे फीसदी पुस्तकें उपन्यास कदापि नहीं और चाहे जो कुछ हों। उपन्यासों और क़िस्से कहानी की पुस्तकों की चाह होने के कारण अधिकारी और अनधिकारी सभी लेखक ‘अव्यापारेषु व्यापारः’ करने में व्यस्त हैं। जो यह भी नहीं जानता कि मानस-शास्त्र भी कोई शास्त्र है, जो यह भी नहीं जानता कि चरित्र-चित्रण किस चिड़िया का नाम है, जिसे इस बात की रत्तीभर भी परवा नहीं उसकी पुस्तक के पाठ से पाठक का चरित्र बिगड़ेगा या बनेगा। वह भी उपन्यास लिख लिखकर नाम नहीं तो दाम ... Read more - [रामचरितमानस 7](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8-7/): श्री गणेशाय नमः श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्रीरामचरितमानस सप्तम सोपान (उत्तरकाण्ड) श्लोककेकीकण्ठाभनीलं सुरवरविलसद्विप्रपादाब्जचिह्नं शोभाढ्यं पीतवस्त्रं सरसिजनयनं सर्वदा सुप्रसन्नम्। पाणौ नाराचचापं कपिनिकरयुतं बन्धुना सेव्यमानं नौमीड्यं जानकीशं रघुवरमनिशं पुष्पकारूढरामम्॥1॥ कोसलेन्द्रपदकञ्जमञ्जुलौ कोमलावजमहेशवन्दितौ। जानकीकरसरोजलालितौ चिन्तकस्य मनभृङ्गसड्गिनौ॥2॥ कुन्दइन्दुदरगौरसुन्दरं अम्बिकापतिमभीष्टसिद्धिदम्। कारुणीककलकञ्जलोचनं नौमि शंकरमनंगमोचनम्॥3॥ दो0-रहा एक दिन अवधि कर अति आरत पुर लोग। जहँ तहँ सोचहिं नारि नर कृस तन राम बियोग॥ चौ0-सगुन होहिं सुंदर सकल मन प्रसन्न सब केर। प्रभु आगवन जनाव जनु नगर रम्य चहुँ फेर॥ कौसल्यादि मातु सब मन अनंद अस होइ। आयउ प्रभु श्री अनुज जुत कहन चहत अब कोइ॥ भरत नयन भुज दच्छिन फरकत बारहिं बार। जानि सगुन मन हरष अति लागे करन बिचार॥ ... Read more - [रामचरितमानस 6](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8-6/): श्री गणेशाय नमः श्री जानकीवल्लभो विजयते श्री रामचरितमानस षष्ठ सोपान (लंका काण्ड) श्लोकरामं कामारिसेव्यं भवभयहरणं कालमत्तेभसिंहं योगीन्द्रं ज्ञानगम्यं गुणनिधिमजितं निर्गुणं निर्विकारम्। मायातीतं सुरेशं खलवधनिरतं ब्रह्मवृन्दैकदेवं वन्दे कन्दावदातं सरसिजनयनं देवमुर्वीशरूपम्॥1॥ शंखेन्द्वाभमतीवसुन्दरतनुं शार्दूलचर्माम्बरं कालव्यालकरालभूषणधरं गंगाशशांकप्रियम्। काशीशं कलिकल्मषौघशमनं कल्याणकल्पद्रुमं नौमीड्यं गिरिजापतिं गुणनिधिं कन्दर्पहं शङ्करम्॥2॥ यो ददाति सतां शम्भुः कैवल्यमपि दुर्लभम्। खलानां दण्डकृद्योऽसौ शङ्करः शं तनोतु मे॥3॥ दो0-लव निमेष परमानु जुग बरष कलप सर चंड। भजसि न मन तेहि राम को कालु जासु कोदंड॥ सो0-सिंधु बचन सुनि राम सचिव बोलि प्रभु अस कहेउ। अब बिलंबु केहि काम करहु सेतु उतरै कटकु॥ सुनहु भानुकुल केतु जामवंत कर जोरि कह। नाथ नाम तव सेतु नर चढ़ि ... Read more - [रामचरितमानस 5](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8-5/): श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान सुन्दरकाण्ड श्लोकशान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम् । रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूड़ामणिम्॥1॥ नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा। भक्तिं प्रयच्छ रघुपुङ्गव निर्भरां मे कामादिदोषरहितं कुरु मानसं च॥2॥ अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥3॥ जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥ तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई। सहि दुख कंद मूल फल खाई॥ जब लगि आवौं सीतहि देखी। होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी॥ यह कहि नाइ सबन्हि कहुँ माथा। चलेउ हरषि हियँ धरि रघुनाथा॥ सिंधु तीर एक भूधर सुंदर। कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर॥ ... Read more - [रामचरितमानस 4](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8-4/): श्रीगणेशाय नमः श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्रीरामचरितमानस चतुर्थ सोपान ( किष्किन्धाकाण्ड) श्लोककुन्देन्दीवरसुन्दरावतिबलौ विज्ञानधामावुभौ शोभाढ्यौ वरधन्विनौ श्रुतिनुतौ गोविप्रवृन्दप्रियौ। मायामानुषरूपिणौ रघुवरौ सद्धर्मवर्मौं हितौ सीतान्वेषणतत्परौ पथिगतौ भक्तिप्रदौ तौ हि नः॥१॥ ब्रह्माम्भोधिसमुद्भवं कलिमलप्रध्वंसनं चाव्ययं श्रीमच्छम्भुमुखेन्दुसुन्दरवरे संशोभितं सर्वदा। संसारामयभेषजं सुखकरं श्रीजानकीजीवनं धन्यास्ते कृतिनः पिबन्ति सततं श्रीरामनामामृतम्॥२॥ सो0-मुक्ति जन्म महि जानि ग्यान खानि अघ हानि कर। जहँ बस संभु भवानि सो कासी सेइअ कस न॥ चौ0-जरत सकल सुर बृंद बिषम गरल जेहिं पान किय। तेहि न भजसि मन मंद को कृपाल संकर सरिस॥ आगें चले बहुरि रघुराया। रिष्यमूक परवत निअराया॥ तहँ रह सचिव सहित सुग्रीवा। आवत देखि अतुल बल सींवा॥ अति सभीत कह सुनु हनुमाना। पुरुष जुगल बल ... Read more - [रामचरितमानस 3](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8-3/): श्री गणेशाय नमः श्री जानकीवल्लभो विजयते श्री रामचरितमानस तृतीय सोपान (अरण्यकाण्ड) श्लोकमूलं धर्मतरोर्विवेकजलधेः पूर्णेन्दुमानन्ददं वैराग्याम्बुजभास्करं ह्यघघनध्वान्तापहं तापहम्। मोहाम्भोधरपूगपाटनविधौ स्वःसम्भवं शङ्करं वन्दे ब्रह्मकुलं कलंकशमनं श्रीरामभूपप्रियम्॥१॥ सान्द्रानन्दपयोदसौभगतनुं पीताम्बरं सुन्दरं पाणौ बाणशरासनं कटिलसत्तूणीरभारं वरम् राजीवायतलोचनं धृतजटाजूटेन संशोभितं सीतालक्ष्मणसंयुतं पथिगतं रामाभिरामं भजे॥२॥ सोरठा- -उमा राम गुन गूढ़ पंडित मुनि पावहिं बिरति। पावहिं मोह बिमूढ़ जे हरि बिमुख न धर्म रति॥ पुर नर भरत प्रीति मैं गाई। मति अनुरूप अनूप सुहाई॥ अब प्रभु चरित सुनहु अति पावन। करत जे बन सुर नर मुनि भावन॥ एक बार चुनि कुसुम सुहाए। निज कर भूषन राम बनाए॥ सीतहि पहिराए प्रभु सादर। बैठे फटिक सिला पर सुंदर॥ सुरपति सुत ... Read more - [रामचरितमानस 2](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8-2/): श्रीगणेशायनमः श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्रीरामचरितमानस द्वितीय सोपान अयोध्या-काण्ड श्लोकयस्याङ्के च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके भाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि व्यालराट्। सोऽयं भूतिविभूषणः सुरवरः सर्वाधिपः सर्वदा शर्वः सर्वगतः शिवः शशिनिभः श्रीशङ्करः पातु माम्॥1॥ प्रसन्नतां या न गताभिषेकतस्तथा न मम्ले वनवासदुःखतः। मुखाम्बुजश्री रघुनन्दनस्य मे सदास्तु सा मञ्जुलमंगलप्रदा॥2॥ नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं सीतासमारोपितवामभागम्। पाणौ महासायकचारुचापं नमामि रामं रघुवंशनाथम्॥3॥ दो0-श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥ जब तें रामु ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए॥ भुवन चारिदस भूधर भारी। सुकृत मेघ बरषहि सुख बारी॥ रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई॥ मनिगन पुर नर ... Read more - [रामचरितमानस 1](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8-1/): ॥श्री गणेशाय नमः ॥ श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्री रामचरित मानस प्रथम सोपान (बालकाण्ड) श्लोक वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥1॥ भवानीशङ्करौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ। याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाःस्वान्तःस्थमीश्वरम्॥2॥ वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शङ्कररूपिणम्। यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते॥3॥ सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ। वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कबीश्वरकपीश्वरौ॥4॥ उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्। सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्॥5॥ यन्मायावशवर्तिं विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरा यत्सत्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः। यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावतां वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्॥6॥ नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद् रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि। स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा- भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति॥7॥ सो0-जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन। करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन॥1॥ मूक होइ बाचाल पंगु चढइ गिरिबर गहन। जासु कृपाँ सो ... Read more - [माधवराव सप्रे की कहानियां](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/) - [एक टोकरी भर मिट्टी (कहानी)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%9f%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/):   किसी श्रीमान ज़मींदार के महल के पास एक गरीब अनाथ विधवा की झोंपड़ी थी। ज़मींदार साहब को अपने महल का हाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। विधवा से बहुतेरा कहा कि अपनी झोंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई जमाने से वहीं बसी थी। उसका प्रिय पति और एकलौता पुत्र भी उसी झोपड़ी में मर गया था। पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एक मात्र आधार थी। जब कभी उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती, तो मारे दुःख के फूट-फूट कर रोने लगती ... Read more - [UGC NET/JRF (Hindi) Syllabus](https://hindidepartment.com/ugc-net-jrf-hindi-syllabus/) - [SS - 2024](https://hindidepartment.com/34%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8/): 34वां सरस्वती सम्मान भारत के प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कारों में से एक, सरस्वती सम्मान का 34वां संस्करण संस्कृत के प्रसिद्ध विद्वान महा महोपाध्याय साधु भद्रेश दास को प्रदान किया गया है। उन्हें यह सम्मान उनकी उत्कृष्ट संस्कृत कृति “स्वामीनारायण सिद्धांत सुधा“ के लिए दिया गया है। महामहोपाध्याय साधु भद्रेशदास स्वामी का परिचय महामहोपाध्याय साधु भद्रेशदास स्वामी एक प्रतिष्ठित संस्कृत विद्वान और बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के संन्यासी हैं। उनका जन्म 12 दिसंबर 1966 को महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुआ था। 14 वर्ष की आयु में, 1981 में, उन्हें उनके गुरु, परम पूज्य प्रपन्न स्वामी महाराज द्वारा संन्यास दीक्षा प्रदान की ... Read more - [Polity](https://hindidepartment.com/polity/) - [आधुनिक काल](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2/) - [उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और उनके कार्यकाल](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4-2/): क्र.स. नाम कार्यकाल 1 गोविंद वल्लभ पंत 26 जनवरी 1950 से 20 मई 1952 2 गोविंद वल्लभ पंत 20 मई 1952 से 27 दिसंबर 1954 3 संपूर्णानंद 28 दिसंबर 1954 से 9 अप्रैल 1957 4 संपूर्णानंद 10 अप्रैल 1957 से 6 दिसंबर 1960 5 चंद्रभानु गुप्ता 7 दिसंबर 1960 से 14 मार्च 1962 6 चंद्रभानु गुप्ता 14 मार्च 1962 से 1 अक्टूबर 1963 7 सुचेता कृपलानी 2 अक्टूबर 1963 से 13 मार्च 1967 8 चंद्रभानु गुप्ता 14 मार्च 1967 से 2 अप्रैल 1967 9 चरण सिंह 3 अप्रैल 1967 से 25 फरवरी 1968 10 राष्ट्रपति शासन 25 फरवरी 1968 से ... Read more - [GPP- 2024](https://hindidepartment.com/59%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%a0-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/): 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार ‘विनोद कुमार शुक्ल’ को 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। वह यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले हिन्दी के 12वें और छत्तीसगढ़ राज्य के पहले लेखक हैं। ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ ट्रस्ट द्वारा दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित पुरस्कार है। इसमें पुरस्कार स्वरूप 11 लाख रूपए, एक प्रशस्ति पत्र और एक वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा दी जाती है। यह पुरस्कार केवल संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं और अंग्रेजी में लिखने वाले भारतीय लेखकों को ही प्रदान किया जाता है। एक बार किसी भाषा को यह पुरस्कार प्राप्त हो जाने ... Read more - [कालक्रमानुसार हिन्दी साहित्य की संस्मरण रचनाएं](https://hindidepartment.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9/): 1905 अनुमोदन का अन्त, अतीत स्मृति (महावीरप्रसाद द्विवेदी) 1907 इंग्लैंड के देहात में महाराज बनारस का कुआं (काशीप्रसाद जायसवाल) 1907 सभा की सभ्यता (महावीरप्रसाद द्विवेदी) 1908 लन्दन का फाग या कुहरा (प्यारेलाल मिश्र) 1909 मेरी नई दुनिया सम्बन्धिनी रामकहानी (भोलदत्त पांडेय) 1911 अमेरिका में आनेवाले विद्यार्थियों की सूचना (जगन्नाथ खन्ना) 1913 मेरी छुट्टियों का प्रथम सप्ताह (जगदीश बिहारी सेठ) 1913 वाशिंगटन महाविद्यालय का संस्थापन दिनोत्सव (पांडुरंग खानखोजे) 1918 इधर-उधर की बातें (रामकुमार खेमका) 1921 कुछ संस्मरण (वृन्दालाल वर्मा, सुधा 1921 में प्रकाशित) 1921 मेरे प्राथमिक जीवन की स्मृतियां (इलाचन्द्र जोशी, सुधा 1921 में प्रकाशित) 1932 मदन मोहन के सम्बन्ध की ... Read more - [Hindi Quiz](https://hindidepartment.com/hindi-quiz/):     - [SAA - 2024](https://hindidepartment.com/saa-2024/): Sahitya Akademi Award 2024 S.No. Language Title and Genre Name of the Author 1 Assamese Pharingbore Bator Katha Jane (Poetry) Sameer Tanti 2 Bodo Swrni Thakhai (Novel) Aron Raja 3 English Spirit Nights (Novel) Easterine Kire 4 Gujarati Bhagwan-ni Vato (Poetry) Dileep Jhaveri 5 Hindi Main Jab Tak Aai Bahar (Poetry) Gagan Gill 6 Kannada Nudigala Alivu (Literary Criticism) K.V. Narayana 7 Kashmiri Psychiatric Ward (Novel) Sohan Koul 8 Konkani Rangtarang (Essays) Mukesh Thali 9 Maithili Prabandh Sangrah (Essays) Mahendra Malangia 10 Malayalam Pingalakeshini (Poetry) K. Jayakumar 11 Manipuri Mainu Bora Nungshi Sheirol (Poetry) Haobam Satyabati Devi 12 Marathi Vindanche ... Read more - [Photo Album](https://hindidepartment.com/photos/) - [Advertise With Us](https://hindidepartment.com/advertise-with-us/) - [देवांगना](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a4%be/): आमुख भाग (1-5) भाग (6-17) भाग (18-31) - [देवांगना](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a4%be-18-31/): 18. अँधेरी रात में  शयन-आरती हो रही थी। मन्दिर में बहुत-से स्त्री-पुरुष एकत्र थे। संगीत-नृत्य हो रहा था। भक्त गण भाव-विभोर होकर नर्तिकाओं की रूप माधुरी का मधुपान कर रहे थे। दिवोदास एक अँधेरे कोने में छिपा खड़ा था। वह सोच रहा था, शयन-विधि समाप्त होते ही मेरा कार्य सिद्ध होगा। कैसी दुःख की बात है कि इन पाखंडियों के लिए मुझे भी छल-कपट करना पड़ रहा है। उसने देखा-दो अपरिचित पुरुष आकर उसके निकट ही छिपकर खड़े हो गये हैं। दिवोदास ने सोचा-ये लोग कौन हैं? और इस प्रकार छिपकर खड़े होने में इनकी क्या दुरभिसन्धि है। वह इतना ... Read more - [देवांगना](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a4%be-6-17/): 6. गुरु-शिष्य  आचार्य का रंग अत्यन्त काला था। डील-डौल के भी वे खूब लम्बे थे पर शरीर उनका कृश था। हड्डियों के ढाँचे पर चमड़ी का खोल मढ़ा था। गोल-गोल आँखें गढ़े में धंसी थीं। गालों पर उभरी हुई हड्डी एक विशेष भयानक आकृति बनाती थी। उनका लोकनाम शबर प्रसिद्ध था। वे भूत-प्रेत-बैतालों के स्वामी कहे जाते थे। मारण-मोहन-उच्चाटन तन्त्र-मन्त्र के वे रहस्यमय ज्ञाता थे। वे नीच कुलोत्पन्न थे। कोई कहता––वे जात के डोम हैं, कोई उन्हें धोबी बताता था। वे प्राय: अटपटी भाषा में बातें किया करते थे। लोग उनसे भय खाते थे। पर उन्हें परम सिद्ध समझकर उनकी ... Read more - [देवांगना](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a4%be-1-5/): 1. समारोह  आजकल जहाँ भागलपुर नगर बसा है, वहाँ ईसा की बारहवीं शताब्दी में विक्रमशिला नाम का समृद्ध नगर था। नगर के साथ ही वहाँ विश्वविश्रुत बौद्ध विद्यापीठ था। विक्रमशिला के नगरसेठ धनंजय का हिमधौत धवल महालय आज विविध रंग की पताकाओं, बन्दनवारों और मांगलिक चिह्नों से सजाया जा रहा था। सिंहद्वार का तोरण फूलों से बनाया गया था। बड़े-बड़े हाथियों-घोड़ों-रथों-पालकियों पर और दूसरे वाहनों पर नगर के धनी-मानी नर-नारी, सेठ-साहूकार और राजवर्गीय पुरुष आज धनंजय सेट्ठि के महालय में आ रहे थे। रंगीन कुत्तक और जड़ाऊ उष्णीष पहिने विनयधर और दण्डधर सोने-चाँदी के दण्ड हाथों में लिए दौड़-दौड़कर समागत ... Read more - [देवांगना](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96/): आमुख  आज से ढाई हज़ार वर्ष पूर्व गौतम बुद्ध ने अपने शिष्यों को ब्रह्मचर्य और सदाचार की शिक्षा देकर—बहुत जनों के हित के लिए, बहुत जनों के सुख के लिए, लोक पर दया करने के लिए, देव-मनुष्यों के प्रयोजन-हित सुख के लिए संसार में विचरण करने का आदेश दिया। वह 44 वर्षों तक, बरसात के तीन मासों को छोड़कर विचरण करते और लोगों को धर्मोपदेश देते रहे। उनका यह विचरण प्रायः सारे उत्तर प्रदेश और सारे बिहार तक ही सीमित था। इससे बाहर वे नहीं गए। परन्तु उनके जीवनकाल में ही उनके शिष्य भारत के अनेक भागों में पहुँच गये ... Read more - [उत्तर प्रदेश की तहसीलें](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%b9%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%82/): हमारे देश में तहसील एक प्रशासनिक ईकाई होती है, एक राज्य कई ज़िलों से मिलकर बना होता है तथा इन ज़िलों में प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक ज़िले को कई तहसीलों में विभाजित किया जाता है। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के सभी 75 ज़िलों में कुल मिलाकर 351 तहसीलें हैं, जिनके नाम निम्नलिखित सूची में दिए गए हैं- (1) शाहजहाँपुर  क्र.स. तहसील का नाम 1 सदर 2 पुवायाँ 3 तिलहर 4 जलालाबाद 5 कलान (2) बरेली क्र.स. तहसील का नाम 1 आंवला 2 बहेड़ी 3 बरेली 4 फरीदपुर 5 मीरगंज 6 नवाबगंज (3) आगरा ... Read more - [आग और धुआं](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%97-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%86%e0%a4%82/): भाग (1-3) भाग (4-8) भाग (9-15) भाग (16-19) - [आग और धुआं](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%97-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%86%e0%a4%82-16-19/): सोलह  भारत के हृदय में अवध स्थित है। भारत में अंग्रेजों के आगमन के समय भी इस भूमि में अनेक उपयोगी आकर्षण थे। इस भूमि को देखकर अंग्रेजों ने इसे विपुल जलभूमि, ऊँचे-ऊँचे बाँस के जंगलों से लहराते हुए शोभायमान दृश्य, आम्रवृक्षों की घनी शीतल छाया और हरी-भरी फसलों से लहलहाती हुई शस्य श्यामला अत्यन्त वैभवशाली और मनोरम बताया था। इमली के वृक्षों की घनी छाया से, नारंगियों की सुगन्ध से, अंजीरों के मनोहारी रंगों से और पुष्प रेणुओं से सर्वत्र महकती हुई मधुर सुगन्ध से इस प्रकृत सुन्दर भूमि के वैभव में चार चाँद लग गए थे। दिल्ली इस्लाम ... Read more - [आग और धुआं](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%97-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%86%e0%a4%82-9-15/): नौ  ई० 1754 में इंगलैण्ड और फ्रांस में राजनैतिक स्थितियाँ विभिन्न थीं। जबकि इंगलैण्ड सम्पूर्ण रूप से भारत की ओर समय-समय पर उचित सहायता भेजता रहा, तब फ्रांस अपने आन्तरिक झगड़ों में फंसा रहा। इंगलैण्ड के राज्य-परिवार में कभी पारिवारिक झगड़े उत्पन्न नहीं हुए, परन्तु फ्रांस का राज्य-परिवार आन्तरिक झगड़ों में फंसा रहा। त्रिचनापली के युद्ध में हार होने के बाद डूप्ले को फ्रांस बुला लिया गया। फ्रांस और अंग्रेजों ने परस्पर में सन्धि कर ली परन्तु अंग्रेज कब सन्धियों का पालन करते थे। 18वीं शताब्दी के मध्य में फ्रांस का राज्य वंश अपनी भोगलिप्सा में डूबकर राजकोश को ऐश्वर्य ... Read more - [आग और धुआं](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%97-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%86%e0%a4%82-4-8/): चार  मीरजाफर नवाब हुआ और धूर्त स्क्वेफन उसका एजेण्ट बनकर दरबार में विराजा। वारेन हेस्टिग्स उसका सहायक बनाया गया। कुछ दिन बाद जब स्क्वेफन कौंसिल में सभ्य नियत हुआ-तब, उक्त गौरव का पद वारेन हेस्टिग्स को मिला। यह पद बड़ी जिम्मेदारी का था। एजेण्ट के ऊपर दो बातों की कठिन जिम्मेदारियाँ थीं-एक यह कि कम्पनी की आय और उसके स्वार्थ में विघ्न न पड़े। दूसरे, नवाव कहीं सिर उठाकर सबल न हो जाय। नवाब यदि वेश्याओं और शराब में अधिकाधिक गहराई में लिप्त हो, तो एजेण्ट को कुछ चिन्ता न थी। उनकी चिन्ता का विषय सिर्फ यह था कि कहीं ... Read more - [आग और धुआं](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%97-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%86%e0%a4%82-1-3/): एक  इंगलैंड में आक्सफोर्डशायर के अन्तर्गत चर्चिल नामक स्थान में सन् 1732 ईस्वी की 6 दिसम्बर को एक ग्रामीण गिर्जाघर वाले पादरी के घर में एक ऐसे बालक ने जन्म लिया जिसने आगे चलकर भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना का महत्त्वपूर्ण कार्य किया। इस बालक का नाम वारेन हेस्टिंग्स पड़ा। बालक के पिता पिनासटन यद्यपि पादरी थे, परन्तु उन्होंने हैस्टर वाटिन नामक एक कोमलांगी कन्या से प्रेम-प्रसंग में विवाह कर लिया। उससे उन्हें दो पुत्र प्राप्त हुए। दूसरे प्रसव के बाद बीमार होने पर उसकी मृत्यु हो गई। पिनासटन दोनों पुत्रों को अपने पिता की देख-रेख में छोड़कर वहां ... Read more - [उत्तर प्रदेश के मंडल](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%b2/): प्रत्येक राज्य अलग-अलग ज़िलों में विभाजित होता है। इन ज़िलों में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई ज़िलों को जोड़कर एक जोन बनाया जाता है, जिन्हें हम मंडल कहते हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में कुल 18 मंडल हैं। जिनके नाम निम्नलिखित सूची में दिए गए हैं- क्र.स. मंडल का नाम 1 सहारनपुर 2 मुरादाबाद 3 बरेली 4 लखनऊ 5 देवीपाटन 6 बस्ती 7 गोरखपुर 8 मेरठ 9 अलीगढ़ 10 आगरा 11 कानपुर 12 अयोध्या 13 आजमगढ़ 14 झांसी 15 चित्रकूट 16 प्रयागराज 17 वाराणसी 18 मिर्ज़ापुर   इन मंडलों के अंतर्गत आने वाले ज़िले ... Read more - [उत्तर प्रदेश के ज़िले](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%87/): वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश राज्य में 75 ज़िले हैं, जिनकी सूची निम्नलिखित है- क्र.स. ज़िला का नाम 1 आगरा 2 अलीगढ़ 3 प्रयागराज 4 अम्बेडकर नगर 5 अमेठी 6 अमरोहा 7 औरैया 8 आजमगढ़ 9 बदायूँ 10 बागपत 11 बहराइच 12 बलिया 13 बलरामपुर 14 बाँदा 15 बाराबंकी 16 बरेली 17 बस्ती 18 बिजनौर 19 बुलंदशहर 20 चंदौली 21 चित्रकूट 22 देवरिया 23 एटा 24 इटावा 25 अयोध्या 26 फ़र्रूख़ाबाद 27 फतेहपुर 28 फ़िरोजाबाद 29 गौतमबुद्ध नगर 30 गाजियाबाद 31 ग़ाज़ीपुर 32 गोंडा 33 गोरखपुर 34 हमीरपुर 35 हापुड़ 36 हरदोई 37 हाथरस 38 जालौन 39 जौनपुर 40 झाँसी ... Read more - [कहानी - हल्दी घाटी](https://hindidepartment.com/%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a5%80/): वर्षा ऋतु थी, लेकिन पानी नहीं बरसता था। हवा बन्द थी। बहुत गर्मी और उमस थी। एक पहर दिन चढ़ चुका था। कभी-कभी धूप चमक जाती थी। आकाश में बादल छाये हुए थे। अरावली की पहाड़ियों में, हल्दी घाटी की दाहिनी ओर एक ऊँची चोटी पर, दो आदमी जल्दी-जल्दी अपने शरीर पर हथियार सजा रहे थे। एक आदमी बलिष्ठ शरीर, लम्बे कद, चौड़ी छाती वाला था। उसकी घनी और काली मूंछें ऊपर को चढ़ी हुई थीं और आँखें सुर्ख अंगारे की तरह दहक रही थीं। वह सिर से पैर तक फौलादी जिरह-बख्तर से सजा हुआ था। इस आदमी की उम्र ... Read more - [कहानी - राजपूतनी की राख](https://hindidepartment.com/%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%96/): (चित्तौड़ की अद्वितीया सुन्दरी रानी पद्मिनी ने अपनी आन निभाने को चौदह सहस्र क्षत्राणियों के साथ चितारोहण कर जौहर करके साखा रचा था। उसके रूप के लोभी क्रूर सुलतान अलाउद्दीन ने रक्तरंजित तलवार लेकर जब रंगमहलों में प्रवेश किया, तो उसे राजपूतनी की राख ही मिली थी। यहां उसी घटना की एक रूपरेखा चित्रित की गई है।) ‘रणथम्भोर का दुर्जय दुर्ग उस दैत्य ने विजय कर लिया। सामन्त हम्मीर ने। एक वर्ष • वीरता युद्ध किया और अन्त में वीरगति को प्राप्त हुआ। वहां एक भी मर्द बच्चा जीवित नहीं है। लोथें गली-कूचों में सड़ रही हैं। चौबीस हज़ार स्त्रियों ... Read more - [आचार्य चतुरसेन शास्त्री की कहानियां](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-2/) - [Uttar Pradesh GK](https://hindidepartment.com/uttar-pradesh-gk-2/):   - [उत्तर प्रदेश : Quiz](https://hindidepartment.com/up-quiz/): क्र.स. विषय 1 सामान्य परिचय 2 प्राचीन इतिहास 3 मध्यकालीन इतिहास 4 आधुनिक इतिहास 5 भौतिक विभाजन 6 जलवायु 7 मृदा 8 नदियां 9 नदी घाटी परियोजनाएं 10 ऊर्जा संसाधन 11 खनिज 12 कृषि 13 नेशनल पार्क या अभ्यारण्य 14 वन 15 राजनैतिक परिदृश्य 16 प्रशासनिक परिदृश्य 17 पंचायती राज 18 कल्याणकारी योजनाएं 19 उद्योग - [उत्तर प्रदेश का राजनैतिक परिदृश्य](https://hindidepartment.com/up-politics/): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और उनके कार्यकाल उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और उनके कार्यकाल उत्तर प्रदेश के राज्यसभा सदस्य उत्तर प्रदेश के लोकसभा सदस्य उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ध्यान दें : यहां पर दी गई सभी जानकारियां शिक्षण उपयोग हेतु प्रस्तुत की गई हैं। - [आचार्य चतुरसेन शास्त्री के उपन्यास](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80/) - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81-14/): प्रवचन प्रवेश भाग (1-3) भाग (4-12) भाग (13-20) भाग (21-35) भाग (36-50) भाग (51-62) भाग (63-80) भाग (81-100) भाग (101-120) भाग (121-140) भाग (141-156)   - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81-13/):  141. मागध मंत्रणा  सेनापति भद्रिक और सम्राट ने स्कन्धावार राजगृह के मन्त्रणागार में युद्ध- मन्त्रणा की । मन्त्रणा में सम्राट, महासेनापति आर्य भद्रिक , सेनापति उदायि , सेनापति सोमप्रभ और अमात्य सुनीथ उपस्थित थे। उनके अतिरिक्त अपनी – अपनी सेना लेकर आए हुए सहायक राजा और राज – सेनापति भी उपस्थित थे, जिनमें बंग के वैश्रमणदत्त , कलिंग के वीरकृष्ण मित्र , अवन्ती के श्रीकान्त , भोज के समुद्रपाल , आन्ध्र के सामन्त भद्र, माहिष्मती के सुगुप्त , भृगुकच्छ के सुदर्शन और प्रतिष्ठान के सुवर्णबल – ये आठ मित्र महासेनापति सम्मिलित थे। युद्ध के सम्बन्ध में सब अंगों पर प्रकाश ... Read more - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81-12/):  121 . अप्रत्याशित  महारासायनिक कीमियागर गौड़पाद जिस समय देश -विदेश के वट्कों को रसायन के गुह्य – गहन तत्त्व समझा रहे थे और अजर – अमर होने के मूल सिद्धान्तों की गूढ़ व्याख्या कर रहे थे, तभी उन्हें हठात् एक अप्रत्याशित कण्ठ -स्वर सुनाई दिया । शताब्दियों पूर्व श्रुत -विश्रुत अप्रत्याशित कण्ठ – स्वर सुनकर आचार्य गौड़पाद चमत्कृत हुए । उन्होंने आंख उठाकर देखा कि सेट्ठिपुत्र पुण्डरीक भद्रवसन धारण किए सम्मुख खड़ा मुस्करा रहा है । आचार्य के दृष्टि -निक्षेप करते ही सेट्टिपुत्र की आंखों से एक विद्युत्प्रभा निकल आचार्य को आन्दोलित कर गई। उन्हें फिर वही अप्रत्याशित, शताब्दियों पूर्व ... Read more - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81-11/):  101. विदा  सात दिन के अनवरत प्रयत्न से चित्र बनकर तैयार हो गया । इसके लिए अम्बपाली को प्रत्येक भाव -विभाव के लिए अनेक बार नृत्य करना पड़ा। जो चित्र सम्पूर्ण हुआ वह साधारण चित्र न था , वह मूर्तिमती कला थी । देवी अम्बपाली की अलौकिक शरीर – छटा और कला का विस्तार ही उस चित्र में न था , उसमें अम्बपाली की असाधारण संस्कृत आत्मा तक प्रतिबिम्बित थी । वह चित्र वास्तव में सम्पूर्ण रीति पर आंखों से नहीं देखा जा सकता था । उसे देखने के लिए दिव्य भावुकता की आवश्यकता थी । चित्र को देखकर अम्बपाली ... Read more - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81-10/):  81 . नाउन  नगर के प्रान्त – भाग में एक नाउन का घर था । घर कच्ची मिट्टी का था परन्तु इसकी स्वच्छता दिव्य और आकर्षक थी । नाउन घर में अकेली रहती थी । यौवन उसका चलाचली पर था , परन्तु उसकी देहयष्टि अति मोहक , आकर्षक और कमनीय थी । उसकी आंखें चमकदार थीं , परन्तु उनके चारों ओर किनारों पर फैली स्याही की रेखाएं नाउन के चिर विषाद को प्रकट कर देती थीं । उसका हास्य शीतकाल की दुपहरी की भांति सुखद था । वह श्याम लता के समान कोमलांगी तथा आकर्षक थी । नृत्य , गान ... Read more - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81-9/):  63. राजपुत्र विदूडभ  राजकुमार विदूडभ ने आचार्य के निकट आ अभिवादन कर आसन पर बैठकर कहा – “ आपने मुझे स्मरण किया था आचार्य ? ” “ तुम्हारा कल्याण हो राजकुमार! मुझे भासता है कि तुम्हें मेरी आवश्यकता है। ” “ किसलिए आचार्य ? ” “ अपने गुरुतर उद्देश्य की पूर्ति के लिए। ” “ आप किस संदर्भ का संकेत कर रहे हैं आचार्य ? ” “ तो क्या तुम मेरा संकेत समझे नहीं , कुमार ? ” “ आचार्य कुछ कहें तो । ” “ अरे , श्रावस्ती में कितना अनर्थ हो रहा है आयुष्मान् ? ” “ कैसा ... Read more - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81-8/):  51. वर्षकार का यन्त्र  सम्राट् ने राजधानी में लौटकर देखा, अवन्तिपति चण्डमहासेन प्रद्योत ने राजगृह को चारों ओर से घेर लिया था। नगर का वातावरण अत्यन्त क्षुब्ध था। सम्राट् थकित और अस्त-व्यस्त थे। राजधानी में महामात्य उपस्थित नहीं थे, न सेनापति चण्डभद्रिक ही थे। सेना की व्यवस्था भी ठीक न थी। चंपा में फैली हुई सैन्य लौटी न थी और सेना का श्रेष्ठ भाग श्रावस्ती में बिखर गया था। सम्राट् ने तुरन्त उपसेनापति उदायि को बुलाकर परामर्श किया। सम्राट ने कहा— “भणे सेनापति, यह तो विपत्ति-ही-विपत्ति चारों ओर दीख रही है। मालवपति ने राजगृह को घेरा है, हम विपन्नावस्था में ... Read more - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81-7/):  36. गुप्त पत्र  सेनापति भद्रिक बड़ी देर तक शून्य अर्धरात्रि में अकेले चिन्तित भाव से पट-द्वार में इधर-उधर टहलते रहे। उस समय उनके मस्तिष्क में कुछ परस्पर-विरोधी ऐसे विचार चक्कर लगा रहे थे, जिनका उन्हें निराकरण नहीं मिल रहा था। उन्होंने बहुत देर तक कुछ सोचकर दीपक ठीक किया और आसन पर आ भोजपत्र निकाल लेखनी हाथ में ली। इसी समय किसी के पद-शब्द से चौंककर उन्होंने पीछे मुड़कर देखा। सोम को देखकर उन्होंने आश्वस्त होकर कहा— “तुम सोम, इस असमय में?” “आर्य, एक चर है, राजगृह से पत्र लाया है।” “पत्र क्या सम्राट् का है।” “नहीं आर्य, सेनापति उदायि ... Read more - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81-6/):  21. कोसलेश प्रसेनजित्  महाराज प्रसेनजित् कोमल गद्दे पर बैठे थे। दो यवनी दासियां पीछे खड़ी चंवर ढल रही थीं, उनका शरीर अत्यन्त गौरवर्ण था। आयु पैंसठ से भी अधिक हो गई थी। उनके खिचड़ी बाल बीच में चीरकर द्विफालबद्ध किए गए थे। बड़ी-बड़ी मूंछे यत्न से संवारी गई थीं और वे कान तक फैल रही थीं। वे कोमल फूलदार कौशेय पहने थे और कण्ठ, भुजा और मणिबंध पर बहुमूल्य रत्नाभरण पहने थे। इस समय उनका मन प्रसन्न नहीं था, वे कुछ उद्विग्न-से बैठे थे। कंचुकी ने राजपुत्र विदूडभ के आने की सूचना दी। महाराज ने संकेत से आने को कहा। ... Read more - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81-5/):  13. बन्दी की मुक्ति  बहुत देर तक राजगृह का वह अद्भुत वैज्ञानिक उस एकान्त भयानक कुञ्ज में चुपचाप अकेला टहलता रहा। वह होंठों-ही-होंठों में गुनगुना रहा था। कभी-कभी उसके हाथों की मुट्ठियां बंध जातीं और वह बहुत उत्तेजित हो जाता। सम्भवतः वह अतीत की अति कटु और वेदनापूर्ण स्मृतियों को विस्मृत करने की चेष्टा कर रहा था। थोड़ी देर में वह शान्त होकर एक व्याघ्र-चर्म पर बैठ गया। बहुत देर तक वह ध्यानस्थ वहीं बैठा रहा। फिर वह उठा, कक्ष का द्वार सावधानी से बन्द करके वह उसी अन्धकारपूर्ण गर्भगृह में टेढ़ी तिरछी सुरंगों में चलता रहा, एक जलती हुई ... Read more - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81-4/): 4. मंगलपुष्करिणी अभिषेक  वैशाली की मंगलपुष्करिणी का अभिषेक वैशाली जनपद का सबसे बड़ा सम्मान था। इस पुष्करिणी में स्नान करने का जीवन में एक बार सिर्फ उसी लिच्छवि को अधिकार मिलता था, जो गणसंस्था का सदस्य निर्वाचित किया जाता था। उस समय बड़ा उत्सव समारोह होता था और उस दिन गण नक्षत्र मनाया जाता था। यह पुष्करिणी उस समय बनाई गई थी जब वैशाली प्रथम बार बसाई गई थी। उसमें लिच्छवियों के उन पूर्वजों के शरीर की पूत गन्ध होने की कल्पना की गई थी, जिन्हें आर्यों ने व्रात्य करके बहिष्कृत कर दिया था और जिन्होंने अपने भुजबल से अष्टकुल ... Read more - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81-3/): 1. धिक्कृत कानून  उस दिन वैशाली में बड़ी उत्तेजना फैली थी। सूर्योदय के साथ ही ठठ के ठठ नागरिक संथागार की ओर जा रहे थे। संथागार की ओर जानेवाला राजमार्ग मनुष्यों से भरा हुआ था। पैदल, अश्वारोही, रथों और पालकियों पर सवार सभी प्रकार के पुरुष थे। उनमें नगरसेट्ठि, श्रेणिक और सामन्तपुत्र भी थे। संथागार का प्रांगण विविध वाहनों, मनुष्यों और उनके कोलाहल से परिपूर्ण था। बहुत-से नागरिक और सेट्ठिपुत्र संथागार की स्वच्छ संगमरमर की सीढ़ियों पर बैठे थे। बहुत-से खुले मैदान में अपने-अपने वाहनों को थामे उत्सुकता से भवन की ओर देख रहे थे। अनेक सामन्तपुत्र अपने-अपने शस्त्र चमकाकर ... Read more - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81-2/): प्रवेश  1 मुजफ्फरपुर से पश्चिम की ओर जो पक्की सड़क जाती है—उस पर मुजफ्फरपुर से लगभग अठारह मील दूर ‘वैसौढ़’ नामक एक बिलकुल छोटा-सा गांव है। उसमें अब तीस-चालीस घर भूमिहार ब्राह्मणों के-और कुछ गिनती के घर क्षत्रियों के बच रहे हैं। गांव के चारों ओर कोसों तक खण्डहर, टीले और पुरानी टूटी-फूटी मूर्तियां ढेर-की-ढेर मिलती हैं, जो इस बात की याद दिलाती हैं कि कभी यहां कोई बड़ा भारी समृद्ध नगर बसा रहा होगा। वास्तव में वहां, अब से कोई ढाई हज़ार वर्ष पूर्व एक विशाल नगर बसा था। आजकल जिसे गण्डक कहते हैं, उन दिनों उसका नाम ‘सिही’ ... Read more - [वैशाली की नगरवधू](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a5%81/):  प्रवचन अपने जीवन के पूर्वाह्न में—सन् 1909 में, जब भाग्य रुपयों से भरी थैलियां मेरे हाथों में पकड़ाना चाहता था—मैंने कलम पकड़ी। इस बात को आज 40 वर्ष बीत रहे हैं। इस बीच मैंने छोटी- बड़ी लगभग 84 पुस्तकें विविध विषयों पर लिखीं, अथच दस हज़ार से अधिक पृष्ठ विविध सामयिक पत्रिकाओं में लिखे। इस साहित्य-साधना से मैंने पाया कुछ भी नहीं, खोया बहुत-कुछ, कहना चाहिए, सब कुछ–धन, वैभव, आराम और शान्ति। इतना ही नहीं, यौवन और सम्मान भी। इतना मूल्य चुकाकर निरन्तर चालीस वर्षों की अर्जित अपनी सम्पूर्ण साहित्य-सम्पदा को मैं आज प्रसन्नता से रद्द करता हूं; और यह ... Read more - [संविधान सभा का गठन](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%a0%e0%a4%a8/): संविधान क्या है ? व्यक्ति जन्मजात रूप से स्वभाव में नकारात्मक होता है, अर्थात वह किसी भी कार्य को अपनी इच्छा के अनुरूप करना चाहता है तथा वह दूसरे की सुविधाओं तथा असुविधाओं को ध्यान में नहीं रखता है। अतः उसे नियंत्रित करने के लिए कुछ निश्चित नियम बनाए जाते हैं। इन्हीं नियमों के दस्तावेज को संविधान कहा जाता है। संविधान लिखित तथा अलिखित दोनों हो सकते हैं। जैसे- अमेरिका तथा भारत का संविधान एक लिखित संविधान है, जबकि ब्रिटेन का संविधान अलिखित संविधान है। कैबिनेट मिशन (1946) भारत में राजनैतिक संकट को दूर करने के लिए द्वितीय विश्व युद्ध ... Read more - [उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री](https://hindidepartment.com/3844-2/): ये मंत्री कैबिनेट और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के अधीन कार्य करते हैं। वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार में इनकी संख्या 20 है। इन सभी के नाम और इनके विभाग निम्न सूची में दिए गए हैं। क्र.स. मंत्री विभाग 1 श्री मयंकेश्वर शरण सिंह संसदीय कार्य, चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा मातृ एवं शिशु कल्याण 2 श्री दिनेश खटीक जल शक्ति 3 श्री संजीव गोंड समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण 4 श्री बलदेव सिंह ओलख कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान 5 श्री अजीत पाल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी 6 श्री जसवन्त सिंह ... Read more - [उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be/): इन मंत्रियों के पास अपना एक स्वतंत्र विभाग तो होता है लेकिन ये मुख्यमंत्री की नीति निर्माण प्रक्रिया में शामिल नहीं होते हैं। वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार में इनकी संख्या 14 है। जिनके नाम और विभाग निम्न सूची में दिए गए हैं। क्र.स. मंत्री विभाग 1 श्री नितिन अग्रवाल आबकारी एवं मद्य निषेध 2 श्री कपिल देव अग्रवाल व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास 3 श्री रवीन्द्र जायसवाल स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन 4 श्री सन्दीप सिंह बेसिक शिक्षा 5 श्रीमती गुलाब देवी माध्यमिक शिक्षा 6 श्री गिरीश चन्द्र यादव खेल एवं युवा कल्याण 7 श्री धर्मवीर प्रजापति होमगार्ड्स, नागरिक ... Read more - [उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%88/): यह ऐसे मंत्रियों का समूह होता है, जिन्हें मुख्यमंत्री अपने नीति निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करता है। वह इन्हीं के सहयोग से अपने सभी फैसले लेता है। वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार में इनकी संख्या 21 है। ये सभी मंत्री और इनके विभाग निम्न सूची में दिए गए हैं। क्र.स. मंत्री विभाग 1 योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री) नियुक्ति, कार्मिक, गृह, सतर्कता, आवास एवं शहरी नियोजन, राजस्व, खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, भूतत्व एवं खनिकर्म, अर्थ एवं संख्या, राज्य कर एवं निबन्धन, सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, गोपन, सूचना, निर्वाचन, संस्थागत वित्त, नियोजन, राज्य सम्पत्ति, उ0प्र0 पुनर्गठन समन्वय, ... Read more - [राज्य मंत्रिपरिषद](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a4%a6/): राज्य मंत्रिपरिषद क्या है ? ●संविधान के अनुच्छेद-163 में राज्य मंत्रिपरिषद से संबंधित प्रावधान किया गया है। जिसमें कहा गया है कि राज्यपाल को उसके कार्यों में सहायता देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी। ● अनुच्छेद-164 में यह प्रावधान किया गया है कि राज्यपाल विधानसभा में बहुमत दल के नेता को मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त करेगा तथा मुख्यमंत्री की सलाह पर वह अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करेगा। ●केन्द्रीय मंत्रिपरिषद की तरह राज्य मंत्रिपरिषद में भी कुल 3 प्रकार के मंत्री होते हैं- 1. कैबिनेट मंत्री 2. राज्य मंत्री 3. राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ● इसके अलावा हमें इसमें उपमंत्री ... Read more - [उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री 2](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4/): योगी आदित्यनाथ माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश जीवन परिचय पिता का नाम स्वर्गीय महंत अवैद्यनाथ जी महाराज जन्‍म तिथि 05 जून, 1972 जन्‍म स्थान पंचुर, जिला- गढ़वाल (उत्‍तराखण्‍ड) धर्म हिन्दू शिक्षा विज्ञान स्‍नातक, हेमवती नन्‍दन बहुगुणा गढ़वाल विश्‍वविद्यालय, श्रीनगर, उत्‍तराखण्‍ड व्‍यवसाय धार्मिक मिशनरी, सामाजिक कार्यकर्ता वर्तमान पता 5, कालीदास मार्ग, लखनऊ, उत्तर प्रदेश स्थायी पता 361, पुराना गोरखपुर, गोरखनाथ मन्दिर, गोरखपुर, उत्‍तर प्रदेश राजनीतिक कैरियर 1998 12वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित (पहली बार) सदस्य, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और सार्वजनिक वितरण संबंधी स्थायी समिति और चीनी एवं खाद्य तेल वितरण विभाग संबंधी इसकी उप-समिति-बी के सदस्य, गृह मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के ... Read more - [उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और उनके कार्यकाल](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%aa/): क्र.स. नाम कार्यकाल 1 श्रीमती सरोजनी नायडू 15-08-1947 से 02-03-1949 2 श्री विधुभूषण मलिक (कार्यकारी) 03-03-1949 से 01-05-1949 3 श्री हारमसजी पेरोशा मोदी 02-05-1949 से 01-06-1952 4 श्री कैन्‍हैयालाल माणिकलाल मुंशी 02-06-1952 से 09-06-1957 5 श्री वराहगिरी व्‍यंकट गिरी 10-06-1957 से 30-06-1960 6 डा0 बूरूगुल रामकृष्‍ण राव 01-07-1960 से 15-04-1962 7 श्री विश्‍वनाथ दास 16-04-1962 से 30-04-1967 8 डा0 बेजवाडा गोपाल रेडडी 01-05-1967 से 30-06-1972 9 श्री शशिकान्‍त वर्मा (कार्यकारी) 01-07-1972 से 13-11-1972 10 श्री अकबर अली खॉ 04-11-1972 से 24-10-1974 11 डा0 मर्रि चेन्‍ना रेडडी 25-10-1974 से 01-10-1977 12 श्री गणपतराव देवजी तपासे 02-10-1977 से 28-02-1980 13 श्री चन्‍द्रेश्‍वर ... Read more - [मुख्यमंत्री](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80/): सामान्य परिचय ● संसदीय शासन प्रणाली में केन्द्र में जो स्थिति प्रधानमंत्री की होती है। राज्यों में वही स्थिति मुख्यमंत्री की होती है। जिस प्रकार से राष्ट्रपति राष्ट्र का प्रमुख होता है किन्तु वास्तविक कार्यकारी शक्ति प्रधानमंत्री में निहित होती है। उसी प्रकार से राज्य का प्रमुख राज्यपाल होता है, किन्तु वास्तविक शक्ति मुख्यमंत्री में निहित होती है। ● संविधान के अनुच्छेद-163 में एक मंत्रिपरिषद के गठन का प्रावधान किया गया है। जिसका प्रमुख मुख्यमंत्री होता है। ● अनुच्छेद-164 में यह कहा गया है कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा की जाएगी तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की ... Read more - [उत्तर प्रदेश की राज्यपाल](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b0/): श्रीमती आनंदीबेन पटेल माननीया राज्यपाल, उत्तर प्रदेश जीवन परिचय नाम श्रीमती आनंदीबेन मफतभाई पटेल जन्म तिथि 21 नवंबर, 1941 जन्‍म स्‍थान खरोद, विजापुर तालुका, जिला मेहसाणा। शैक्षणिक योग्यता एमएससी, एमएड (गोल्ड मेडलिस्ट)। व्यवसाय सेवानिवृत्त प्राचार्य (मोहिनाबा गर्ल्‍स हाई स्कूल, अहमदाबाद) एवं समाज-सेवा। साहित्यिक गतिविधियाँ समय-समय पर ‘धरती’, ‘साधना’ एवं ‘सखी’ पत्रिकाओं के लिये लेख लिखती रही। स्‍थायी पता ‘धरम’, शान बंगलोस के पास, शिलज अहमदाबाद। वर्तमान पता राजभवन, उत्तर प्रदेश, लखनऊ । राजनीतिक कैरियर • राज्य सभा सदस्य, वर्ष 1994-1998 । • वर्ष 1998 मांडल विधानसभा क्षेत्र जिला अहमदाबाद से चुनकर विधायक बनी। वर्ष 1998 से 2002 शिक्षा (प्रारंभिक, माध्यमिक, वयस्क) ... Read more - [राज्यपाल](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2/): सामान्य परिचय राज्यपाल के पद का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद-153 में किया गया है। राज्य में राज्यपालों की वही स्थिति होती है, जो केन्द्र में राष्ट्रपति की होती है। जिस प्रकार से राष्टपति की शक्तियां होती हैं, उसी प्रकार से राज्यपाल राज्य की कार्यपालिका शक्ति का प्रधान होता है किन्तु वास्तविक शक्तियां मुख्यमंत्री के पास होती हैं। अनुच्छेद-155 के तहत राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है। अनुच्छेद 154 (1) में यह कहा गया है कि राज्य की समस्त कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी तथा राज्यपाल इन शक्तियों का प्रयोग स्वयं या अपने अधिनस्थों के माध्यम से ... Read more - [उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a4%a6/): ’उत्तर प्रदेश विधान परिषद’ राज्य के द्विसदनीय विधायिका का ऊपरी सदन है। यह एक स्थायी सदन है और इसमें कुल 100 सदस्यों का प्रावधान किया गया है, लेकिन वर्तमान में इसका 1 पद रिक्त है, अतः इनकी संख्या 99 है। इन सभी सदस्यों के नाम  निम्न सूची में दिए गए हैं- क्र.स. सदस्य का नाम दल 1 कुँवर मानवेन्‍द्र सिंह‍ BJP 2 केशव प्रसाद मौर्या BJP 3 स्‍वतन्‍त्र देव सिंह BJP 4 भूपेन्‍द्र सिंह BJP 5 देवेन्‍द्र प्रताप सिंह BJP 6 अरूण पाठक BJP 7 डा0 जयपाल सिंह BJP 8 इंजी0 अवनीश कुमार सिंह BJP 9 डा0 मानवेन्‍द्र प्रताप सिंह ... Read more - [विधान परिषद](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a4%a6/): विधान परिषद क्या है ? विधान परिषद के गठन एवं उत्सादन से संबंधित प्रावधान अनुच्छेद-169 में वर्णित किए गए हैं। यदि किसी राज्य की विधानसभा 2/3 बहुमत से विधान परिषद के गठन या उत्सादन से संबंधित प्रस्ताव पारित कर दे तो यह प्रस्ताव या संकल्प संसद को भेज दिया जाता है। यदि संसद इसे साधारण बहुमत से भी पारित कर दे, तब भी उस राज्य में विधान परिषद का गठन या उत्सादन हो जाएगा। वर्तमान में भारत के 6 राज्यों में विधान परिषद का प्रावधान किया गया है। ये 6 राज्य हैं – 1. बिहार 2. उत्तर प्रदेश 3. कर्नाटक ... Read more - [उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87/): उत्तर प्रदेश विधान सभा में कुल 403 सीटों का प्रावधान किया गया है। इन सभी सीटों पर चुने गए सदस्यों के नाम और उनके निर्वाचन क्षेत्र को निम्न सूची में देख सकते हैं।   - [विधान सभा](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be/): विधान सभा क्या है ? विधान सभा की राज्य में वही स्थिति है जो केन्द्र में लोकसभा की होती है। इसे राज्य में लोकप्रिय सदन कहा जाता है, जहां सदस्यों का चुनाव सीधे आम जनता के द्वारा किया जाता है। अनुच्छेद-170 में यह प्रावधान है कि किसी भी राज्य की विधान सभा में न्यूनतम 60 सदस्य, जबकि अधिकतम 500 सदस्य हो सकते हैं। यद्यपि कुछ राज्य भारत में ऐसे भी हैं, जिनमें 60 सदस्यों से कम की विधान सभा है। इनमें गोवा, सिक्किम, मिजोरम तथा पुडुचेरी शामिल हैं। 84 वें संविधान संशोधन अधिनियम 2001 के द्वारा यह प्रावधान किया गया ... Read more - [राज्य मंत्री](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80/): ये मंत्री कैबिनेट के अधीन होते हैं। इनके पास वही कार्य होता है, जो कैबिनेट मिनिस्टर के द्वारा इन्हें सौंपा जाता है। वर्तमान भारत सरकार में इनकी संख्या 41 है, जिनके नाम और मंत्रालय निम्नलिखित सूची में दिए गए हैं- क्र.स. मंत्री का नाम मंत्रालय 1 श्री राव इन्द्रजीत सिंह ◆ संस्‍कृति मंत्रालय 2 डॉ. जितेंद्र सिंह ◆ Prime Minister’s Office ◆ कार्मिक, जनशिकायत एवं पेंशन मंत्रालय ◆ परमाणु ऊर्जा विभाग ◆ अंतरिक्ष विभाग 3 श्री अर्जुन राम मेघवाल ◆ संसदीय कार्य मंत्रालय 4 श्री जाधव प्रतापराव गणपतराव ◆ स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय 5 श्री जयंत चौधरी ◆ शिक्षा ... Read more - [राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार)](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): इन मंत्रियों के पास अपना एक स्वतन्त्र मंत्रालय तो होता है लेकिन ये प्रधानमंत्री की नीति निर्माण प्रक्रिया में शामिल नहीं होते हैं। वर्तमान भारत सरकार में इनकी संख्या 5 है, जिनके नाम और मंत्रालय निम्नलिखित सूची में दिए गए हैं- क्र.स. मंत्री का नाम मंत्रालय 1 श्री राव इन्द्रजीत सिंह ◆ सांख्‍यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्‍वयन मंत्रालय ◆ योजना मंत्रालय 2 डॉ. जितेंद्र सिंह ◆ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ◆ भू-विज्ञान मंत्रालय 3 श्री अर्जुन राम मेघवाल ◆ कानून एवं न्‍याय मंत्रालय 4 श्री जाधव प्रतापराव गणपतराव ◆ आयुर्वेद, योगा एवं प्राकृतिक चिकित्‍सा, यूनानी, सिद्धा, होम्‍योपैथिक मंत्रालय (आयुष) 5 श्री ... Read more - [कैबिनेट मंत्री](https://hindidepartment.com/%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80/): यह ऐसे मंत्रियों का समूह होता है, जिन्हें प्रधानमंत्री अपने नीति निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करता है। इनके पास सभी महत्वपूर्ण मंत्रालय होते हैं। वर्तमान भारत सरकार में इनकी संख्या 31 है। जिनके नाम और मंत्रालय निम्नलिखित सूची में दिए गए हैं। क्र.स. मंत्री का नाम मंत्रालय 1 श्री नरेंद्र मोदी ◆ कार्मिक, जनशिकायत एवं पेंशन मंत्रालय ◆ परमाणु ऊर्जा विभाग ◆ अंतरिक्ष विभाग 2 श्री राजनाथ सिंह ◆ रक्षा मंत्रालय 3 श्री अमित शाह ◆ गृह मंत्रालय ◆ सहकारिता मंत्रालय 4 श्री नितिन जयराम गडकरी ◆ सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय 5 श्री जगत प्रकाश नड्डा ◆ स्‍वास्‍थ्‍य ... Read more - [केन्द्रीय मंत्रिपरिषद](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a4%a6/): मंत्रिपरिषद क्या है ? संविधान के अनुच्छेद-74 में यह प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रपति को उसके कार्यों में सहायता एवं सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी तथा मंत्रिपरिषद की यह सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी होगी। इस प्रकार से मंत्रिपरिषद जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री करता है एक अत्यन्त ही मजबूत संस्था है। प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद की सिफारिश के आधार पर राष्ट्रपति की शक्तियों का प्रयोग करता है। 91वें संविधान संशोधन 2003 के द्वारा मंत्रिपरिषद के आकार को सीमित कर दिया गया। इस संशोधन के द्वारा यह प्रावधान किया गया कि संघ में मंत्रियों की संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या ... Read more - [उत्तर प्रदेश के लोकसभा सदस्य](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%a6/): विभिन्न राज्यों में लोकसभा की सीटों के आबंटन का आधार उस राज्य की जनसंख्या होती है। संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार, प्रत्येक जनगणना के पश्चात संसद विधि द्वारा परिसीमन अधिनियम को अधिनियमित करती है। अधिनियम के प्रवृत् होने के पश्चात केन्द्र सरकार परिसीमन आयोग का गठन करती है। यह परिसीमन आयोग परिसीमन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का सीमांकन करता है। उत्तर प्रदेश में वर्तमान समय में लोकसभा क्षेत्रों की संख्या 80 है। ये सभी क्षेत्र और इनसे चुने गए प्रत्याशियों के नाम निम्न सूची में दिए गए हैं। क्र.स. क्षेत्र सदस्य दल 1 ... Read more - [लोकसभा](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be/): लोकसभा क्या है ? लोकसभा संसद का निम्न सदन होता है। जिसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद-81 में किया गया है। इसमें सदस्यों का चुनाव आम जनता के द्वारा किया जाता है। इसप्रकार से लोकसभा केन्द्र में लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय संविधान के अनुसार सदन की अधिकतम संख्या 550 होगी, जिसमें से 530 सदस्य राज्यों का प्रतिनिधित्व करेंगे और 20 सदस्य संघशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करेंगे। वर्तमान में सदन की सदस्य संख्या 543 है। लोकसभा का निर्वाचन लोकसभा का निर्वाचन आम जनता के द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रादेशिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर एकल निर्वाचन क्षेत्र से होता है। ... Read more - [राज्यसभा](https://hindidepartment.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be/): राज्यसभा क्या है ? संविधान के अनुच्छेद-80 में राज्यसभा के गठन से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। राज्यसभा संसद का उच्च सदन होता है, जो केन्द्र में राज्यों का नेतृत्व करता है। राज्यसभा की प्रासंगिकता संसदीय व्यवस्था में अत्यन्त ही अधिक होती है। यह एक स्थाई सदन है, जिसे कभी भी भंग नहीं किया जा सकता। राज्यसभा सदस्यों का निर्वाचन संविधान में इस बात का उल्लेख किया गया है कि राज्यसभा में अधिकतम सीटों की संख्या 250 होगी। जिनमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति नॉमिनेट करेगा। ये 12 सदस्य खेल, कला, संगीत, साहित्य जैसे क्षेत्रों से होते हैं। बाकी 238 सदस्यों ... Read more - [उत्तर प्रदेश के राज्यसभा सदस्य](https://hindidepartment.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be/): संविधान की अनुसूची चार के अनुसार किसी राज्य में राज्यसभा की कितनी सीटें होंगी ये उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की आबादी के अनुसार तय किया जाएगा। इस हिसाब से उत्तर प्रदेश के लिए 31 सीटें निर्धारित की गई हैं। वर्तमान समय में इसके सभी 31 राज्यसभा सदस्यों के नाम निम्नलिखित सूची में देख सकते हैं। क्र.स. सदस्य दल 1 लक्ष्मीकांत बाजपेयी BJP 2 राधा मोहन दास अग्रवाल BJP 3 सुरेन्द्र सिंह नागर BJP 4 संगीता यादव BJP 5 दर्शना सिंह BJP 6 बाबूराम निषाद BJP 7 के. लक्ष्मण BJP 8 मिथलेश कुमार BJP 9 हरदीप सिंह पुरी BJP ... Read more - [निबंध- कहानी कला](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/): गल्प, आख्यायिका या छोटी कहानी लिखने की प्रथा प्राचीन काल से चली आती है। धर्म-ग्रन्थो मे जो दृष्टान्त भरे पडे है, वे छोटी कहा- नियाँ ही है, पर कितनी उच्च-कोटि की । महाभारत,उपनिषद्, बुद्ध जातक, बाइबिल, सभी सद्ग्रथों मे जन-शिक्षा का यही साधन उपयुक्त समझा गया है । ज्ञान और तत्व की बाते इतनी सरल रीति से और क्योकर समझायी जाती ? किन्तु प्राचीन ऋषि इन दृष्टान्तों द्वारा केवल आध्यात्मिक और नैतिक तत्वो का निरूपण करते थे। उनका अभिप्राय केवल मनोरञ्जन न होता था । सद्ग्रथो के रूपको और बाइबिल के Parables देखकर तो यही कहना पड़ता है कि अगले ... Read more - [निबंध- साहित्य का आधार](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0/): साहित्य का सम्बन्ध बुद्धि से उतना नही जितना भावों से है। बुद्धि के लिए दर्शन है, विज्ञान है, नीति है । भावो के लिए कविता है,उपन्यास है, गद्यकाव्य है। आलोचना भी साहित्य का एक अंग मानी जाती है, इसीलिए कि वह साहित्य को अपनी सीमा के अन्दर रखने की व्यवस्था करती है ।साहित्य मे जब कोई ऐसी वस्तु सम्मिलित हो जाती है,जो उसके रस प्रवाह मे बाधक होती है, तो वहीं साहित्य मे दोष का प्रवेश हो जाता है । उसी तरह जैसे संगीत मे कोई बेसुरी ध्वनि उसे दूषित कर देती है । बुद्धि और मनोभाव का भेद काल्पनिक ... Read more - [निबंध- जीवन में साहित्य का स्थान](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/): साहित्य का आधार जीवन है। इसी नींव पर साहित्य की दीवार खड़ी होती है। उसकी अटरियाँ, मीनार और गुम्बद बनते हैं लेकिन बुनियाद मिट्टी के नीचे दबी पड़ी है। उसे देखने को भी जी नहीं चाहेगा। जीवन परमात्मा की सृष्टि है, इसलिए अनंत है, अगम्य है। साहित्य मनुष्य की सृष्टि है, इसलिए सुबोध है, सुगम है और मर्यादाओं से परिमित है। जीवन परमात्मा को अपने कामों का जवाबदेह है या नहीं, हमें मालूम नहीं, लेकिन साहित्य तो मनुष्य के सामने जवाबदेह है। इसके लिए कानून हैं, जिनसे वह इधर-उधर नहीं हो सकता। जीवन का उद्देश्य ही आनंद है। मनुष्य जीवनपर्यत ... Read more - [मुंशी प्रेमचंद के निबंध](https://hindidepartment.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7/):     - [निबंध- संपादकों के लिए स्कूल](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95/): कुछ दिन हुए अख़बारों में यह चर्चा हुई थी कि अमेरिका में संपादकों के लिए स्कूल खुलने वाला है। इस स्कूल का बनना शुरू हो गया और इस वर्ष इसकी इमारत तो पूरी हो जाएगी। आशा है कि स्कूल इसी वर्ष ज़ारी भी हो जाए। अमेरिका के न्यू प्रांत में कोलंबिया नामक एक विश्वविद्यालय है। वही इस स्कूल को खोल रहा है। जैसे, क़ानून, डॉक्टरी, इंजीनियरी और कला-कौशल आदि के अलग-अलग स्कूल और कॉलेज हैं। और अलग-अलग होकर भी किसी विश्वविद्यालय से संबंध रखते हैं, वैसे ही संपादकीय विद्या सिखाने का यह स्कूल भी कोलंबिया के विश्वविद्यालय मे संबंध रखेगा। ... Read more - [आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के आलोचनात्मक लेख](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%95-3/) - [आलोचनात्मक लेख- उपन्यास](https://hindidepartment.com/%e0%a4%86%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%95-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%96-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8/): आजकल उपन्यास लिखने में बहुत लोगों की धड़क खुल गई है। इनमें यदि थोड़े ऐसे हैं जिन्हें अपनी कल्पना और अनुभव का सहारा है, तो बहुत से ऐसे भी हैं जिनका अन्य भाषाओं की विख्यात पुस्तकों पर गुज़ारा है। उपन्यास साहित्य का एक प्रधान अंग है। मानव प्रकृति पर इसका प्रभाव बहुत पड़ता है। अतः अच्छे उपन्यासों से भाषा की बहुत कुछ पूर्ति और समाज का बहुत कुछ कल्याण हो सकता है।  मानव जीवन के अनेक रूपों का परिचय कराना उपन्यास का काम है। यह उन सूक्ष्म से सूक्ष्म घटनाओं को प्रत्यक्ष करने का यत्न करता है जिससे मनुष्य का ... Read more - [निबंध- उत्साह](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9/): दुःख के वर्ग में जो स्थान भय का है, आनंद वर्ग में वही स्थान उत्साह का है। भय में हम प्रस्तुत कठिन स्थिति के निश्चय से विशेष रूप में दुखी और कभी-कभी स्थिति से अपने को दूर रखने के लिए प्रयत्नवान् भी होते हैं। उत्साह में हम आनेवाली कठिन स्थिति के भीतर साहस के अवसर के निश्चय-द्वारा प्रस्तुत कर्म-सुख की उमंग में अवश्य प्रयत्नवान् भी होते हैं। उत्साह में कष्ट या हानि सहने की दृढ़ता के साथ-साथ कर्म में प्रवृत्त होने के आनंद का योग रहता है। साहसपूर्ण आनंद की उमंग का नाम उत्साह है। कर्म-सौंदर्य के उपासक ही सच्चे ... Read more - [निबंध- क्रोध](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a7/): क्रोध दु:ख के चेतन कारण से साक्षात्कार या अनुमन से उत्पन्न होता है। साक्षात्कार के समय दु:ख और उसके कारण के संबंध का परिज्ञान आवश्यक है। तीन चार महीने के बच्चे को कोई हाथ उठाकर मार दे, तो उसने हाथ उठाते तो देखा है पर अपनी पीड़ा और उस हाथ उठाने से क्या संबंध है, यह वह नहीं जानता है। अत: वह केवल रोकर अपना दु:ख मात्र प्रकट कर देता है। दु:ख के कारण की स्पष्ट धारणा के बिना क्रोध का उदय नहीं होता। दु:ख के संज्ञान कारण पर प्रबल प्रभाव डालने में प्रवृत्त करनेवाला मनोविकार होने के कारण क्रोध ... Read more - [निबंध- मानस की धर्म-भूमि](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf/): धर्म की रसात्मक अनुभूति का नाम भक्ति है, यह हम कहीं पर कह चुके हैं। धर्म है ब्रह्म के सत्स्वरूप की व्यक्त प्रवृत्ति, जिसकी असीमता का आभास अखिल विश्वस्थिति में मिलता है। इस प्रवृत्ति का साक्षात्कार परिवार और समाज ऐसे छोटे क्षेत्रों से लेकर समस्त भूमंडल और अखिल विश्व तक के बीच किया जा सकता है। परिवार और समाज की रक्षा में, लोक के परिचालन में और समष्टि रूप में, अखिल विश्व की शास्वत स्थिति में सत् की इसी प्रवृत्ति के दर्शन होते हैं। ध्यासन देने की बात यह है कि सत्स्वरूप की इस प्रवृत्ति का साक्षात्कार जितने ही विस्तृत ... Read more - [निबंध- भाव या मनोविकार](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/): अनुभूति के द्वंद्व ही से प्राणी के जीवन का आरंभ होता है। उच्च प्राणी मनुष्य भी केवल एक जोड़ी अनुभूति लेकर इस संसार में आता है। बच्चे के छोटे से हृदय में पहले सुख और दु:ख की सामान्य अनुभूति भरने के लिए जगह होती है। पेट का भरा या खाली रहना ही ऐसी अनुभूति के लिए पर्याप्त होता है। जीवन के आरंभ में इन्हीं दोनों के चिद्द हँसना और रोना देखे जाते हैं पर ये अनुभूतियाँ बिलकुल सामान्य रूप में रहती हैं, विशेष विशेष विषयों की ओर विशेष विशेष रूपों में ज्ञानपूर्वक उन्मुख नहीं होतीं। नाना विषयों के बोध का ... Read more - [निबंध- लज्जा और ग्लानि](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf/): हम जिन लोगों के बीच रहते हैं अपने विषय में उनकी धारणा का जितना ही अधिक ध्यान रखते हैं उतना ही अधिक प्रतिबंध अपने आचरण पर रखते हैं। जो हमारी बुराई, मूर्खता या तुच्छता के प्रमाण पा चुके रहते हैं, उनके सामने हम उसी धड़ाके के साथ नहीं जाते जिस धड़ाके के साथ औरों के सामने जाते हैं। यहीं तक नहीं, जिन्हें इस प्रकार का प्रमाण नहीं भी मिला रहता है, उनके आगे भी कोई काम करते हुए यह सोचकर कुछ आगापीछा होता है कि कहीं इस प्रकार का प्रमाण उन्हें मिल न रहा हो। दूसरों के चित्त में अपने ... Read more - [निबंध- लोभ और प्रीति](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%ad-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): जिस प्रकार सुख या आनंद देनेवाली वस्तु के संबंध में मन की ऐसी स्थिति को जिसमें उस वस्तु के अभाव की भावना होते ही प्राप्ति, सान्निध्य या रक्षा की प्रबल इच्छा जग पड़े, लोभ कहते हैं। दूसरे की वस्तु का लोभ करके उसे लोग लेना चाहते हैं, अपनी वस्तु का लोभ करके उसे लोग देना या नष्ट होने देना नहीं चाहते। प्राप्य या प्राप्त सुख के अभाव या अभाव कल्पना के बिना लोभ की अभिव्यक्ति नहीं होती। अत: इसके सुखात्मक और दु:खात्मक दोनों पक्ष हैं। जब लोभ अप्राप्य के लिए होता है तब तो दु:ख स्पष्ट ही रहता है। प्राप्य ... Read more - [निबंध- घृणा](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%98%e0%a5%83%e0%a4%a3%e0%a4%be/): सृष्टि विस्तार से अभ्यस्त होने पर प्राणियों को कुछ विषय ग्राह्य और कुछ अग्राह्य प्रतीत होने लगते हैं। इन अग्राह्य विषयों के उपस्थित होने पर जो दु:ख होता है उसे घृणा कहते हैं। सुबीते के लिए हम यहाँ घृणा के दो विभाग करते हैं-स्थूल और मनसिक। स्थूल घृणा, ऑंख, कान और नाक इन्हीं तीन इन्द्रियों से संबंध रखती है। हम चिपटी नाक और कानी ऑंख से सुसज्जित चेहरे को देख घृणा करते हैं। खरस्वान खर्राट की तान सुनकर कान में उँगली डालते हैं और म्युनिसिपैलिटी की मैलागाड़ी सामने आने पर नाक पर रूमाल रखते हैं। रस और स्पर्श अकेले घृणा ... Read more - [निबंध- भय](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%ad%e0%a4%af/): किसी आती हुई आपदा की भावना या दुख के कारण के साक्षात्‍कार से जो एक प्रकार का आवेगपूर्ण अथवा स्‍तंभ-कारक मनोविकार होता है उसी को भय कहते हैं। क्रोध दुख के कारण पर प्रभाव डालने के लिए आकुल करता है और भय उसकी पहुँच से बाहर होने के लिए। क्रोध दुख के कारण के स्‍वरूपबोध के बिना नहीं होता। यदि दुख का कारण चेतन होगा और यह समझा जायगा कि उसने जान-बूझकर दुख पहुँचाया है, तभी क्रोध होगा। पर भय के लिए कारण का निर्दिष्‍ट होना जरूरी नहीं; इतना भर मालूम होना चाहिए कि दुख या हानि पहुँचेगी। यदि कोई ... Read more - [निबंध- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%81-%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%a8/): हिंदी-गद्य-साहित्य का सूत्रपात करनेवाले चार महानुभाव कहे जाते हैं-मुंशी सदासुखलाल, इंशाअल्ला खाँ, लल्लू लाल और सदल मिश्र । ये चारों संवत्‌ 1860 के आस-पास वर्तमान थे । सच पूछिए तो ये गद्य के नमूने दिखानेवाले ही रहे; अपनी परंपरा प्रतिष्ठित करने का गौरव इनमें से किसी को भी प्राप्त न हुआ । हिंदी-गद्य-साहित्य की अखंड परंपरा का प्रवर्तन इन चारों लेखको के 70-72 वर्ष पीछे हुआ । विक्रम की बीसवीं शताब्दी का प्रथम चरण समाप्त हो जाने पर जब भारतेन्दु ने हिन्दी-गद्य की भाषा को सुव्यवस्थित और परिमार्जित करके उसका स्वरूप स्थिर कर दिया तब से गद्य-साहित्य की परंपरा लगातार ... Read more - [निबंध- तुलसी का भक्ति-मार्ग](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d/): भक्ति रस का पूर्ण परिपाक जैसा तुलसीदासजी में देखा जाता है वैसा अन्यत्र नहीं। भक्ति में प्रेम के अतिरिक्त आलंबन के महत्त्व और अपने दैन्य का अनुभव परम आवश्यक अंग हैं। तुलसी के हृदय से इन दोनों अनुभवों के ऐसे निर्मल शब्दस्रोत निकले हैं, जिनमें अवगाहन करने से मन की मैल कटती है और अत्यंत पवित्र प्रफुल्लता आती है। गोस्वामीजी के भक्ति क्षेत्र में शील, शक्ति और सौंदर्य तीनों की प्रतिष्ठा होने के कारण मनुष्य की संपूर्ण भावात्मिका प्रकृति का परिष्कार और प्रसार के लिए मैदान पड़ा हुआ है। वहाँ जिस प्रकार लोक व्यवहार से अपने को अलग करके आत्म ... Read more - [निबंध- काव्य में लोक-मंगल की साधनावस्था](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%95/): तदेजति तन्नैजति—ईशावास्योपनिषद् आत्मबोध और जगद्बोधा के बीच ज्ञानियों ने गहरी खाई खोदी पर हृदय ने कभी उसकी परवा न की; भावना दोनों को एक ही मनकर चलती रही। इस जगत् के बीच जिस आनंद मंगल की विभूति का साक्षात्कार होता रहा उसी के स्वरूप की नित्य और चरम भावना द्वारा भक्तों के हृदय में भगवान् के स्वरूप की प्रतिष्ठा हुई। लोक में इसी स्वरूप के प्रकाश को किसी ने ‘रामराज्य’ कहा, किसी ने ‘आसमन की बादशाहत’। यद्यपि मूसाइयों और उनके अनुगामी ईसाइयों की धर्म पुस्तक में आदम को खुदा की प्रतिमूर्ति बताया गया, पर लोक के बीच नर में नारायण ... Read more - [निबंध- साधारणीकरण और व्यक्ति-वैचित्र्यवाद](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95/): किसी काव्य का श्रोता या पाठक जिन विषयों को मन में लाकर रति, करुणा, क्रोध, उत्साह इत्यादि भावों तथा सौंदर्य, रहस्य, गांभीर्य आदि भावनाओं का अनुभव करता है, वे अकेले उसी के हृदय से संबंध रखनेवाले नहीं होते; मनुष्य मात्र की भावात्मक सत्ता पर प्रभाव डालनेवाले होते हैं। इसी से उक्त काव्य को एक साथ पढ़ने या सुननेवाले सहस्रों मनुष्य उन्हीं भावों या भावनाओं का थोड़ा बहुत अनुभव कर सकते हैं। जब तक किसी भाव का कोई विषय इस रूप में नहीं लाया जाता कि वह सामान्यत: सबसे उसी भाव का आलंबन हो सके तब तक उसमें रसोद्बोधान की पूर्ण ... Read more - [निबंध- रसात्मक बोध के विविध रूप](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%95-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%a7-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%bf/): संसार सागर की रूप तरंगों से ही मनुष्य की कल्पना का निर्माण और इसी रूप गति से उनके भीतर विविधा भावों या मनोविकारों का विधान हुआ है। सौंदर्य, माधुर्य, विचित्रता, भीषणता, क्रूरता इत्यादि की भावनाएँ बाहरी रूपों और व्यापारों से ही निष्पन्न हुई हैं। हमारे प्रेम, भय, आश्चर्य, क्रोध, करुणा इत्यादि भावों की प्रतिष्ठा करनेवाले मूल आलंबन बाहर ही के हैंइसी चारों ओर फैले हुए रूपात्मक जगत् के ही हैं। जब हमारी ऑंखें देखने में प्रवृत्त रहती हैं, तब रूप हमारे बाहर प्रतीत होते हैं जब हमारी वृत्ति अंतर्मुख होती है तब रूप हमारे भीतर दिखाई पड़ते हैं। बाहर भीतर ... Read more - [निबंध- ईर्ष्या](https://hindidepartment.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7-%e0%a4%88%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/): जैसे दूसरे के दु:ख को देख दु:ख होता है वैसे ही दूसरे के सुख या भलाई को देखकर भी एक प्रकार का दु:ख होता है, जिसे ईर्ष्या कहते हैं। ईर्ष्या की उत्पत्ति कई भावों के संयोग से होती है, इससे इसका प्रादुर्भाव बच्चों में कुछ देर में देखा जाता है और पशुओं में तो शायद होता ही न हो। ईर्ष्या एक संकर भाव है जिसकी संप्राप्ति आलस्य, अभिमन और नैराश्य के योग से होती है। जब दो बच्चे किसी खिलौने के लिए झगड़ते हैं तब कभी कभी ऐसा देखा जाता है कि एक उस खिलौने को लेकर फोड़ देता है ... Read more [comment]: # (Generated by Hostinger Tools Plugin)