स्वच्छंदतावाद क्या है ?

भूमिका स्वच्छंदतावाद (Romanticism) साहित्य, कला और दर्शन का वह महत्त्वपूर्ण आंदोलन है जिसने अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध और उन्नीसवीं शताब्दी ...
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आधुनिकतावाद क्या है ?

भूमिका बीसवीं शताब्दी मानव इतिहास का एक निर्णायक कालखंड है। औद्योगिक क्रांति, वैज्ञानिक आविष्कार, दो विश्व युद्ध, उपनिवेशवाद का पतन, ...
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उत्तर-संरचनावाद क्या है ?

भूमिका बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पश्चिमी चिंतन-परंपरा में एक महत्त्वपूर्ण वैचारिक उद्भव हुआ, जिसे ‘उत्तर–संरचनावाद’ के नाम से जाना ...
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लोक-साहित्य : पारिभाषिक स्वरूप एवं तत्व

भूमिका भारतीय संस्कृति की जड़ों में लोक-समाज की स्मृतियाँ, अनुभव, आस्थाएँ, संवेदनाएँ और मान्यताएँ जिस रूप में संरक्षित हैं, उन्हें ...
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संरचनावाद क्या है ?

भूमिका मानव सभ्यता के बौद्धिक इतिहास में बीसवीं शताब्दी को विचारों की क्रांतिकारी शताब्दी माना जाता है। इस युग में ...
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कल्पना की अवधारणा

भूमिका मानव जीवन की संपूर्ण सृष्टि और सभ्यता का आधार उसकी सोचने, गढ़ने और नए रूपों का निर्माण करने की ...
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मिथक क्या है ?

प्रस्तावना मानव सभ्यता के विकास में कथा-परंपरा की अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रारंभिक काल में जब मनुष्य प्रकृति की ...
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भारतीय उपन्यास की अवधारणा

भूमिका भारतीय साहित्य का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। वेदों, उपनिषदों, महाकाव्यों और पुराणों से लेकर आधुनिक कथा-साहित्य तक ...
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साधारणीकरण (भारतीय काव्यशास्त्र)

प्रस्तावना भारतीय काव्यशास्त्र में साधारणीकरण (Universalization) एक अत्यंत महत्वपूर्ण तथा केंद्रीय सिद्धांत है, जो काव्य में रस की निष्पत्ति को ...
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त्रासदी की अवधारणा | अरस्तु

प्रस्तावना त्रासदी (Tragedy) मूल रूप से नाटकों की एक शैली है जिसमें हमें मानवीय दुःखों का वर्णन देखने को मिलता ...
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